व्यापार
1 जनवरी से चेकबुक के नियम बदलने का दावा, RBI ने किया सच स्पष्ट
Rajeshwari Nishad
8 Nov 2026 4:15 PM IST

x
बिज़नेस : सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और चेकबुक से जुड़ा एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि 1 जनवरी 2027 से चेकबुक के नियमों में बड़ा बदलाव होने वाला है। वायरल संदेश के सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों के बीच नए नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक इकाई ने इस दावे को फर्जी बताया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) से संबंधित चेकबुक के नियमों में बदलाव करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे संदेश को आधिकारिक सूचना नहीं माना जाना चाहिए। बैंक ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे चेकबुक से जुड़े किसी भी नए नियम की जानकारी केवल आरबीआई या अपने बैंक के आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त करें।
1 जनवरी 2027 से नियम बदलने का किया जा रहा दावा
वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक नए साल की शुरुआत से चेकबुक के नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। संदेश में 1 जनवरी 2027 की तारीख का उल्लेख किया गया है।इस तरह के संदेश सामने आने के बाद चेकबुक का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मन में कई सवाल पैदा हो सकते हैं। खासकर ऐसे ग्राहक, जो नियमित रूप से चेक के जरिए भुगतान करते हैं, उनके लिए बैंकिंग नियमों से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होती है।हालांकि, किसी संदेश में आरबीआई का नाम या निश्चित तारीख लिखे होने से उसकी सत्यता प्रमाणित नहीं होती। बैंकिंग नियमों में बदलाव की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना या संबंधित बैंक की सूचना के माध्यम से ही विश्वसनीय मानी जानी चाहिए।
PIB Fact Check ने वायरल दावे को बताया फर्जी
प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक इकाई ने वायरल मैसेज की सत्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पीआईबी फैक्ट चेक ने 1 जनवरी 2027 से चेकबुक के नियमों में बदलाव किए जाने के दावे को फर्जी बताया है।इसका मतलब है कि वायरल संदेश में दी गई जानकारी को सही मानकर किसी प्रकार का निर्णय लेने की आवश्यकता नहीं है।पीआईबी फैक्ट चेक का उद्देश्य सरकारी नीतियों, योजनाओं और सार्वजनिक संस्थानों से संबंधित भ्रामक सूचनाओं की पहचान करना है। इस तरह के स्पष्टीकरण लोगों को गलत जानकारी के आधार पर भ्रमित होने से बचाने में मदद करते हैं।चेकबुक के नियमों को लेकर फैली अफवाह के मामले में भी पीआईबी की ओर से जारी स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है।
RBI ने भी साफ की स्थिति
भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल CTS चेकबुक के नियमों में बदलाव करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।आरबीआई का यह स्पष्टीकरण उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो वायरल संदेश के कारण अपनी मौजूदा चेकबुक की वैधता या भविष्य में उसके इस्तेमाल को लेकर चिंतित हो सकते हैं।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से चेकबुक के नियम बदलने का वायरल दावा सही नहीं है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में बैंकिंग नियमों में कभी कोई बदलाव नहीं होगा। किसी भी नए नियम की जानकारी आधिकारिक घोषणा के माध्यम से ही स्पष्ट होगी।इसलिए ग्राहकों को अपुष्ट संदेशों के बजाय आरबीआई की वेबसाइट और अपने बैंक की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।
क्या होता है CTS चेकबुक सिस्टम?
चेक ट्रंकेशन सिस्टम यानी CTS बैंकिंग प्रणाली में चेक की क्लियरिंग से जुड़ी एक व्यवस्था है। इसके अंतर्गत चेक की भौतिक आवाजाही को कम करके उसकी इलेक्ट्रॉनिक छवि और संबंधित जानकारी के माध्यम से क्लियरिंग की प्रक्रिया पूरी की जाती है।इस व्यवस्था का उद्देश्य चेक भुगतान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।CTS से संबंधित मानकों का पालन बैंकिंग प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण होता है। चेक की सुरक्षा और भुगतान प्रक्रिया में निर्धारित तकनीकी मानकों का इस्तेमाल किया जाता है।हालांकि, CTS व्यवस्था और उससे संबंधित नियमों को लेकर किसी भी बदलाव की जानकारी आधिकारिक माध्यम से ही प्राप्त करनी चाहिए।
बैंक ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
अगर किसी ग्राहक को व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चेकबुक के नियम बदलने से जुड़ा संदेश मिलता है, तो उसे तुरंत सही नहीं मानना चाहिए।सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि संदेश किस स्रोत से जारी हुआ है। यदि उसमें आरबीआई की किसी अधिसूचना का दावा किया गया है, तो उसकी पुष्टि रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से की जा सकती है।इसके अलावा ग्राहक अपने बैंक की वेबसाइट, मोबाइल बैंकिंग ऐप या ग्राहक सेवा के माध्यम से भी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।बिना सत्यापन के ऐसे संदेशों को आगे भेजने से बचना चाहिए। इससे दूसरे लोगों में अनावश्यक भ्रम फैल सकता है।
फर्जी बैंकिंग संदेशों से रहें सावधान
बैंकिंग से जुड़ी गलत सूचनाएं लोगों के वित्तीय निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। कई बार ऐसे संदेशों में नियम बदलने, खाते बंद होने या किसी सुविधा के समाप्त होने का दावा किया जाता है।इस तरह की सूचनाओं के कारण लोग जल्दबाजी में निर्णय ले सकते हैं। इसलिए किसी भी बैंकिंग अपडेट की पुष्टि करना जरूरी है।यदि किसी संदेश में नियमों के बदलाव के नाम पर लिंक खोलने, व्यक्तिगत जानकारी देने या ओटीपी साझा करने के लिए कहा जाए, तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।आरबीआई या बैंक से जुड़ी आधिकारिक जानकारी प्राप्त करने के लिए विश्वसनीय माध्यमों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
चेकबुक के नए नियमों को लेकर घबराने की जरूरत नहीं
पीआईबी फैक्ट चेक और आरबीआई के स्पष्टीकरण के बाद 1 जनवरी 2027 से CTS चेकबुक के नियमों में बदलाव किए जाने का वायरल दावा फर्जी बताया गया है।ऐसे में बैंक ग्राहकों को इस संदेश के आधार पर अपनी चेकबुक बदलने या किसी अन्य कदम को उठाने की आवश्यकता नहीं है।ग्राहकों को सामान्य बैंकिंग प्रक्रियाओं का पालन करते रहना चाहिए और भविष्य में किसी भी बदलाव की जानकारी आधिकारिक सूचना के माध्यम से प्राप्त करनी चाहिए।कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा चेकबुक के नियम बदलने वाला संदेश भ्रामक है। पीआईबी फैक्ट चेक ने इसे फर्जी बताया है और आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल CTS चेकबुक नियमों में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है।
Next Story





