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सोना सस्ता होते ही चीन ने खरीद डाला 21 टन गोल्ड
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट के बीच चीन ने बड़ी खरीदारी की है। चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने सितंबर 2026 में अपने स्वर्ण भंडार में करीब 21 टन सोना जोड़ा है। यह पिछले लगभग तीन वर्षों में एक महीने के दौरान की गई सबसे बड़ी खरीदारी बताई जा रही है। इस खबर के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि चीन की इतनी बड़ी खरीदारी के बाद क्या सोने के दाम फिर बढ़ सकते हैं।
तीन साल में सबसे बड़ी खरीदारी
7 अक्टूबर को सामने आए आंकड़ों के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक ने सितंबर में 21 टन सोने की खरीदारी की। सितंबर 2023 के बाद यह सबसे बड़ी मासिक खरीद बताई गई है। उस समय चीन ने करीब 24 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा था।
इससे पहले अगस्त और जुलाई 2026 में भी चीन ने बड़ी मात्रा में सोना खरीदा था। लगातार खरीदारी से स्पष्ट है कि चीन अपने आधिकारिक भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने की नीति जारी रखे हुए है। 21 टन खरीदारी की वास्तविक लागत की अलग से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए करीब 27 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को आधिकारिक खरीद मूल्य नहीं माना जा सकता।
लगातार 23 महीने से खरीद रहा सोना
चीन पिछले 23 महीनों से लगातार अपने स्वर्ण भंडार में बढ़ोतरी कर रहा है। सितंबर की खरीदारी इसी सिलसिले का हिस्सा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, अगस्त 2026 में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने कुल 39 टन सोने की शुद्ध खरीदारी की थी। चीन इस दौरान प्रमुख खरीदारों में शामिल रहा। केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी को विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और वित्तीय जोखिम कम करने की रणनीति से जोड़कर देखा जाता है।
सोने की कीमत गिरते ही बढ़ाई खरीदारी
सितंबर में सोने की कीमतों में नरमी के बीच चीन ने अपनी खरीदारी तेज की। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव बना हुआ है। 7 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमत गिरकर करीब 4,114 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई थी। अमेरिकी डॉलर में मजबूती के कारण निवेशकों के लिए सोने का आकर्षण कुछ कम हुआ। इसके बावजूद चीन जैसे केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी सोने की लंबी अवधि की मांग को समर्थन दे रही है।
आखिर चीन इतना सोना क्यों खरीद रहा है?
सोना केंद्रीय बैंकों के लिए एक महत्वपूर्ण आरक्षित संपत्ति है। अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता, मुद्रा विनिमय में उतार-चढ़ाव और वित्तीय जोखिम के दौरान सोने का रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
चीन सहित कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विभिन्न संपत्तियों की हिस्सेदारी संतुलित करने पर ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, चीन की प्रत्येक खरीदारी के पीछे किसी एक निश्चित उद्देश्य का दावा करना उचित नहीं होगा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2026 में पोलैंड और चीन सोने के प्रमुख सरकारी खरीदारों में शामिल रहे हैं।
क्या अब फिर महंगा होगा सोना?
चीन की बड़ी खरीदारी से वैश्विक बाजार में सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है। लेकिन केवल इस खरीदारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें निश्चित रूप से बढ़ेंगी। सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती, वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों, निवेशकों की मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का संयुक्त प्रभाव पड़ता है। यदि डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी जारी रहती है तो सोने पर दबाव बने रहने की संभावना भी है। दूसरी ओर, केंद्रीय बैंकों और निवेशकों की मांग बढ़ने से कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
भारत में सोना खरीदने वालों पर क्या होगा असर?
भारत में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर तथा आयात शुल्क जैसे कारकों से प्रभावित होती हैं। त्योहारी और शादी के सीजन में घरेलू मांग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में चीन की खरीदारी भारतीय सर्राफा बाजार के लिए एक अहम संकेत है, लेकिन इसका तत्काल असर कितना होगा, यह निश्चित नहीं है। फिलहाल चीन की 21 टन सोने की खरीदारी ने वैश्विक बाजार का ध्यान खींचा है। अब निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और केंद्रीय बैंकों की अगली खरीदारी पर रहेगी।
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