
New Delhi नई दिल्ली: भारत सरकार ने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में अहम बदलाव किए हैं। अब स्वतंत्र बिजली उत्पादक कंपनियां (आईपीपी) बिजली खरीद समझौते (PPA) के बिना भी लंबी अवधि के लिए कोयले की आपूर्ति प्राप्त कर सकेंगी। कैबिनेट द्वारा मंजूर इस नई नीति के तहत कंपनियां 12 महीने से लेकर 25 वर्षों तक की अवधि के लिए नीलामी के जरिए कोयला खरीद सकती हैं, जिसके लिए तय दर से अधिक प्रीमियम देना होगा।
इस कदम से थर्मल पावर परियोजनाओं की नई योजनाएं तैयार करने में सहूलियत होगी। सरकार चाहती है कि अधिक बिजली संयंत्र कोयला खदानों के पास स्थापित किए जाएं, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में कोयला ढुलाई की जटिलता कम की जा सके।
वर्तमान में देश की कोयला आधारित बिजली क्षमता 222 गीगावॉट है, जिसे 2031–32 तक 80 गीगावॉट और बढ़ाने का India, Coal Policy, Power Plant, Thermal Power, Coal, Power Purchase Agreementक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही भारत 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित करने का प्रयास भी कर रहा है।





