
व्यापार | भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में BSNL की लापरवाही और रिलायंस जियो से बकाया वसूली नहीं करने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, BSNL के कुप्रबंधन और अनुचित फैसलों के कारण सरकार को ₹1757 करोड़ का नुकसान हुआ। वहीं, CAG ने यह भी सवाल उठाया कि रिलायंस जियो से स्पेक्ट्रम और अन्य बकाया राशि वसूलने में भी कोताही बरती गई।
कैसे हुआ ₹1757 करोड़ का नुकसान?
CAG की रिपोर्ट में BSNL की अक्षम वित्तीय नीतियों और अनुबंधों की खामियों को इस नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
अप्रभावी प्रबंधन: BSNL ने समय पर अपनी सेवाओं और बुनियादी ढांचे को अपडेट नहीं किया, जिससे बाजार में इसकी पकड़ कमजोर हुई।
अनुचित खर्च: गैर-जरूरी परियोजनाओं और अनुपयोगी उपकरणों पर भारी खर्च किया गया, जिससे वित्तीय बोझ बढ़ा।
राजस्व वसूली में लापरवाही: कई निजी कंपनियों से यूजर चार्ज और अन्य बकाया वसूली में देरी की गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
रिलायंस जियो से क्यों नहीं हुई वसूली?
CAG ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि रिलायंस जियो पर सरकार की बड़ी रकम बकाया है, लेकिन अब तक इसकी वसूली नहीं की गई।
स्पेक्ट्रम शुल्क और अन्य देनदारियां: जियो ने स्पेक्ट्रम और लाइसेंस फीस के रूप में बड़ी राशि का भुगतान करना था, लेकिन CAG के अनुसार, सरकार इस वसूली में देरी कर रही है।
अन्य कंपनियों के साथ भेदभाव: BSNL और MTNL को कड़े नियमों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि निजी कंपनियों को छूट मिल रही है।
सरकार पर सवाल और आगे की कार्रवाई
CAG की इस रिपोर्ट के बाद सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
विपक्षी दलों ने BSNL के घाटे और जियो से बकाया वसूली में देरी को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।
टेलीकॉम मंत्रालय ने कहा है कि वह रिपोर्ट की समीक्षा कर उचित कदम उठाएगा।
निष्कर्ष
CAG की रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि BSNL की आर्थिक स्थिति सरकारी नीतियों और प्रबंधन की लापरवाही की वजह से खराब हुई है। वहीं, रिलायंस जियो जैसी कंपनियों से बकाया वसूली न होने की बात भी सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।





