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30 लाख तक के इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी की तैयारी
देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नीति के तहत 30 लाख रुपये तक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर आकर्षक सब्सिडी और विभिन्न शुल्कों में छूट देने का प्रावधान किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण में कमी और राज्य में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।
नई EV नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियां नीति के विभिन्न प्रावधानों पर काम कर रही हैं। माना जा रहा है कि इसे जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
महंगे ई-वाहनों को भी मिलेगा लाभ
नई नीति की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जा रही है कि इसमें केवल दोपहिया और चारपहिया ही नहीं, बल्कि अधिक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को भी प्रोत्साहन देने की योजना है। प्रस्ताव के अनुसार 30 लाख रुपये तक के इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर विशेष रियायतें दी जा सकती हैं।
इससे निजी वाहन मालिकों के अलावा टैक्सी ऑपरेटर, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कारोबारी, संस्थान और व्यावसायिक उपयोगकर्ता भी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
सब्सिडी के साथ टैक्स में भी राहत
सरकार की प्रस्तावित नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों पर प्रत्यक्ष सब्सिडी के अलावा पंजीकरण शुल्क, रोड टैक्स और अन्य शुल्कों में छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे वाहन खरीदने की शुरुआती लागत कम होगी और अधिक लोग ई-वाहन अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
हालांकि अंतिम छूट और सब्सिडी की राशि नीति को औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद ही स्पष्ट होगी।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा फोकस
नई EV नीति में चार्जिंग स्टेशनों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य राज्य के प्रमुख शहरों, पर्यटन स्थलों, राष्ट्रीय राजमार्गों और चारधाम यात्रा मार्गों पर पर्याप्त संख्या में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना है।
इसके लिए निजी निवेश को भी बढ़ावा दिया जाएगा। होटल, मॉल, पेट्रोल पंप, आवासीय परिसरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को भी प्रोत्साहन दिए जाने की संभावना है।
पर्यटन और परिवहन क्षेत्र को मिलेगा लाभ
उत्तराखंड एक प्रमुख पर्यटन राज्य है। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक टैक्सी, ई-बस और अन्य ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने से पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी। इससे ईंधन पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
सार्वजनिक परिवहन में भी इलेक्ट्रिक बसों और अन्य ई-वाहनों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान
राज्य सरकार का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी आने के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय राज्यों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ विकास को भी मजबूती मिलेगी।
उद्योग और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
नई EV नीति के माध्यम से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, बैटरी निर्माण, चार्जिंग उपकरण और संबंधित उद्योगों में निवेश आकर्षित करने की भी योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
सरकार स्टार्टअप और निजी कंपनियों को भी EV इकोसिस्टम से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।
जल्द लागू हो सकती है नीति
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई नीति का मसौदा लगभग तैयार है और संबंधित विभागों से सुझाव लिए जा रहे हैं। मंजूरी मिलने के बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। नई नीति लागू होने के बाद उत्तराखंड इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने वाले राज्यों की सूची में और मजबूत स्थिति में आ सकता है।
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