व्यापार

Business : डॉलर को झटका, रुपए ने किया काउंटरअटैक

Uma Verma
20 March 2025 2:00 PM IST
Business : डॉलर को झटका, रुपए ने किया काउंटरअटैक
x

व्यापार | भारत के मुद्रा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पिछले कुछ दिनों में मजबूती दिखा रहा है। पिछले पांच कारोबारी दिनों में रुपये ने डॉलर के मुकाबले करीब 1 रुपया (1.11%) तक की रिकवरी दर्ज की है। यह एक महत्वपूर्ण संकेत है, खासकर उन निवेशकों और अर्थशास्त्रियों के लिए जो रुपये की स्थिरता और डॉलर के मुकाबले उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता को लेकर चिंतित थे।

रुपये की हालिया रिकवरी का कारण

कभी 10 फरवरी को रुपया डॉलर के सामने अपने जीवनकाल के सबसे निचले स्तर यानी 87.94 पर था, जो कि चिंता का विषय बन गया था। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती, बढ़ते आयात लागत और विदेशी निवेश में कमी जैसे कारणों के चलते आई थी। लेकिन अब, पिछले 40 दिनों में, रुपये में करीब 2% की तेजी देखी जा रही है। इस तेजी को विभिन्न कारणों से जोड़ा जा सकता है।

  1. वैश्विक स्थिति का असर
    वर्तमान में वैश्विक स्तर पर डॉलर में कमजोरी देखने को मिली है, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण। जब अमेरिकी फेड रिजर्व ब्याज दरों को स्थिर रखने या घटाने का निर्णय करता है, तो इससे डॉलर की मांग में कमी आती है। इसका असर भारतीय रुपया समेत अन्य देशों की मुद्राओं पर भी पड़ता है, जिससे उनके मुकाबले डॉलर कमजोर हो जाता है।

  2. भारत की आर्थिक स्थिति
    भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ महीनों में बेहतर संकेत दिए हैं। बढ़ती जीडीपी, मजबूत निर्यात आंकड़े और बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार ने रुपये को मजबूती दी है। इन सकारात्मक संकेतों के चलते विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जिससे रुपया मजबूत हुआ है।

  3. कम होती ऊर्जा कीमतें
    हालांकि, वैश्विक ऊर्जा कीमतें हाल के महीनों में बढ़ी थीं, लेकिन अब इनकी बढ़त धीमी पड़ गई है। इससे भारत के आयात बिल पर असर कम हुआ है, क्योंकि भारत एक बड़ा ऊर्जा आयातक देश है। इसका सीधा असर रुपया पर पड़ा है, क्योंकि कम आयात खर्च से विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हुआ है।

रुपया डॉलर मुकाबले के अलावा अन्य मुद्राओं के खिलाफ भी मजबूत

रुपया केवल डॉलर के मुकाबले ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले भी मजबूत हुआ है। यूरो, ब्रिटिश पाउंड, और जापानी येन जैसे प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले भी रुपये में तेजी आई है। इससे भारतीय व्यापारियों और निर्यातकों को फायदा हो सकता है, क्योंकि उनके उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ेगी।

क्या इस तेजी को बनाए रखना संभव है?

हालांकि, रुपये में यह तेजी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थायी नहीं हो सकती। रुपया अभी भी वैश्विक बाजार की अस्थिरताओं, जैसे कि तेल कीमतों की बढ़ोतरी, वैश्विक आर्थिक मंदी और भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के कारण जोखिम में हो सकता है।

इसके अलावा, अगर अमेरिका और यूरोप में मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है, तो फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपये में कमजोरी आ सकती है।


Next Story