
वायापर | भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का सिलसिला मार्च में भी जारी है। जनवरी और फरवरी में भारी मात्रा में शेयर बेचने के बाद, मार्च के पहले दो हफ्तों में ही एफपीआई ने 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर दी है। कुल मिलाकर, 2025 में अब तक विदेशी निवेशकों ने 1.42 लाख करोड़ रुपये के शेयर बाजार से बाहर निकाल लिए हैं।
बाजार में गिरावट की वजह क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि कई वैश्विक और घरेलू कारक इस बिकवाली के पीछे जिम्मेदार हैं:
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां:
ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे ग्लोबल निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश कर रहे हैं। -
डॉलर की मजबूती और रुपये में गिरावट:
विदेशी निवेशक रुपये की कमजोरी को देखते हुए भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इससे रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है। -
चीन और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव:
वैश्विक बाजारों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण उभरते बाजारों से पूंजी निकासी बढ़ रही है। -
भारतीय कंपनियों के वैल्यूएशन पर चिंता:
कई एफपीआई का मानना है कि भारतीय बाजार में कंपनियों के स्टॉक्स महंगे हो गए हैं, जिससे वे मुनाफा बुक कर रहे हैं।
क्या निवेशकों के लिए चिंता की बात है?
हालांकि एफपीआई की बिकवाली बाजार के लिए नकारात्मक संकेत देती है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इसे बैलेंस करने की कोशिश की है। म्यूचुअल फंड्स और रिटेल निवेशकों की खरीदारी से बाजार में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन मजबूत रहता है और घरेलू निवेश बढ़ता है, तो बाजार इस दबाव से उबर सकता है। निवेशकों को अल्पकालिक गिरावट से घबराने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।
आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए?
- लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज करना चाहिए।
- मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश पर ध्यान देना फायदेमंद हो सकता है।
- विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना जरूरी है।
अगर आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती का संकेत देता है और घरेलू अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहती है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है।





