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नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर की प्रमुख कंपनी पेटीएम (Paytm) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर करीब 226 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि परिचालन राजस्व में सालाना आधार पर 28.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 2,648 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, बेहतर नतीजों के बावजूद मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को शुरुआती कारोबार में पेटीएम के शेयर में गिरावट देखने को मिली। शेयर करीब 1.3 प्रतिशत टूटकर 1,633 रुपये के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर, Bernstein, Jefferies, Citi और Goldman Sachs जैसे प्रमुख ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक राय बरकरार रखी है। प्रस्तावित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (UPI MDR) से कंपनी की आमदनी में अतिरिक्त वृद्धि की उम्मीद भी जताई जा रही है।
पेटीएम का मुनाफा 21 करोड़ से बढ़कर 226 करोड़ रुपये
पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने सोमवार, 26 अक्टूबर को सितंबर 2026 में समाप्त तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित किए।कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान तिमाही के लगभग 21 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़कर करीब 226 करोड़ रुपये हो गया।इस तरह सालाना आधार पर मुनाफे में दस गुना से अधिक वृद्धि दर्ज हुई। हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़ोतरी सीमित रही। जून तिमाही में कंपनी ने लगभग 220 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।वहीं, कंपनी का परिचालन राजस्व बढ़कर 2,648 करोड़ रुपये पहुंच गया। पेटीएम ने लगातार छठी तिमाही में रिपोर्टेड आधार पर मुनाफा दर्ज किया है।
कंपनी के EBITDA में 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी
पेटीएम के वित्तीय नतीजों में परिचालन लाभ का प्रदर्शन भी मजबूत रहा।कंपनी का EBITDA यानी ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले का लाभ सालाना आधार पर लगभग 90 प्रतिशत बढ़कर 270 करोड़ रुपये पहुंच गया।कंपनी के अनुसार, EBITDA मार्जिन पहली बार दोहरे अंक में पहुंचकर करीब 10 प्रतिशत हो गया।यह सुधार परिचालन खर्चों पर नियंत्रण, कारोबार के विस्तार और भुगतान सेवाओं से बेहतर कमाई के कारण हुआ।पेटीएम का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों के इस्तेमाल से भी लागत प्रबंधन में मदद मिल रही है।
अच्छे नतीजों के बाद भी क्यों गिरा पेटीएम का शेयर?
मंगलवार को शेयर बाजार में पेटीएम के शेयर ने शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट दर्ज की।सुबह के कारोबार में शेयर लगभग 1.3 प्रतिशत गिरकर 1,633 रुपये पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को नतीजों की घोषणा से पहले शेयर में करीब 2.4 प्रतिशत की तेजी आई थीविश्लेषकों के अनुसार, मजबूत नतीजों के बाद भी मुनाफावसूली, पहले से बढ़े हुए शेयर मूल्य और बाजार की कमजोर धारणा जैसी परिस्थितियां शेयर की कीमत को प्रभावित कर सकती हैं।हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र में शेयर की गिरावट के पीछे निश्चित कारण बताना मुश्किल होता है।साल 2026 में पेटीएम के शेयर ने उस समय तक करीब 26 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी।
Bernstein ने दिया 2,200 रुपये का टारगेट
विदेशी ब्रोकरेज फर्म Bernstein ने पेटीएम के शेयर पर अपनी 'Outperform' रेटिंग बरकरार रखी है।ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 2,200 रुपये का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है।यह सोमवार के बंद भाव के मुकाबले करीब 33 प्रतिशत की संभावित बढ़त का संकेत देता है।Bernstein ने वित्तीय सेवाओं से बढ़ती आमदनी, भुगतान कारोबार के बेहतर मार्जिन और कंपनी की परिचालन क्षमता में सुधार को सकारात्मक पहलू बताया है।हालांकि, यह ब्रोकरेज का अनुमान है, भविष्य में शेयर के इस स्तर तक पहुंचने की गारंटी नहीं।
Jefferies, Citi और Goldman Sachs की क्या है राय?
Jefferies ने पेटीएम पर अपनी 'Buy' रेटिंग बनाए रखते हुए 2,150 रुपये का लक्ष्य दिया है।ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के कारोबार में वृद्धि और परिचालन दक्षता में सुधार आगे भी कमाई को समर्थन दे सकते हैं।वहीं, Citi ने शेयर का टारगेट प्राइस 1,560 रुपये से बढ़ाकर 1,940 रुपये कर दिया है।Goldman Sachs ने अपनी 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी, लेकिन टारगेट प्राइस 2,070 रुपये से घटाकर 2,010 रुपये कर दिया।इससे स्पष्ट है कि ब्रोकरेज कंपनियां पेटीएम की संभावनाओं को सकारात्मक नजरिए से देख रही हैं, लेकिन मूल्यांकन और भविष्य की कमाई को लेकर उनके अनुमानों में अंतर है।
UPI MDR से कैसे बढ़ सकती है पेटीएम की कमाई?
पेटीएम के भविष्य के कारोबार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय प्रस्तावित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR है।MDR वह शुल्क होता है, जो कुछ डिजिटल भुगतान व्यवस्थाओं में व्यापारी के भुगतान स्वीकार करने पर लगाया जाता है।प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर पात्र यूपीआई मर्चेंट ट्रांजेक्शन से पेटीएम जैसी भुगतान सेवा कंपनियों को अतिरिक्त आमदनी मिल सकती है।पेटीएम का अनुमान है कि इससे उसका कुल पेमेंट प्रोसेसिंग मार्जिन लगभग 2.5 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है।कंपनी के अनुसार, इस बदलाव का प्रभाव स्थिर होने में दो से तीन तिमाहियां लग सकती हैं।Goldman Sachs का अनुमान है कि प्रस्तावित MDR व्यवस्था से पेटीएम के EBITDA में 40 प्रतिशत तक अतिरिक्त वृद्धि की संभावना बन सकती है।हालांकि, वास्तविक फायदा अंतिम नियमों, लागू होने की तारीख और लेनदेन की मात्रा पर निर्भर करेगा।
वित्तीय सेवाओं से कमाई में 49 प्रतिशत की वृद्धि
पेटीएम के वित्तीय सेवा वितरण कारोबार ने भी सितंबर तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया।इस कारोबार से कंपनी की आय सालाना आधार पर 49 प्रतिशत बढ़कर 912 करोड़ रुपये पहुंच गई।इस बढ़ोतरी में मर्चेंट लोन वितरण, पर्सनल लोन, पेटीएम पोस्टपेड और निवेश संबंधी सेवाओं का योगदान रहा।
कंपनी के अनुसार, उसके सब्सक्रिप्शन प्लान से जुड़े व्यापारियों की संख्या बढ़कर 1.64 करोड़ हो गई है।इसके अलावा मासिक लेनदेन करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 8.5 करोड़ पहुंच गई।पेटीएम के पास सितंबर 2026 के अंत में लगभग 13,617 करोड़ रुपये का नकद शेष भी था।
निवेशकों को किन जोखिमों का ध्यान रखना चाहिए?
पेटीएम के मजबूत वित्तीय नतीजों के बावजूद शेयर बाजार में निवेश जोखिम से मुक्त नहीं है।कंपनी की भविष्य की कमाई पर यूपीआई से जुड़े नियामकीय फैसलों, डिजिटल भुगतान क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और वित्तीय सेवाओं के कारोबार का प्रभाव पड़ सकता है।इसके अलावा शेयर की मौजूदा वैल्यूएशन भी महत्वपूर्ण है। यदि भविष्य की कमाई बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं बढ़ती, तो शेयर की कीमत प्रभावित हो सकती है।इसलिए निवेशकों को केवल ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस या एक तिमाही के नतीजों के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए।
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