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अंग्रेजों के जमाने का निवेश फिर सुर्खियों में करोड़ों का दावा

Ratna Netam
11 Aug 2026 7:45 PM IST
अंग्रेजों के जमाने का निवेश फिर सुर्खियों में करोड़ों का दावा
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मध्य प्रदेश : सीहोर से सामने आई एक पुरानी निवेश कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा है। करीब 109 साल पहले 35 हजार रुपये की रकम एक लोन के रूप में लगाई गई थी। उस समय इस रकम पर सालाना 5.5 प्रतिशत ब्याज तय किया गया था। अब दावा किया जा रहा है कि इतने लंबे समय तक ब्याज की गणना करने पर इस रकम की वैल्यू करीब 1.20 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। खास बात यह है कि इस पुराने लेनदेन से जुड़े दस्तावेज आज भी परिवार के पास सुरक्षित बताए जा रहे हैं। मामले में ब्रिटेन के डेट मैनेजमेंट ऑफिस की ओर से परिवार से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सीहोर के रहने वाले सेठ जुम्मा लाल रूथिया की फर्म 'सेठ राम कृष्ण जसकरन रूथिया' ने वर्ष 1917 में अंग्रेजी शासन के दौर में 35 हजार रुपये की रकम इंडियन वार लोन में लगाई थी। परिवार के पास इस निवेश से जुड़ा 4 जून 1917 का दस्तावेज मौजूद बताया जा रहा है। उस दस्तावेज पर उस समय भोपाल में तैनात पॉलिटिकल एजेंट डब्ल्यूएस डेविस के हस्ताक्षर होने की जानकारी सामने आई है।
बताया जाता है कि उस समय इस रकम पर 5.5 प्रतिशत सालाना ब्याज तय किया गया था। अगर बिना किसी भुगतान को घटाए और चक्रवृद्धि ब्याज की गणना के आधार पर रकम को आगे बढ़ाया जाए तो 109 वर्षों में इसकी वैल्यू करीब 1.20 करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है। हालांकि, यह रकम वास्तव में परिवार को मिलेगी या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके लिए पुराने दस्तावेजों, इंडियन वार लोन की शर्तों और उस समय हुए भुगतान की पूरी जानकारी की जांच जरूरी होगी।
परिवार का दावा है कि इस निवेश के बदले उन्हें अब तक ब्रिटेन की सरकार की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया है। इसी बीच टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन के डेट मैनेजमेंट ऑफिस ने रूथिया परिवार से संपर्क किया है और पुराने कागजात उपलब्ध कराने को कहा है। इससे इस मामले को लेकर परिवार की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन अंतिम तौर पर किसी भुगतान का फैसला संबंधित दस्तावेजों और कानूनी स्थिति की जांच के बाद ही हो सकेगा।
इस मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि 1917 में लगाई गई रकम को आज किस तरह से देखा जाएगा। दरअसल, परिवार की ओर से जिस निवेश का दावा किया जा रहा है, वह सीधे ब्रिटिश सरकार को दिया गया सामान्य लोन नहीं बल्कि उस समय के इंडियन वार लोन से जुड़ा निवेश था। इसलिए पुराने नियमों और दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाना होगा कि उस बॉन्ड या लोन की शर्तें क्या थीं, उसकी परिपक्वता अवधि कितनी थी और क्या इसके तहत पहले कभी किसी प्रकार का भुगतान किया गया था।
इस पुराने निवेश की तुलना अगर उस समय सोने की खरीद से की जाए तो तस्वीर और भी दिलचस्प नजर आती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1917 में सोने की कीमत करीब 15 से 17 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास थी। ऐसे में 35 हजार रुपये में लगभग 21.875 किलोग्राम सोना खरीदा जा सकता था। आज सोने की कीमत करीब 1.40 लाख से 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास मानें तो इतनी मात्रा के सोने की कीमत करीब 28 से 33 करोड़ रुपये तक हो सकती है। यानी लंबे समय में अलग-अलग निवेश विकल्पों के रिटर्न में कितना बड़ा अंतर हो सकता है, यह उदाहरण उसे भी दिखाता है।
इस पूरे मामले की सबसे खास बात 109 साल पुराना दस्तावेज है। परिवार के पास मौजूद यह कागज उस दौर के आर्थिक लेनदेन का रिकॉर्ड माना जा रहा है। सेठ जुम्मा लाल रूथिया का निधन वर्ष 1937 में हो गया था, लेकिन उनके समय में किया गया यह निवेश और उससे जुड़ा दस्तावेज अब फिर चर्चा में आ गया है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि परिवार को 1.20 करोड़ रुपये या इससे अधिक की रकम वास्तव में मिलेगी। इसके लिए पुराने रिकॉर्ड, भुगतान का इतिहास, बॉन्ड की मूल शर्तें और मौजूदा कानूनी नियमों की जांच जरूरी होगी। हालांकि, 109 साल पुराने निवेश दस्तावेज के सामने आने और ब्रिटेन के संबंधित विभाग द्वारा परिवार से संपर्क किए जाने की खबर ने इस मामले को खास जरूर बना दिया है। यह कहानी यह भी बताती है कि पुराने वित्तीय दस्तावेज कई दशक बाद भी किसी परिवार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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