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सोना चांदी निवेशकों को झटका ETF में गिरावट से बदला बाजार का रुख

Ratna Netam
31 Aug 2026 5:29 PM IST
सोना चांदी निवेशकों को झटका ETF में गिरावट से बदला बाजार का रुख
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बिजनेस : सोने और चांदी में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सोमवार का कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव भरा रहा। **Gold ETF और Silver ETF में भारी बिकवाली देखने को मिली**, जिसके चलते कई फंडों के भाव में 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता, मजबूत डॉलर और निवेशकों की मुनाफावसूली ने सोने-चांदी की चमक फीकी कर दी है।
सोने और चांदी को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन जब वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक अपना पैसा अन्य विकल्पों में लगाने लगते हैं। इसी वजह से सोमवार को बुलियन मार्केट और उससे जुड़े ETF पर दबाव देखने को मिला।
Gold और Silver ETF में क्यों आई गिरावट
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बढ़ी चिंता बताई जा रही है। अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से डॉलर मजबूत हुआ है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
सोना और चांदी ऐसे एसेट हैं जिनसे निवेशकों को कोई नियमित ब्याज नहीं मिलता। जब बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश आकर्षक लगने लगते हैं तो कीमती धातुओं की मांग कमजोर हो जाती है।
इसके अलावा हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की है। लगातार बढ़ते भाव के बाद कई बड़े निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी कम की, जिससे ETF में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव
वैश्विक बाजार में भी सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली है। अमेरिकी फेड की सख्त नीति के संकेतों के बाद डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती आई, जिससे सोने पर दबाव बढ़ा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई देता है। चूंकि Gold ETF और Silver ETF की कीमतें वैश्विक बुलियन कीमतों से जुड़ी होती हैं, इसलिए विदेशों में आई कमजोरी का असर घरेलू निवेशकों पर भी पड़ता है।
Silver ETF में ज्यादा उतार-चढ़ाव
सोने की तुलना में चांदी में ज्यादा तेजी और ज्यादा गिरावट देखने को मिलती है। इसकी वजह यह है कि चांदी केवल निवेश की धातु नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई अन्य उद्योगों में चांदी की मांग रहती है। ऐसे में आर्थिक विकास की रफ्तार और वैश्विक मांग में बदलाव का असर चांदी की कीमतों पर तेजी से पड़ता है।
यही कारण है कि Silver ETF में गिरावट कई बार Gold ETF की तुलना में ज्यादा तेज होती है।
क्या निवेशकों को घबराने की जरूरत है?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी अवधि में सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमती धातुओं का महत्व अभी भी बना हुआ है।
सोने को महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षा देने वाला निवेश माना जाता है। वहीं चांदी को निवेश के साथ-साथ औद्योगिक मांग से भी समर्थन मिलता है।
हालांकि निवेशकों को केवल गिरावट देखकर तुरंत खरीदारी या बिक्री का फैसला नहीं लेना चाहिए। निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी।
अगर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख जारी रहता है तो सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर फिर से सोने की मांग बढ़ सकती है।
ETF निवेशकों के लिए क्या संकेत
Gold और Silver ETF में आई गिरावट यह बताती है कि कमोडिटी मार्केट में भी तेज उतार-चढ़ाव संभव है। ETF में निवेश करने वाले लोगों को बाजार की चाल को समझकर रणनीति बनानी चाहिए।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट कई बार अवसर भी बन सकती है, लेकिन जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी है।
कुल मिलाकर, Gold और Silver ETF में आई गिरावट फिलहाल वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली का असर है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा ही तय करेगी कि सोना और चांदी फिर तेजी पकड़ते हैं या दबाव में रहते हैं।
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