
बिज़नेस: वैश्विक बाजारों में निवेशकों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक भारतीय बाजारों से पैसा निकालने वाले विदेशी निवेशकों का रुख अब धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है। Elara Capital की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजारों में विदेशी फंड प्रवाह में स्थिरता के शुरुआती संकेत मिले हैं। मार्च के बाद पहली बार भारत केंद्रित फंडों में मजबूत साप्ताहिक निवेश दर्ज किया गया है, जिससे बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले समय में विदेशी निवेशकों की भागीदारी फिर बढ़ सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस सप्ताह करीब 184 मिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आकर्षित किया है। यह मार्च के बाद सबसे मजबूत साप्ताहिक निवेश प्रवाह माना जा रहा है। इससे पहले फरवरी से लगातार भारतीय बाजारों से विदेशी फंड की निकासी जारी थी। इस दौरान भारत केंद्रित फंडों से लगभग 8.6 अरब डॉलर की भारी निकासी हुई थी। अब रिडेम्पशन यानी निवेश निकालने की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है, जो भारतीय बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
विदेशी निवेशकों के बदलते रुख के पीछे वैश्विक बाजारों में हो रहे बदलाव को बड़ी वजह माना जा रहा है। अमेरिका के इक्विटी फंडों से इस सप्ताह निवेशकों ने करीब 6 अरब डॉलर की निकासी की है। पिछले कुछ समय से अमेरिकी बाजारों में ऊंचे वैल्यूएशन और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक अब नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इसी का फायदा भारत जैसे उभरते बाजारों को मिलता दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब गिरावट वाले बाजारों में खरीदारी की रणनीति अपना रहे हैं। इसे "बाय द डिप" रणनीति कहा जाता है। भारत के अलावा ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे उभरते बाजारों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। ताइवान के घरेलू फंडों में रिकॉर्ड 4.8 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है, जो वहां के बाजार में मजबूत भरोसे को दिखाता है।
दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े निवेश में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। मई 2025 से शुरू हुए AI ट्रेड के बाद पहली बार वैश्विक इंडस्ट्रियल फंड्स में कमजोरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्रियल सेक्टर ने चार सप्ताह के रोलिंग फ्लो में पहली बार नकारात्मक प्रदर्शन किया है। हालांकि टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश जारी है, लेकिन निवेशक अब केवल उन्हीं कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिन्हें सीधे तौर पर AI तकनीक से फायदा मिलने की संभावना है।
कंजम्पशन यानी उपभोग क्षेत्र के फंडों में भी स्थिति सुधरती नजर आ रही है। पिछले कुछ समय से इन सेक्टरों में बिकवाली का दबाव था क्योंकि निवेशक AI आधारित कंपनियों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे थे। अब उपभोग क्षेत्र में निकासी की रफ्तार कम हुई है और निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे वापस लौट रहा है।
कमोडिटी बाजार में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी है। गोल्ड फंड्स में अप्रैल के मध्य के बाद सबसे बड़ा साप्ताहिक निवेश देखा गया है। वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई की चिंता और सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश के कारण सोने में निवेश बढ़ रहा है। वहीं, सिल्वर फंड्स में भी स्थिरता के संकेत मिले हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, घरेलू मांग और बेहतर विकास संभावनाएं विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। हालांकि, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका की नीतियों का असर आगे भी देखने को मिल सकता है।
फिलहाल आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजारों में फिर मजबूत हो रहा है। अमेरिका से निकल रही पूंजी का कुछ हिस्सा भारत और अन्य उभरते बाजारों की ओर बढ़ रहा है। साथ ही सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में भी निवेश बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह रुझान कितना स्थायी रहता है और भारतीय बाजारों को इसका कितना फायदा मिलता है।





