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कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, EPFO वेज लिमिट बढ़ाने पर सरकार कर रही विचार

Ratna Netam
3 Aug 2026 3:54 PM IST
कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, EPFO वेज लिमिट बढ़ाने पर सरकार कर रही विचार
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नई दिल्ली : देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकार ईपीएफओ के तहत अनिवार्य पीएफ और पेंशन योगदान की मौजूदा वेतन सीमा (Wage Ceiling) में बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, बेसिक सैलरी सीमा को मौजूदा ₹15,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह किया जा सकता है।

अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो यह सितंबर 2014 के बाद ईपीएफओ नियमों में सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा। इस बदलाव से ₹15,000 से अधिक बेसिक वेतन पाने वाले लाखों कर्मचारियों को भी कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का रास्ता साफ हो सकता है।

मौजूदा नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (Basic + DA) मिलाकर ₹15,000 तक है, उनके लिए ईपीएफओ में योगदान अनिवार्य होता है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से पीएफ खाते में योगदान किया जाता है। वहीं, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के लिए भी इसी सीमा के आधार पर योगदान तय होता है।

इस वेज सीलिंग में आखिरी बार 1 सितंबर 2014 को बदलाव किया गया था। उस समय सरकार ने वेतन सीमा को ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया था। अब करीब एक दशक बाद इसमें फिर संशोधन की जरूरत महसूस की जा रही है।

सरकार के सामने यह प्रस्ताव इसलिए आया है क्योंकि पिछले 10 वर्षों में महंगाई और कर्मचारियों की औसत आय में काफी बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान समय में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जिनका बेसिक वेतन ₹15,000 से अधिक है, लेकिन वे अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे से बाहर हो जाते हैं। इसी अंतर को खत्म करने के लिए वेतन सीमा बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है।

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो इसका सीधा असर कर्मचारियों की पीएफ बचत और रिटायरमेंट पेंशन पर देखने को मिल सकता है। अनुमान के मुताबिक, नियोक्ता की ओर से कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाने वाला योगदान ₹1,250 प्रति माह से बढ़कर करीब ₹2,083 प्रति माह हो सकता है। इससे कर्मचारियों की पेंशन योग्य सैलरी बेस बढ़ेगी और भविष्य में मिलने वाली मासिक पेंशन में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

जानकारों के अनुसार, पेंशन राशि में 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक लाभ कर्मचारी की सेवा अवधि, वेतन और अन्य नियमों पर निर्भर करेगा।

इसके अलावा पीएफ खाते में भी अधिक राशि जमा होगी। ज्यादा योगदान के कारण कर्मचारियों को लंबे समय में चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) का फायदा मिलेगा। इससे रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों के पास पहले की तुलना में बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

हालांकि, इस बदलाव का असर कर्मचारियों की तत्काल इन-हैंड सैलरी पर भी पड़ सकता है। अगर अनिवार्य पीएफ योगदान बढ़ता है तो कर्मचारियों की मासिक कटौती ₹1,800 से बढ़कर करीब ₹3,000 तक हो सकती है। इसका मतलब है कि हाथ में मिलने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यह राशि कर्मचारी की अपनी भविष्य की बचत में ही जमा होगी।

वहीं, कंपनियों पर भी इस बदलाव का आर्थिक असर पड़ सकता है। नियोक्ताओं को कर्मचारियों के लिए ज्यादा योगदान करना होगा, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसी वजह से सरकार श्रम मंत्रालय, ईपीएफओ बोर्ड और अन्य हितधारकों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, नए लेबर कोड्स के क्रियान्वयन और कंपनियों पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव को ध्यान में रखते हुए सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। अभी तक सरकार की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।

अगर श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंजूरी मिलती है तो नए नियमों को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर लागू किया जा सकता है। ऐसे में देशभर के लाखों कर्मचारियों की नजर सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। यह बदलाव लागू होने पर कर्मचारियों के रिटायरमेंट प्लान और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।B

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