
नई दिल्ली: भारत के कॉफी उद्योग के लिए साल 2026 की शुरुआत बेहद सकारात्मक रही है। देश के कॉफी निर्यात में इस साल के पहले छह महीनों में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जनवरी से जून 2026 के बीच भारत ने 2,55,587 टन कॉफी का निर्यात किया, जो पिछले साल की इसी अवधि में हुए 2,04,265 टन निर्यात की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक है।
कॉफी निर्यात में इस तेज वृद्धि का मुख्य कारण घरेलू कॉफी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग बताई जा रही है। खासतौर पर रोबस्टा कॉफी की मांग में लगातार इजाफा हुआ है। पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ नए देशों से भी भारतीय कॉफी की मांग बढ़ी है।
निर्यात मूल्य में भी हुई बढ़ोतरी
कॉफी निर्यात की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ इसकी कीमत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच भारत के कॉफी निर्यातकों ने करीब 1.3 अरब डॉलर की कमाई की, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 13 प्रतिशत अधिक है।
अगर रुपये में देखा जाए तो 2026 की पहली छमाही में कॉफी निर्यात का मूल्य बढ़कर करीब 12,143 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, 2025 की पहली छमाही में यह आंकड़ा करीब 9,920 करोड़ रुपये था।
रोबस्टा कॉफी की बढ़ी मांग
कॉफी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश राजा के अनुसार, भारतीय रोबस्टा कॉफी की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खरीदारों के अलावा नए बाजारों में भी भारतीय कॉफी के लिए रुचि बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पश्चिम एशिया में तनाव और शिपमेंट से जुड़ी परेशानियों के बावजूद निर्यातकों ने अपने पुराने ग्राहकों के साथ कारोबार बनाए रखा।
पश्चिम एशिया में चुनौतियों के बावजूद बढ़ा निर्यात
रमेश राजा ने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति और परिवहन संबंधी दिक्कतों के बावजूद भारतीय कॉफी निर्यातकों ने सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन जैसे बाजारों में अपनी पकड़ बनाए रखी।
उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे बाजार जहां भारतीय कॉफी की पहुंच पहले कमजोर हुई थी, वहां भी दोबारा अवसर मिले हैं। खासकर जॉर्डन जैसे बाजारों में भारतीय निर्यातकों ने अपनी मौजूदगी फिर से मजबूत की है।
केप ऑफ गुड होप मार्ग से भेजे गए कंसाइनमेंट
पश्चिम एशिया में शिपिंग चुनौतियों के कारण निर्यातकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। रमेश राजा के अनुसार, कुछ कंसाइनमेंट को केप ऑफ गुड होप मार्ग के जरिए मिस्र और अन्य बाजारों तक पहुंचाया गया।
उन्होंने कहा कि इन देशों में भारतीय रोबस्टा कॉफी की अच्छी मांग रही है, जिसके कारण निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भारतीय कॉफी की वैश्विक पहचान मजबूत
भारत दुनिया के प्रमुख कॉफी उत्पादक देशों में शामिल है। देश में मुख्य रूप से कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कॉफी का उत्पादन होता है। भारतीय कॉफी अपनी गुणवत्ता और विशेष स्वाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान रखती है।
हाल के वर्षों में भारतीय कॉफी उत्पादकों और निर्यातकों ने नए बाजारों की तलाश पर जोर दिया है। इसके अलावा बेहतर गुणवत्ता, प्रसंस्करण तकनीक और वैश्विक मांग के अनुसार उत्पादन ने भी निर्यात बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
किसानों और उद्योग को फायदा मिलने की उम्मीद
कॉफी निर्यात में बढ़ोतरी का सीधा फायदा कॉफी उत्पादक किसानों और उद्योग से जुड़े लोगों को मिलने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत और मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर आय मिलने की संभावना है।
कॉफी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक बाजार में भारतीय कॉफी की मांग इसी तरह बनी रहती है, तो आने वाले समय में निर्यात और बढ़ सकता है।
आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद
कॉफी निर्यातकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में भी भारतीय कॉफी की मांग मजबूत बनी रहेगी। खासकर रोबस्टा कॉफी के लिए एशिया, पश्चिम एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छे अवसर दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि, वैश्विक स्तर पर परिवहन लागत, मौसम की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। इसके बावजूद भारतीय कॉफी उद्योग ने 2026 की पहली छमाही में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
कॉफी निर्यात में 25 प्रतिशत की यह वृद्धि भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए भी सकारात्मक संकेत है और यह दिखाती है कि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत जगह बना रहे हैं।





