
Business बिजनेस : देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हैं। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने ऐसी मांग रखी है, जिसने लाखों सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
ऑल एम्प्लॉइज जॉइंट एसोसिएशन, जम्मू-कश्मीर और ऑल सिख माइनॉरिटी एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने 8वें वेतन आयोग से फिटमेंट फैक्टर 2.86 से 3.68 के बीच तय करने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे सरकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और पेंशन पर असर पड़ेगा और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन संरचना और पेंशन को 7वें वेतन आयोग के आधार पर तय किया गया है। 8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि नई सिफारिशें उनकी मौजूदा समस्याओं और महंगाई को ध्यान में रखकर तैयार की जाएंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन में भी सुधार होगा। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और सरकारी सेवा में स्थायित्व को भी बल मिलेगा। कर्मचारी संगठनों की यह मांग इस समय बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वेतन आयोग की सिफारिशें अगले साल लागू होने की संभावना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग इस समय वेतन और पेंशन सुधार के कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। कर्मचारियों की मांगों को ध्यान में रखते हुए आयोग जल्द ही अपनी प्रारंभिक सिफारिशें तैयार कर सकता है। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
संक्षेप में, जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों की मांग 8वें वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर 3.68 तक बढ़ाने की रही है। यदि आयोग इस पर सकारात्मक निर्णय लेता है, तो देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को वित्तीय लाभ मिलेगा और उनकी आशाएं पूरी होंगी।
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