
Business बिजनेस : जून 2026 का महीना सोने के निवेशकों के लिए बेहद कमजोर साबित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतें तेज गिरावट के साथ 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे आ गई हैं। पूरे महीने में सोने में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिसे पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यह अक्टूबर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। उस समय भी वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में तेज गिरावट आई थी।सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति ने सोने की मांग पर दबाव डाला है। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक संकेतों में सुधार की उम्मीदों ने भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश से हटाकर अन्य एसेट क्लास की ओर आकर्षित किया है।
इस तेज गिरावट के बाद निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने में गिरावट का यह दौर आगे भी जारी रहेगा या फिर यहां से कीमतों में तेजी से वापसी देखने को मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार की दिशा वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, ब्याज दरों की नीति और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।कुछ विश्लेषक मानते हैं कि इतनी बड़ी गिरावट के बाद सोने में तकनीकी स्तरों पर रिकवरी संभव है, जबकि कुछ का कहना है कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर रहती है तो सोने पर दबाव बना रह सकता है।कुल मिलाकर, जून 2026 का महीना सोने के लिए ऐतिहासिक रूप से कमजोर साबित हुआ है और इसने निवेशकों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है।





