
Business बिजनेस: Apple ने अपनी 2025 एनवायर्नमेंटल प्रोग्रेस रिपोर्ट जारी करते हुए पर्यावरण संरक्षण और क्लीन टेक्नोलॉजी की दिशा में कई अहम उपलब्धियों का दावा किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी 2030 तक पूरी तरह कार्बन न्यूट्रल बनने के अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रही है और इस दिशा में उत्पादन, पैकेजिंग और सप्लाई चेन में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में भेजे गए सभी Apple प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले मटीरियल का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रीसायकल किए गए कंटेंट से बनाया गया, जो कंपनी के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है। यह कदम इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट को कम करने और संसाधनों के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, कंपनी ने अपने सभी डिज़ाइन किए गए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड में 100 प्रतिशत रीसायकल गोल्ड प्लेटिंग और टिन सोल्डरिंग के उपयोग का लक्ष्य भी हासिल कर लिया है। यह बदलाव इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में दुर्लभ धातुओं के खनन पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब Apple के सभी प्रोडक्ट्स 100 प्रतिशत फाइबर-बेस्ड पैकेजिंग में भेजे जा रहे हैं। इससे प्लास्टिक के उपयोग में भारी कमी आई है और पैकेजिंग को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया गया है।
Apple Inc
की ओर से जारी इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कंपनी 2030 तक अपनी पूरी सप्लाई चेन और प्रोडक्ट लाइफसाइकिल को नेट-जीरो कार्बन एमिशन तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए ऊर्जा स्रोतों में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाया जा रहा है और मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के साथ भी ग्रीन प्रैक्टिस लागू की जा रही हैं।
इसी के साथ कंपनी ने भारत में अपनी ग्रीन पहलों के तहत 100 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। इस निवेश का उद्देश्य रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स, सप्लाई चेन में ग्रीन टेक्नोलॉजी और स्थानीय पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों को समर्थन देना बताया गया है।
कंपनी का कहना है कि भारत जैसे बड़े बाजार में टिकाऊ विकास मॉडल को मजबूत करना उसकी वैश्विक पर्यावरण रणनीति का अहम हिस्सा है। इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, Apple की यह रिपोर्ट दिखाती है कि कंपनी उत्पाद डिजाइन से लेकर पैकेजिंग और निवेश रणनीति तक पर्यावरण को केंद्र में रखकर काम कर रही है और आने वाले वर्षों में अपने कार्बन फुटप्रिंट को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।





