
बिज़नेस: भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने शनिवार को एक नया इतिहास रच दिया। हैदराबाद की स्पेस स्टार्टअप कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने देश का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां अपने दम पर ऑर्बिटल लॉन्च मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे रही हैं।
विक्रम-1 ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 12:05 बजे उड़ान भरी। हालांकि लॉन्चिंग के लिए इसरो का लॉन्च पैड इस्तेमाल किया गया, लेकिन रॉकेट के डिजाइन, निर्माण और मिशन संचालन की पूरी जिम्मेदारी स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम ने संभाली। पहली ही टेस्ट फ्लाइट में कंपनी ने सफलता हासिल कर भारतीय स्पेस सेक्टर में नई उम्मीद जगाई है।
इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि विक्रम-1 करीब 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक पहुंचने में सफल रहा। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की कुछ ही निजी कंपनियां अपनी शुरुआती कोशिशों में इस तरह का ऑर्बिटल मिशन पूरा कर पाई हैं। इसे एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स जैसी बड़ी अंतरिक्ष कंपनियों की राह पर भारत की एक बड़ी छलांग माना जा रहा है।
विक्रम-1 की सफलता के पीछे दो दोस्तों की आठ साल लंबी मेहनत है। स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2018 में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने मिलकर की थी। दोनों ने नौकरी छोड़कर निजी क्षेत्र में रॉकेट बनाने का सपना देखा और धीरे-धीरे इसे हकीकत में बदल दिया।
कंपनी के को-फाउंडर और सीओओ नागा भरत डाका ने इस सफलता को पूरी टीम की वर्षों की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में टीम ने लगातार चुनौतियों का सामना करते हुए इस ऐतिहासिक मुकाम को हासिल किया है। वहीं पवन कुमार चंदना ने कहा कि यह पहली टेस्ट फ्लाइट है, जिससे भविष्य के मिशनों के लिए रॉकेट के प्रदर्शन से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा मिलेगा।
स्काईरूट एयरोस्पेस इससे पहले वर्ष 2022 में विक्रम-S नाम का सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कर चुकी है, जिसने करीब 89.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरी थी। लेकिन विक्रम-1 मिशन ने कंपनी को एक अलग स्तर पर पहुंचा दिया है।
नागा भरत डाका एयरोस्पेस क्षेत्र के अनुभवी वैज्ञानिक हैं। उन्होंने शुरुआती शिक्षा में शानदार प्रदर्शन किया और इंजीनियरिंग के बाद वर्ष 2012 में इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने इसरो में एवियोनिक्स इंजीनियर के तौर पर काम किया। बाद में निजी क्षेत्र में अनुभव लेने के बाद वर्ष 2018 में उन्होंने पवन चंदना के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस की शुरुआत की।
स्काईरूट को भारत की पहली एयरोस्पेस यूनिकॉर्न कंपनी बनने का गौरव भी मिल चुका है। कंपनी का वैल्यूएशन करीब 1.1 बिलियन डॉलर यानी लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। कंपनी को ग्रीनको ग्रुप, सोलर इंडस्ट्रीज, मुकेश बंसल, नीरज अरोड़ा और अन्य बड़े निवेशकों से समर्थन मिला है।
विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग भारत के निजी स्पेस उद्योग के लिए नई संभावनाओं का रास्ता खोल सकती है। आने वाले समय में निजी कंपनियां छोटे उपग्रहों की लॉन्चिंग, अंतरिक्ष सेवाओं और वैश्विक बाजार में भारत की भागीदारी को और मजबूत कर सकती हैं। यह मिशन साबित करता है कि भारतीय युवा वैज्ञानिक और स्टार्टअप दुनिया की बड़ी अंतरिक्ष कंपनियों के साथ कदम मिलाकर चलने की क्षमता रखते हैं।





