
व्यापार | भारतीय शेयर बाजार में एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग (Algo Trading) से जुड़ी नई गाइडलाइंस 1 मई 2024 से प्रभावी होंगी। इन नियमों को सेबी (SEBI) ने निवेशकों के हितों की सुरक्षा और ट्रेडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू किया है।
एल्गो ट्रेडिंग में ऑटोमेटेड सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के तेजी से सौदे करता है। लेकिन, कुछ ब्रोकर और फिनटेक प्लेटफॉर्म अनधिकृत एल्गो स्ट्रैटजीज़ का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे बाजार में जोखिम और हेरफेर की संभावनाएं बढ़ रही थीं।
नए नियमों के तहत सभी एल्गो ट्रेडिंग मॉडल को एक्सचेंज से अप्रूवल लेना अनिवार्य होगा, और ब्रोकरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके क्लाइंट अनुमोदित एल्गोरिदम का ही उपयोग करें। साथ ही, हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) पर भी सख्ती बढ़ाई जाएगी, जिससे बाजार में कृत्रिम उतार-चढ़ाव रोका जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों से छोटे निवेशकों को फायदा होगा, क्योंकि बड़े प्लेयर्स द्वारा बाजार में मैनिपुलेशन की संभावनाएं कम होंगी। वहीं, Algo Trading का इस्तेमाल करने वाले संस्थागत निवेशकों और ब्रोकरेज फर्मों को अपने सिस्टम को नए नियमों के अनुरूप अपडेट करना होगा।
अब देखना होगा कि 1 मई के बाद एल्गो ट्रेडिंग से शेयर बाजार में किस तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं और क्या इससे निवेशकों को वास्तविक लाभ होगा।





