
बिज़नेस: वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में भारत के लिए बड़े अवसरों की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जिस तरह चीन के एक युवा AI वैज्ञानिक ने अमेरिका में शानदार करियर छोड़कर अपने देश लौटकर बड़ी कंपनी खड़ी की, उसी तरह अमेरिका में काम कर रहे भारतीय टेक प्रोफेशनल भी आने वाले समय में भारत लौटकर AI क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अनिल अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में चीन की AI कंपनी Moonshot AI के संस्थापक यांग झिलिन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यांग के पास अमेरिका में काम करने के कई बड़े अवसर थे, लेकिन उन्होंने अपने देश लौटकर स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया। आज उनकी कंपनी का AI मॉडल Kimi K3 दुनिया के चर्चित AI मॉडल्स में शामिल हो गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यांग झिलिन की कंपनी Moonshot AI की वैल्यू करीब 30 बिलियन डॉलर यानी लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस सफलता ने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है कि कैसे विदेशों में प्रशिक्षित और अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञ अपने देशों में लौटकर नई टेक्नोलॉजी कंपनियां खड़ी कर सकते हैं।
यांग झिलिन का तकनीकी सफर भी काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी से साल 2019 में पीएचडी पूरी की थी। खास बात यह है कि उन्होंने यह डिग्री सामान्य अवधि से करीब दो साल कम समय में पूरी की। इसके बाद उन्हें एपल जैसी बड़ी टेक कंपनी में काम करने का मौका मिला। वह गूगल और मेटा में इंटर्नशिप भी कर चुके थे। इसके अलावा स्टैनफोर्ड और एमआईटी जैसे संस्थानों में रिसर्च के विकल्प भी उनके सामने थे।
इसके बावजूद यांग ने अमेरिका में रुकने के बजाय चीन लौटने का फैसला किया और अपनी AI कंपनी की शुरुआत की। उनके इस फैसले को शुरुआत में जोखिम भरा माना गया था, लेकिन अब उनकी सफलता इसे दूरदर्शी कदम साबित कर रही है। उनकी कंपनी का AI मॉडल Kimi K3 अब OpenAI और Anthropic जैसे दिग्गज AI मॉडल्स को टक्कर देने की कोशिश कर रहा है।
अनिल अग्रवाल ने इसी उदाहरण के जरिए भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल काम कर रहे हैं। आने वाले समय में इनमें से कई लोग भारत लौटकर यहां अत्याधुनिक AI तकनीक विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा, युवा आबादी और तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम मौजूद है। अगर भारतीय विशेषज्ञ अपने ज्ञान और अनुभव के साथ देश में AI कंपनियां खड़ी करते हैं तो यह भारत को तकनीकी रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
AI के क्षेत्र में दुनियाभर में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका में OpenAI, Google और Anthropic जैसी कंपनियां आगे हैं, वहीं चीन भी AI रिसर्च और स्टार्टअप में तेजी से निवेश कर रहा है। ऐसे समय में भारत के लिए यह जरूरी माना जा रहा है कि वह अपने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए।
अनिल अग्रवाल का मानना है कि भारतीय प्रतिभा में दुनिया के बड़े AI प्लेटफॉर्म बनाने की क्षमता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में कई भारतीय विशेषज्ञ विदेशों से लौटकर देश में नई टेक्नोलॉजी कंपनियां शुरू करेंगे और भारत को AI क्षेत्र में वैश्विक ताकत बनाने में योगदान देंगे।





