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Chennai चेन्नई: वैश्विक आर्थिक और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। Asian Development Bank के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 (FY27) में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत पर मजबूत बनी रह सकती है, जबकि वित्त वर्ष 2028 (FY28) में यह बढ़कर 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारक काम करेंगे। इनमें प्रमुख रूप से देश में जारी आर्थिक सुधार, यूरोपीय संघ के साथ संभावित व्यापार समझौते का प्रभाव और सरकारी वेतन में अपेक्षित वृद्धि शामिल हैं। इन कारणों से उपभोग और निवेश दोनों को समर्थन मिलने की संभावना जताई गई है।
Asian Development Bank का मानना है कि भारत की घरेलू मांग मजबूत बनी रहेगी, जो आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके अलावा, सरकार द्वारा किए जा रहे ढांचागत सुधार और नीतिगत कदम भी ग्रोथ को सहारा देंगे।
हालांकि, रिपोर्ट में महंगाई को लेकर भी संकेत दिए गए हैं। अनुमान के मुताबिक, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में पहले आई गिरावट के बाद अब सुधार देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर तेल की ऊंची कीमतें, मुद्रा की कमजोरी और कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं।
इन कारकों के चलते FY26 में जहां महंगाई दर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान था, वहीं FY27 में यह बढ़कर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि महंगाई दर में दोगुने से अधिक वृद्धि हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं और बाजार दोनों पर असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत स्थिर माना जा रहा है, क्योंकि देश में आंतरिक मांग और नीतिगत समर्थन मजबूत है।
यूरोपीय संघ के साथ संभावित व्यापार समझौते को भी इस वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण बताया गया है। इससे निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं और भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाएं मिल सकती हैं।
Asian Development Bank ने यह भी संकेत दिया है कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संभावित बढ़ोतरी से उपभोग में वृद्धि हो सकती है, जो आर्थिक गतिविधियों को और गति देगी। इससे बाजार में मांग बढ़ेगी और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपनी गति बनाए रखने में सक्षम है। हालांकि, महंगाई और बाहरी कारकों पर नजर रखना जरूरी होगा, ताकि आर्थिक संतुलन बना रहे।
फिलहाल, Asian Development Bank का यह अनुमान भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जो दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में भी देश की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रह सकती है।
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