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अडानी का यूरोप में बड़ा धमाका, ₹27,200 करोड़ में खरीदेंगे विदेशी कंपनी

Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 10:47 PM IST
अडानी का यूरोप में बड़ा धमाका, ₹27,200 करोड़ में खरीदेंगे विदेशी कंपनी
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बिज़नेस : भारत के प्रमुख कारोबारी समूहों में शामिल अडानी ग्रुप अब यूरोप में अपने कारोबार का बड़े पैमाने पर विस्तार करने जा रहा है। समूह की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने नीदरलैंड की प्रमुख लिक्विड स्टोरेज कंपनी Evos B.V. में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। इस सौदे का एंटरप्राइज वैल्यू 2.56 अरब यूरो यानी करीब 27,200 करोड़ रुपये बताया गया है। इस अधिग्रहण के जरिए अडानी पोर्ट्स को यूरोप के पांच देशों में मौजूद आठ महत्वपूर्ण लिक्विड स्टोरेज टर्मिनलों तक पहुंच मिलेगी। कंपनी ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को इस समझौते की आधिकारिक घोषणा की।
अडानी पोर्ट्स की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कंपनी Evos को Igneo Infrastructure Partners से खरीदेगी। यह पूरी तरह नकद भुगतान वाला प्रस्तावित सौदा है। हालांकि, अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसे संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।Evos यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज ऑपरेटर कंपनी है। इसका मुख्यालय नीदरलैंड में स्थित है। कंपनी के पास नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा में कुल आठ पोर्ट आधारित टर्मिनल हैं। इन टर्मिनलों की कुल भंडारण क्षमता लगभग 63 लाख घनमीटर है।
अडानी पोर्ट्स के लिए यह अधिग्रहण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभी कंपनी भारत के प्रमुख बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री लॉजिस्टिक्स कारोबार में मजबूत मौजूदगी रखती है। Evos की खरीद के बाद यूरोप के महत्वपूर्ण ऊर्जा और औद्योगिक केंद्रों में भी उसका कारोबार बढ़ेगा।Evos के टर्मिनल यूरोप के प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प क्षेत्र, हैम्बर्ग और भूमध्यसागरीय क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। ये स्थान अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
लिक्विड स्टोरेज कारोबार में पेट्रोलियम उत्पादों, रसायनों और अन्य तरल पदार्थों के सुरक्षित भंडारण तथा परिवहन से जुड़ी सेवाएं शामिल होती हैं। बंदरगाहों के पास स्थित ऐसे टर्मिनल वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।अडानी पोर्ट्स का मानना है कि Evos के अधिग्रहण से उसका लिक्विड कार्गो कारोबार मजबूत होगा। इसके साथ ही कंपनी को भविष्य में जैव ईंधन और टिकाऊ विमानन ईंधन जैसे नए ऊर्जा उत्पादों से जुड़े कारोबार में अवसर मिल सकते हैं।
कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, Evos ने कैलेंडर वर्ष 2025 में लगभग 3.7 करोड़ मीट्रिक टन कार्गो का संचालन किया था। इसी वर्ष कंपनी का राजस्व 39.2 करोड़ यूरो और EBITDA करीब 21.9 करोड़ यूरो रहा।EBITDA किसी कंपनी की परिचालन आय का आकलन करने वाला महत्वपूर्ण वित्तीय संकेतक है। Evos का EBITDA मार्जिन लगभग 56 प्रतिशत बताया गया है। इससे कंपनी के परिचालन कारोबार की लाभप्रदता का संकेत मिलता है।
अडानी पोर्ट्स के अनुसार, Evos के कारोबार में अनुबंध आधारित आय की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी के कई व्यावसायिक समझौते ऐसे हैं, जिनमें ग्राहकों को निर्धारित क्षमता के लिए भुगतान करना होता है। इसके अतिरिक्त कुछ अनुबंध महंगाई सूचकांक से भी जुड़े हुए हैं।इस तरह के समझौते भविष्य की आय में अपेक्षाकृत स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन वैश्विक मांग, परिचालन परिस्थितियों और अन्य कारोबारी जोखिमों पर भी निर्भर करेगा।
इस सौदे में Evos की इक्विटी वैल्यू करीब 1.18 अरब यूरो आंकी गई है। वहीं, एंटरप्राइज वैल्यू 2.56 अरब यूरो है। दोनों आंकड़ों में अंतर इसलिए है, क्योंकि एंटरप्राइज वैल्यू में कंपनी के कर्ज और अन्य वित्तीय समायोजन का प्रभाव शामिल होता है।अडानी पोर्ट्स ने बताया है कि इस अधिग्रहण के लिए वित्तपोषण कर्ज के माध्यम से किया जाएगा। कंपनी के अनुसार, प्रस्तावित सौदे के बाद संयुक्त कारोबार का प्रो-फॉर्मा नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात लगभग 2.76 गुना रहेगा। वित्त वर्ष 2027 तक इसके करीब 2.5 गुना रहने की उम्मीद जताई गई है।
हालांकि, किसी भी बड़े अधिग्रहण में वित्तीय जोखिम भी होते हैं। विशेष रूप से कर्ज के जरिए सौदा पूरा करने की स्थिति में ब्याज लागत, नकदी प्रवाह और भविष्य की आय का प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है।अडानी पोर्ट्स के प्रबंध निदेशक करण अडानी ने इस समझौते को कंपनी के वैश्विक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनके अनुसार, Evos का अधिग्रहण कंपनी को एकीकृत वैश्विक परिवहन प्लेटफॉर्म बनाने के लक्ष्य के करीब ले जाएगा।
अडानी पोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2031 तक एक अरब टन कार्गो संचालन का लक्ष्य रखा है। कंपनी वर्तमान में लगभग 67.1 करोड़ टन सालाना कार्गो हैंडलिंग क्षमता होने की जानकारी देती है।इस अधिग्रहण के बाद अडानी पोर्ट्स की वैश्विक मौजूदगी 10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनलों तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे कंपनी का भौगोलिक विस्तार बढ़ेगा और विभिन्न क्षेत्रों से राजस्व प्राप्त करने के अवसर भी मजबूत हो सकते हैं।
अडानी समूह पहले से बंदरगाह, हवाई अड्डे, ऊर्जा, सीमेंट, लॉजिस्टिक्स और मीडिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करता है। हालांकि, Evos का प्रस्तावित अधिग्रहण मुख्य रूप से अडानी पोर्ट्स के लिक्विड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स व्यवसाय का विस्तार है।इस सौदे को अडानी समूह के ऊर्जा क्षेत्र में पहली एंट्री नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि समूह पहले से ऊर्जा उत्पादन और अन्य संबंधित व्यवसायों में सक्रिय है। Evos के जरिए मुख्य रूप से यूरोप के ऊर्जा भंडारण बुनियादी ढांचे में उसकी मौजूदगी बढ़ेगी।
यूरोप में ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव के बीच लिक्विड स्टोरेज सुविधाओं का महत्व बना हुआ है। पारंपरिक ईंधनों के साथ नए ऊर्जा उत्पादों के लिए भी भंडारण और परिवहन सुविधाओं की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से बंदरगाह आधारित स्टोरेज टर्मिनल लंबे समय के लिए महत्वपूर्ण कारोबारी परिसंपत्तियां हो सकती हैं।अडानी पोर्ट्स के इस फैसले से स्पष्ट है कि कंपनी अब केवल भारतीय बंदरगाहों तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा भंडारण नेटवर्क में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
फिलहाल Evos के साथ अधिग्रहण समझौता हो चुका है, लेकिन अंतिम रूप से सौदा पूरा होना नियामकीय मंजूरियों और अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही कंपनी का नियंत्रण अडानी पोर्ट्स के पास आएगा।करीब 27,200 करोड़ रुपये का यह प्रस्तावित सौदा अडानी पोर्ट्स के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे यूरोप के पांच देशों में कंपनी की मौजूदगी बढ़ने के साथ वैश्विक ऊर्जा भंडारण और परिवहन कारोबार में उसकी स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
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