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अदाणी ग्रुप का बड़ा ऐलान, विदेश में अदाणी का बड़ा निवेश प्लान
Rajeshwari Nishad
22 Oct 2026 4:59 PM IST

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नई दिल्ली। देश के दिग्गज उद्योगपति गौतम अदाणी की कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने अंतरराष्ट्रीय कारोबार के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने खाड़ी देश ओमान में नई सहायक कंपनी स्थापित की है। इस नई इकाई का नाम 'इंडियन ओशन गेटवे टर्मिनल' रखा गया है। कंपनी का गठन 21 अक्टूबर 2026 को किया गया। अदाणी समूह के इस कदम को वैश्विक बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स कारोबार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। नई कंपनी के जरिए समूह ओमान में स्थानीय स्तर पर कारोबारी अवसरों की तलाश कर सकेगा और समुद्री परिवहन क्षेत्र में विस्तार की संभावनाओं पर काम करेगा।
ओमान में बनाई नई कंपनी
अदाणी पोर्ट्स ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी इंटरनेशनल पोर्ट्स होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने ओमान में नई कंपनी का गठन किया है।
इंडियन ओशन गेटवे टर्मिनल नाम की यह कंपनी अदाणी पोर्ट्स की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी होगी। इसका मतलब है कि नई कंपनी का स्वामित्व अदाणी पोर्ट्स के पास सीधे न होकर उसकी दूसरी सहायक कंपनी के माध्यम से रहेगा।
इस व्यवस्था के तहत अदाणी इंटरनेशनल पोर्ट्स होल्डिंग्स नई इकाई की 100 प्रतिशत हिस्सेदार होगी।कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह कदम उसके अंतरराष्ट्रीय कारोबार को मजबूत करने और वैश्विक परिवहन सेवाओं के विस्तार की योजना के अनुरूप है।
पांच लाख ओमानी रियाल की शेयर पूंजी
नियामकीय जानकारी के अनुसार, ओमान में स्थापित नई कंपनी की कुल शेयर पूंजी पांच लाख ओमानी रियाल निर्धारित की गई है।नई इकाई की पूंजी को 100 शेयरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक शेयर का अंकित मूल्य 5,000 ओमानी रियाल रखा गया है।इन सभी शेयरों का स्वामित्व अदाणी इंटरनेशनल पोर्ट्स होल्डिंग्स के पास रहेगा।
हालांकि, यह शेयर पूंजी नई कंपनी की अधिकृत कारोबारी संरचना से जुड़ी है। इसे किसी बंदरगाह के अधिग्रहण या बड़े निर्माण प्रोजेक्ट में किए गए निवेश के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।कंपनी ने अभी ओमान में किसी विशेष बंदरगाह के अधिग्रहण, परिचालन अनुबंध या नए टर्मिनल निर्माण की घोषणा नहीं की है।
ग्लोबल लॉजिस्टिक्स कारोबार में विस्तार की तैयारी
अदाणी पोर्ट्स भारत की प्रमुख बंदरगाह संचालन और एकीकृत परिवहन सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों में शामिल है।कंपनी बंदरगाहों के संचालन के अलावा कार्गो प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और समुद्री परिवहन से जुड़ी गतिविधियों में काम करती है।पिछले कुछ वर्षों में समूह ने भारतीय बंदरगाह कारोबार के साथ विदेशी बाजारों में भी विस्तार पर ध्यान दिया है।
ओमान में नई कंपनी स्थापित करना इसी रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है।इसके माध्यम से समूह भविष्य में बंदरगाह संचालन, कार्गो हैंडलिंग और संबंधित समुद्री सेवाओं में उपलब्ध अवसरों का मूल्यांकन कर सकता है।
ओमान क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
ओमान की भौगोलिक स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।यह देश अरब सागर और हिंद महासागर के प्रमुख व्यापारिक मार्गों के निकट स्थित है। इसके बंदरगाह एशिया, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ओमान के सोहार, सलालाह और दुक्म जैसे बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं।ओमान सरकार भी अपने बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।इसलिए अदाणी पोर्ट्स के लिए ओमान भविष्य में समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क के विस्तार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
दुक्म पोर्ट को लेकर पहले भी हुई थी चर्चा
अदाणी समूह और ओमान के बीच बंदरगाह विकास को लेकर पहले भी बातचीत हो चुकी है।मार्च 2024 में ओमान के एक अधिकारी ने कहा था कि देश दुक्म बंदरगाह के विकास में अदाणी समूह के निवेश को लेकर सकारात्मक है।
उस समय अधिकारियों ने बताया था कि दोनों पक्षों के बीच संभावित निवेश और विकास को लेकर चर्चा हुई थी।हालांकि, उस दौरान कोई अंतिम परियोजना घोषित नहीं की गई थी।अब ओमान में नई कंपनी के गठन से अदाणी समूह की स्थानीय कारोबारी मौजूदगी बढ़ी है। लेकिन इसे दुक्म बंदरगाह के अधिग्रहण की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत से लेकर विदेशों तक फैला अदाणी का कारोबार
अदाणी पोर्ट्स गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह सहित भारत के कई प्रमुख बंदरगाहों में परिचालन करती है।इसके अलावा कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी निवेश और कारोबारी साझेदारियां विकसित की हैं।श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर कंपनी की मौजूदगी उसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार का एक उदाहरण है।
सितंबर 2026 में अदाणी पोर्ट्स ने बताया था कि कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल की क्षमता बढ़ाकर 32 लाख टीईयू कर दी गई है।टीईयू कंटेनर परिवहन में इस्तेमाल होने वाली मानक मापन इकाई है।इसके अतिरिक्त कंपनी ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कारोबार कर रही है।
विजिंजम पोर्ट को लेकर भी बड़ी साझेदारी
अदाणी पोर्ट्स ने जून 2026 में वैश्विक शिपिंग कंपनी एमएससी समूह के साथ केरल के विजिंजम बंदरगाह को लेकर महत्वपूर्ण समझौता किया था।इस समझौते के तहत एमएससी समूह की टर्मिनल निवेश इकाई ने विजिंजम पोर्ट परियोजना में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए लगभग 1.397 अरब डॉलर निवेश करने पर सहमति जताई थी।
इस सौदे का कुल मूल्यांकन लगभग 2.85 अरब डॉलर बताया गया था।
दोनों कंपनियों का उद्देश्य बंदरगाह की कार्गो क्षमता बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी नेटवर्क से उसका संपर्क मजबूत करना है।इस तरह की साझेदारियों से अदाणी समूह अपने बंदरगाह कारोबार में वैश्विक कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
भारत-ओमान व्यापार संबंधों को मिल सकता है लाभ
भारत और ओमान के बीच लंबे समय से व्यापारिक और आर्थिक संबंध रहे हैं।दोनों देशों के बीच ऊर्जा, उद्योग, समुद्री परिवहन और विभिन्न वस्तुओं के आयात-निर्यात से जुड़ा कारोबार होता है।
ओमान ने भी भारतीय कंपनियों को अपने बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया है।भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के जून 2026 से प्रभावी होने के बाद दोनों देशों के बीच नए व्यापारिक अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।ऐसे माहौल में अदाणी पोर्ट्स की स्थानीय मौजूदगी से भविष्य में बंदरगाह सेवाओं और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं।
आगे क्या है अदाणी पोर्ट्स की योजना?
अदाणी पोर्ट्स का उद्देश्य खुद को वैश्विक स्तर पर एक बड़े एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर के रूप में स्थापित करना है।इसके लिए कंपनी विभिन्न देशों में बंदरगाह संचालन, परिवहन सेवाओं और संबंधित कारोबारी अवसरों पर ध्यान दे रही है।ओमान में स्थापित नई इकाई भविष्य में स्थानीय परियोजनाओं के लिए कारोबारी आधार उपलब्ध करा सकती है।हालांकि, किसी नए बंदरगाह के अधिग्रहण, परिचालन अधिकार या निर्माण परियोजना के लिए अलग समझौतों और आवश्यक मंजूरियों की जरूरत होगी।
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