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अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स: 'कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग में जाने की कोई योजना नहीं'

Deepa Sahu
7 Jan 2021 7:37 PM IST
अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स: कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग में जाने की कोई योजना नहीं
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अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के खिलाफ चल रहे दुष्प्रचार पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखते हुए

जनता से रिश्ता वेबडेस्क: अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के खिलाफ चल रहे दुष्प्रचार पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखते हुए उपाध्यक्ष पुनीत मेहंदीरत्ता ने कहा कि, यह आरोप लगाया जा रहा है कि हमें इस बात की पहले से ही जानकारी थी कि सरकार कृषि बिल लाने वाली है। इसलिए आपने पंजाब के मोगा जिले में पहले से ही 'सायलो' का निर्माण कर लिया था, जिसमें अनाज का अत्याधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से भंडारण किया जाता है।

हमने पिछले दिनों में बार-बार जनता के सामने सच्चाई रखी है कि अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स किसानों से कोई अनाज नहीं खरीदती है। भारत जैसे विकासशील देशों में स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। जहां एक तरफ हमारे देश में गरीबी और भुखमरी की समस्या है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक भंडारण सुविधाएं न होने के कारण बहुत सारा अनाज खराब हो जाता है और खाने योग्य नहीं रहता।
2007 से एफसीआई को सेवाएं प्रदान कर रही है कंपनी
अनाज को खराब होने से बचाने के लिए एवं अनाज की पूरी पोषण मात्रा सार्वजनिक वितरण सिस्टम के तहत वितरित किए जाने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से वर्ष 2005 में देश के विभिन्न राज्यों में अनाज साइलोज, रेलवे साइडिंग और बल्क ट्रेन के निर्माण हेतु ग्लोबल टेंडर के लिए निजी कंपनियों से आवेदन मंगाए थे, जिसमें अडाणी के अलावा देश और दुनिया की विभिन्न बड़ी-बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था। क्योंकि अडाणी ने सबसे कम दाम क्वोट किए, इसलिए उसे प्रोजेक्ट लगाने का अवसर मिला जिससे वर्ष 2005 में अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स का जन्म हुआ। कंपनी 2007 से कार्यरत है और एफसीआई को सेवाएं प्रदान कर रही है।
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करने का कोई इरादा नहीं
इसलिए यह कहना बिलकुल गलत है कि अडाणी ने सायलोस का निर्माण फार्म बिल्स आने के बाद किया है। उन्होंने कहा कि अडाणी ग्रुप भविष्य में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) करने का कोई इरादा नहीं रखती है और न ही इसके लिए जमीन का अधिग्रहण भी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह भी गलत आरोप लगाया जा रहा है कि अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए पंजाब और हरियाणा में जमीन का अधिग्रहण कर रही है। कंपनी का पंजाब, हरियाणा अथवा किसी अन्य राज्य में कांट्रैक्ट फार्मिंग करने का कोई इरादा नहीं है। अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स मात्र अनाज के भंडारण एवं परिवहन का काम करती है, किसानों से अनाज खरीदने का काम FCI करती है।
भारत में कम से कम एक दर्जन ऐसी कंपनियां हैं जो अनाज के भंडारण या परिवहन का काम करती हैं। अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स उन एक दर्जन कंपनियों में से एक है। दूसरी बात, हमारा काम सिर्फ और सिर्फ आधुनिक और विश्वस्तरीय भंडारण एवं परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और उसे चलाना है। इस काम के लिए हमें तयशुदा फीस मिलती है। और उस फीस को कंपीटिटिव टेंडरिंग के तहत फिक्स किया गया है। तीसरी बात, अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स जैसी कम से कम एक दर्जन और कंपनियां इस देश में हैं। चौथी बात, अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के द्वारा बनाया गया
नाम खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाना गलत
इंफ्रास्ट्रक्चर देश की धरोहर है जिसका मुख्य उद्देश्य मेहनतकश किसानों के द्वारा उगाए हुए अनाज को सुरक्षित तरीके से सरकार की PDS व्यवस्था के अंतर्गत लोगों तक पहुंचाना है। इस विषय पर जारी दुष्प्रचार पर उन्होने कहा कि एक मुहावरा है- अगर किसी का काम खराब न कर सको तो उसका नाम खराब कर दो। अगर हमारे काम में कोई कमी है तो जरूर हमें सूली पर चढ़ा दें, लेकिन सिर्फ नाम खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाना सही नहीं है। मैं साल 2007 से अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के साथ हूँ। जिस तरह से अडाणी का नाम खराब करने की कोशिश की जा रही है उससे मन में बहुत पीड़ा है। जैसा कि मैंने पहले बताया है कि अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स देश का पहला इंटेग्रेटेड स्टोरेज एंड ट्रांसपोर्टेशन प्रोजेक्ट है जिसके लिए टेंडरिंग की प्रक्रिया सरकार ने 2005 में पूर्ण की थी, जिसके तहत कंपनी ने विभिन्न राज्यों में सात जगहों पर ग्रेन सायलोस और रेलवे साइडिंग्ल का निर्माण किया था।
15 वर्षों से कंपनी कर रही है फूडग्रैन स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण
प्रोजेक्ट का दूसरा बड़ा हिस्सा था रेलवे साइडिंग का निर्माण न सिर्फ मोगा और कैथल में बल्कि चेन्नई, कोयंबटूर, बंगलूरू, नवी मुंबई और हूगली में भी। इन पांच जगहों पर अनाज का ट्रांसपोर्टेशन करने की जिम्मेदारी भी हमारी थी। और इसके लिए हमने बल्क ट्रेन भी अधिग्रहित की। हमने प्रोजेक्ट लगाने के लिए विश्वस्तरीय अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने एक बार कहा था- अमेरिका के रोड इसलिए अच्छे नहीं है कि अमरीका धनी है इसलिए अमेरिका धनी है कि यहा रोड अच्छे हैं। देश के विकास के लिए अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है और अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स फूडग्रैन स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण पिछले 15 वर्षों से कर रही है और आगे भी करती रहेगी।
जहां तक धरना प्रदर्शन की बात है मोगा सायलो में FCI किसानों से 2008 से अनाज खरीद रही है और जो भी किसान इस व्यवस्था से जुड़े है वे इससे बहुत खुश है और हर साल अपना अनाज FCI को बेचने के लिए मोगा सायलो में ही आते है। जितने भी प्रदर्शनकारी मोगा सायलो के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे है उसमें से ज्यादातर बाहर के लोग है और स्थानीय इलाके से नहीं है। 2007 में जब हमने देश के पहले इंटेग्रटेड सायलो प्रोजेक्ट का निर्माण किया तो इसकी अपार सफलता को देखते हुए FCI ने अन्य राज्यों में ऐसे बहुत सारे प्रोजेक्ट लॉन्च किए। कुछ प्रोजेक्ट्स हमने बिड्स में जीते, बाकी प्रोजेक्ट्स दूसरी कंपनियों के पास हैं। एक झूठी खबर जिसमे कि अडाणी हरियाणा में रेल्वे ट्रैक्स का निर्माण इसलिए कर रहा है क्योंकि वो बड़ी मात्रा में किसानों से अनाज खरीदेगा पर उन्होंने कहा कि लोगों को खुद इसका आंकलन करना चाहिए कि कौन सी न्यूज गलत है और कौन सी सही। मैं आपके सामने तथ्य रख रहा हूं।

सायलोस का निर्माण कहां होगा यह सरकारी एजेंसी तय करती है। एफसीआई ने टेंडर्स फ्लोट किए जिसमें उन्होंने 26 लोकेशंस सायलो के निर्माण के लिए चुनी। अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स ने उस टेंडर में हिस्सा लिया। हमें सिर्फ दो लोकेशंस मिली। बाकी 24 लोकेशंस दूसरी कंपनियों के पास है। जो रेल्वे साइडिंग्स बनाने की बात है वो टेण्डर का यानि कि प्रोजेक्ट का हिस्सा है। रेल्वे साइडिंग्स सायलो को करीबी रेलवे लाइन से जोड़ने का काम करती है जिससे अनाज का उत्पादक राज्यों से पूरे देश में वितरण किया जा सके। सायलोस के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सायलोस कहां बनेंगे ये एफसीआई यानि बिडिंग एजेंसी तय करती है। जमीन कहां होगी और सायलोस बनाने के नियम क्या होंगे ये सब भी सिर्फ एफसीआई ही तय करती है।
सिर्फ प्रोजेक्ट को लागू करना और चलाना है कंपनियों का काम
हमारे जैसी कंपनियों का काम सिर्फ प्रोजेक्ट को लागू करना और चलाना है जिसकी एवज में हमें एक निर्धारित फीस मिलती है। दूसरी बात, सायलोस बनाने के लिए कम जमीन की आवश्यकता रहती है क्योंकि सायलोस में अनाज को वर्टिकली स्टोर किया जाता है। जबकि ट्रेडिशनल गोदामों में अनाज हॉरिजोंटली स्टोर किया जाता है। सायलोस में जमीन का इस्तेमाल कम होता है, इसके अलावा इसमें यांत्रिकी एवं स्वचालित परिचालन के कारण परंपरागत गोदाम की तुलना में शुरू से अंत तक फूडग्रेन सप्लाई चैन का खर्च काफी कम होता है और यह ज्यादा किफायती है। जिसका सीधा फायदा सरकार को ही होता है।
जानबूझकर फैलाई जा रही अफवाह
जानबूझकर यह अफवाह फैलाई जा रही कि अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स ने एक रिपोर्ट में लिखा था कि उन्हें आने वाले समय में कुछ नए और बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स मिलेंगे और इन कॉन्ट्रैक्ट्स के कारण कंपनी के व्यापार में काफी वृद्धि होगी जबकि अनाज भंडारण और परिवहन का फार्म बिल्स से कोई लेना देना नहीं है। देश में अनाज उत्पादन के साथ साथ उसके भंडारण और परिवहन की आवश्यकता भी बढ़ती रहती है। क्योंकि अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में है तो किसी भी कंपनी की तरह हम भी भविष्य के लिए प्लानिंग करते हैं। हर कंपनी आगे बढ़ना चाहती है। दुनिया की कोई भी कंपनी उठा के देख लीजिए वो फ्यूचर प्रोजेक्ट्स के लिए प्लानिंग करती ही है। सायलोस का निर्माण एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में किया जाता है जिसमें बड़ी मात्रा में पूंजी निवेश होता है। कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का निर्माण लंबी अवधि के लिए किया जाता है।
निजी कंपनियां उसमें तभी हिस्सा लेना चाहेगी जब इस प्रकार के प्रोजेक्ट्स को लंबे समय के लिए सिक्योर किया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पहले प्रोजेक्ट कि अवधि एफसीआई के द्वारा 20 वर्ष तय की गई थी, लेकिन और कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एवं प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के लिए सरकार के द्वारा इसे 30 वर्ष किया गया। इसे केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में एक स्टैंडर्ड प्रक्टिस माना जाता है। जहां तक हर साल बढ़ोतरी का सवाल है। आप कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के टेंडर डॉक्युमेंट उठा के देख लीजिए उसमें आपको इस तरह का क्लॉज मिल जाएगा, जो की प्राइस इंडेक्स से लिंक्ड होता है, जिसका उद्देश्य महंगाई की वजह से बढ़ते हुए खर्च को समाहित करना है। यह एस्केलेशन क्लॉज टेंडर डॉक्युमेंट में पहले से सरकार के द्वारा ही शामिल किया जाता है।
क्योंकि ये इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जिसका निर्माण FCI अथवा बिडिंग एजेंसी के लिए किया जाता है, इसलिए सरकार की तरफ से कंपनी के बिड रेट्स के मुताबिक गेरंटेड रेवन्यू का प्रावधान किया जाता है और यह प्रावधान न केवल अडाणी के लिए है बल्कि उन सारी कंपनियों के लिए है जो इस क्षेत्र में कार्यरत है। इस अफवाहों पर कि आपके खिलाफ ये आरोप है कि फार्म बिल्स पास होने के कुछ महीने पहले आपने 53 कंपनियों का गठन किया श्री पुनीत मेहंदीरत्ता ने कहा कि ये आंकड़े गलत है। जब भी कोई सरकारी एजेंसी सायलो बनाने के लिए नया टेंडर फ्लोट करती है तो टेण्डर की शर्त के मुताबिक एक नई स्पेशल पर्पस व्हिकल (SPV) का गठन करना अनिवार्य होता है।

ऐसा आपको दूसरे इंफ्रास्ट्रेक्चर प्रोजेक्ट्स में भी देखने को मिलेगा, इसका उद्देश्य ये होता है कि हर टेंडरिंग एजेंसी अपने प्रोजेक्ट को सुरक्षित रखना चाहती है। वो ये नहीं चाहती कि किसी दूसरी कंपनी का प्रभाव उसके प्रोजेक्ट पर पड़े। कॉर्पोरेट लॉ के अनुसार हर कंपनी अपने आप में स्वतंत्र होती है। नई कंपनी बनाना कानून और बिजनेस की आवश्यकता है। इन अफवाहों पर भी कि भारत सरकार ने आपको सायलोस बनाने के लिए 700 करोड़ दिए है, उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हमें कतई भी 700 करोड़ तो क्या सात करोड़ भी नहीं दिए है। जिस 700 करोड़ की बात की जा रही है वह अडाणी ग्रुप ने 2007 में सात जगहों पर इंटेग्रटेड पायलेट प्रोजेक्ट का निर्माण करने में निवेश किया है जिसके तहत कंपनी ने सायलोस, रेलवे साइडिंग्स, बल्क ट्रेंस स्थापित किए और यह प्रोजेक्ट अपने आप में देश का ऐसा पहला प्रोजेक्ट है।


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