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UPI और RuPay पर MDR खत्म करने से डिजिटल भुगतान को मिला बढ़ावा

Kavita2
8 Aug 2026 11:33 AM IST
UPI और RuPay पर MDR खत्म करने से डिजिटल भुगतान को मिला बढ़ावा
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नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने के लिए केंद्र सरकार ने जनवरी 2020 से RuPay डेबिट कार्ड और BHIM-UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को शून्य कर दिया था। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य व्यापारियों और ग्राहकों के लिए डिजिटल भुगतान को अधिक सुविधाजनक और कम लागत वाला बनाना था। इसके तहत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए जाने वाले भुगतान पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर की ओर से कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकता।

MDR वह शुल्क है, जो सामान्य तौर पर किसी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने वाले व्यापारी से भुगतान प्रक्रिया से जुड़े संस्थानों को देना पड़ता है। यह शुल्क लेनदेन की राशि के प्रतिशत के रूप में लिया जाता है। सरकार ने UPI और RuPay के मामले में इसे खत्म करके डिजिटल भुगतान के विस्तार के लिए एक अलग व्यवस्था तैयार की।

1 जनवरी 2020 से लागू हुआ प्रावधान

केंद्र सरकार ने वित्त अधिनियम के जरिए Payment and Settlement Systems Act, 2007 में धारा 10A जोड़ी थी। इसके तहत बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भुगतान करने वाले व्यक्ति या भुगतान प्राप्त करने वाले लाभार्थी पर कोई शुल्क नहीं लगा सकते।

आयकर विभाग के मुताबिक, इन निर्धारित भुगतान माध्यमों में RuPay डेबिट कार्ड, BHIM-UPI और BHIM-UPI QR Code शामिल हैं। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2020 से लागू हुई।

इसके साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 269SU के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले निर्दिष्ट व्यवसायों के लिए इन भुगतान माध्यमों की सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया था। सरकार ने इसके लिए आयकर नियमों में भी प्रावधान किया था।

क्या होता है MDR?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों को देना पड़ता है। इसमें बैंक, कार्ड नेटवर्क और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अन्य पक्ष शामिल हो सकते हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डेबिट कार्ड लेनदेन पर अलग-अलग कार्ड नेटवर्क में MDR 0.90 प्रतिशत तक हो सकता था, जबकि UPI P2M यानी Person-to-Merchant लेनदेन पर MDR 0.30 प्रतिशत तक लागू हो सकता था। जनवरी 2020 से RuPay डेबिट कार्ड और BHIM-UPI लेनदेन के लिए इसे शून्य कर दिया गया।

सरकार का तर्क था कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं होना चाहिए। इससे छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना आसान हुआ।

व्यापारियों को सीधे फायदा

MDR खत्म होने का सबसे सीधा लाभ व्यापारियों को मिला। सामान्य डिजिटल भुगतान में शुल्क लगने की स्थिति में व्यापारी के खाते में जमा होने वाली राशि लेनदेन की कुल रकम से कुछ कम हो सकती है। लेकिन UPI और RuPay के लिए शून्य MDR व्यवस्था में ऐसा शुल्क नहीं लिया जाता।

इससे छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले, स्थानीय कारोबारी और अन्य व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित हुए। QR कोड के जरिए भुगतान लेना भी आसान हुआ।

सरकार का मानना रहा है कि डिजिटल भुगतान की लागत कम होने से देश में कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

लागत की भरपाई के लिए सरकार की प्रोत्साहन योजना

MDR खत्म किए जाने के बाद भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े बैंकों और अन्य पक्षों की लागत की भरपाई के लिए सरकार ने प्रोत्साहन योजनाएं भी शुरू कीं।

केंद्र सरकार ने RuPay डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले BHIM-UPI P2M लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी। इसके तहत सरकार की ओर से अधिग्रहण करने वाले बैंक यानी Merchant Bank को प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जिसे आगे भुगतान व्यवस्था से जुड़े अन्य हितधारकों के बीच साझा किया जाता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में इस व्यवस्था के तहत कुल 1,389 करोड़ रुपये, 2022-23 में 2,210 करोड़ रुपये और 2023-24 में 3,631 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इनमें RuPay और BHIM-UPI दोनों से जुड़े भुगतान शामिल थे।

छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने पर जोर

सरकार की प्रोत्साहन व्यवस्था में खास तौर पर कम मूल्य वाले UPI लेनदेन को बढ़ावा देने पर जोर रहा है। छोटे व्यापारियों और ग्राहकों के बीच होने वाले रोजमर्रा के भुगतान डिजिटल माध्यम से कराने के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी गई।

सरकारी जानकारी के अनुसार छोटे व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर प्रोत्साहन व्यवस्था लागू की गई थी। इससे भुगतान व्यवस्था से जुड़े संस्थानों को डिजिटल लेनदेन बढ़ाने के लिए आर्थिक समर्थन मिलता है।

50 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वालों के लिए नियम

डिजिटल भुगतान को व्यापक बनाने के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले व्यवसायों के लिए निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम उपलब्ध कराने का प्रावधान किया था।

आयकर नियमों के तहत ऐसे व्यवसायों को RuPay डेबिट कार्ड, BHIM-UPI और BHIM-UPI QR Code के जरिए भुगतान स्वीकार करने की सुविधा देनी थी। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बड़े कारोबारियों के यहां ग्राहकों को डिजिटल भुगतान का विकल्प आसानी से उपलब्ध हो।

नियमों का पालन नहीं करने पर आयकर अधिनियम की धारा 271DB के तहत प्रतिदिन 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता था। हालांकि, शुरुआत में कारोबारियों को भुगतान सुविधाएं स्थापित और चालू करने के लिए समय दिया गया था।

UPI भुगतान पर GST को लेकर भी स्थिति स्पष्ट

डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्क को लेकर समय-समय पर भ्रम की स्थिति भी सामने आती रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल UPI लेनदेन पर कोई MDR नहीं लिया जा रहा है। इसलिए MDR पर लगने वाला GST भी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होता।

अप्रैल 2025 में वित्त मंत्रालय ने उन दावों को गलत बताया था जिनमें कहा गया था कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर GST लगाने की तैयारी की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया था कि UPI लेनदेन पर कोई MDR नहीं लिया जा रहा और इसलिए उस आधार पर GST भी नहीं लगता।

डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिली गति

सरकार की ओर से MDR हटाने और डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहन देने का उद्देश्य देश में डिजिटल लेनदेन को बढ़ाना रहा है। इससे ग्राहकों को भुगतान के लिए अधिक विकल्प मिले और कारोबारियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान स्वीकार करना आसान हुआ।

सरकारी आंकड़ों में भी डिजिटल भुगतान की मात्रा में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2018-19 में डिजिटल भुगतान की मात्रा 2,32,602 लाख लेनदेन थी, जो 2019-20 में बढ़कर 3,40,025 लाख और 2020-21 में 4,37,445 लाख लेनदेन हो गई थी।

UPI के विस्तार ने इस बदलाव को और गति दी। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक QR कोड आधारित भुगतान तेजी से आम हुआ।

आगे भी डिजिटल भुगतान पर सरकार का जोर

MDR को शून्य करने का फैसला भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। इससे एक तरफ व्यापारियों को भुगतान स्वीकार करने की लागत से राहत मिली, वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों के लिए UPI और RuPay जैसे घरेलू डिजिटल भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल आसान हुआ।

सरकार की मौजूदा नीति में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना, भुगतान व्यवस्था को कम लागत वाला बनाना और देश में वित्तीय समावेशन को मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य हैं। UPI और RuPay पर जीरो-MDR व्यवस्था इसी व्यापक डिजिटल भुगतान नीति का अहम हिस्सा बनी हुई है।

कुल मिलाकर, जनवरी 2020 में लागू किया गया जीरो-MDR फ्रेमवर्क डिजिटल भुगतान को आम लोगों और कारोबारियों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है। शुल्क हटाने, व्यापारियों को भुगतान सुविधा उपलब्ध कराने और भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के लिए सरकारी प्रोत्साहन ने भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को विस्तार देने में भूमिका निभाई है।

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