
बेंगलुरु। कर्नाटक में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देने और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में 48 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को अपग्रेड करने की तैयारी की जा रही है। राज्य के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों से केंद्र सरकार की PM-SETU योजना के तहत इन संस्थानों के उन्नयन में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी से भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार किया जा सकता है।
शुक्रवार को उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में एमबी पाटिल ने कौशल विकास और औद्योगिक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कंपनियों को केवल तैयार कार्यबल पर निर्भर रहने के बजाय शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर युवाओं को आवश्यक कौशल प्रदान करने की प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि उद्योग अपनी वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को सबसे बेहतर तरीके से जानते हैं। इसलिए यदि कंपनियां ITI और अन्य प्रशिक्षण संस्थानों के साथ सीधे जुड़ती हैं तो ऐसे पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा सकते हैं, जिनसे विद्यार्थियों को रोजगार के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशल हासिल हो सके।
हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम
पाटिल ने बताया कि PM-SETU योजना को हब-एंड-स्पोक मॉडल के आधार पर लागू किया जा रहा है। इसके तहत कर्नाटक में 12 हब शामिल हैं और इनके साथ संबंधित ITI को जोड़कर प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।
हब-एंड-स्पोक व्यवस्था का उद्देश्य प्रशिक्षण संस्थानों के बीच संसाधनों, विशेषज्ञता और उद्योगों की भागीदारी का बेहतर इस्तेमाल करना है। प्रमुख संस्थान हब की भूमिका निभाएंगे, जबकि उनसे जुड़े दूसरे संस्थानों को भी आधुनिक प्रशिक्षण और उद्योग आधारित कौशल विकास का लाभ मिलेगा।
कर्नाटक में कुल 48 ITI को अपग्रेड किए जाने की योजना से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इन संस्थानों में प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर रहेगा।
उद्योगों की भागीदारी पर जोर
बैठक में मंत्री ने सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों से इस पहल में भाग लेने को कहा। उनका मानना है कि उद्योगों की प्रत्यक्ष भागीदारी से प्रशिक्षण और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम किया जा सकता है।
कई बार ITI या दूसरे तकनीकी संस्थानों से प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं के पास शैक्षणिक योग्यता तो होती है, लेकिन कंपनियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक अनुभव की कमी रहती है। उद्योगों के साथ साझेदारी होने पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान ही नई मशीनों, तकनीकों और कार्य प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी मिल सकती है।
इसके अलावा उद्योग संस्थानों को यह बताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि आने वाले वर्षों में किन क्षेत्रों में किस प्रकार के कौशल की मांग बढ़ने वाली है। इसके आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में समय रहते बदलाव किया जा सकता है।
युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना लक्ष्य
ITI के उन्नयन का मुख्य उद्देश्य केवल भवन या उपकरणों में सुधार करना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है। तेजी से बदलती तकनीक के कारण मैन्युफैक्चरिंग और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने के तरीके लगातार बदल रहे हैं।
ऑटोमेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसी तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच प्रशिक्षित कर्मचारियों के लिए भी नए कौशल की जरूरत पैदा हो रही है। ऐसे में ITI के पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण पद्धतियों को समय के अनुरूप बदलना महत्वपूर्ण है।
पाटिल ने उद्योग प्रतिनिधियों से कहा कि वे शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर अपनी जरूरत के मुताबिक कार्यबल विकसित करने में भूमिका निभाएं। इससे कंपनियों को प्रशिक्षित कर्मचारी मिल सकेंगे और युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं भी बेहतर होंगी।
शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत होगी साझेदारी
सरकार का जोर शिक्षा और उद्योग जगत के बीच दूरी कम करने पर है। यदि विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान ही उद्योगों के संपर्क में आते हैं तो उन्हें कार्यस्थल की वास्तविक जरूरतों को समझने का अवसर मिलता है।
इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, उद्योग विशेषज्ञों के प्रशिक्षण सत्र और आधुनिक उपकरणों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसे कदम इस साझेदारी को मजबूत कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नौकरी के लिए खुद को तैयार करने में मदद मिलेगी।
उद्योगों को भी इसका फायदा होगा। कंपनियां अपने क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से युवाओं को प्रशिक्षण देने में योगदान कर सकेंगी और भविष्य के लिए कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
आधुनिक तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षण की जरूरत
औद्योगिक क्षेत्र में तकनीक तेजी से बदल रही है। ऐसे में वर्षों पुराने प्रशिक्षण मॉडल के आधार पर तैयार कार्यबल नई औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई महसूस कर सकता है। यही कारण है कि ITI के आधुनिकीकरण के साथ पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण उपकरणों को भी नई तकनीकों के अनुरूप बनाना आवश्यक माना जा रहा है।
PM-SETU के तहत प्रस्तावित अपग्रेडेशन के जरिए प्रशिक्षण संस्थानों में उद्योग आधारित कौशल को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। इससे युवाओं को केवल प्रमाणपत्र हासिल करने के बजाय रोजगार योग्य कौशल विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
48 ITI के अपग्रेड से बढ़ेंगी संभावनाएं
राज्य के 48 ITI का उन्नयन बड़े स्तर पर कौशल विकास के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर सकता है। खास तौर पर उन युवाओं के लिए यह महत्वपूर्ण होगा, जो तकनीकी प्रशिक्षण हासिल करके सीधे रोजगार या स्वरोजगार के क्षेत्र में जाना चाहते हैं।
उद्योग मंत्री ने कंपनियों से इस योजना को केवल सरकारी कार्यक्रम के रूप में देखने के बजाय भविष्य के कार्यबल में निवेश के अवसर के रूप में लेने की अपील की। उद्योगों की भागीदारी जितनी मजबूत होगी, प्रशिक्षण को वास्तविक रोजगार आवश्यकताओं से जोड़ना उतना ही आसान होगा।
फिलहाल सरकार का जोर 12 हब के माध्यम से 48 ITI के उन्नयन और उनमें उद्योगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर है। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ उद्योगों को प्रशिक्षित कार्यबल और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।





