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10वीं पास गार्ड बना सॉफ्टवेयर इंजीनियर: Zoho ने दी ट्रेनिंग, आज कमा रहा है लाखों

Harrison
10 Oct 2025 7:14 PM IST
10वीं पास गार्ड बना सॉफ्टवेयर इंजीनियर: Zoho ने दी ट्रेनिंग, आज कमा रहा है लाखों
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Business,व्यापार : तकदीर कभी भी करवट ले सकती है — इस कहावत को सच कर दिखाया है Zoho Corporation में कार्यरत उस युवक ने, जो कभी कंपनी में सुरक्षा गार्ड (Security Guard) की नौकरी करता था, लेकिन आज एक सफल सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन चुका है।
इस प्रेरणादायक कहानी की शुरुआत होती है एक साधारण परिवार से आने वाले युवक से, जिसने केवल 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और बेहतर जीवन की तलाश में एक प्राइवेट कंपनी में गार्ड की नौकरी करने लगा। लेकिन उसकी मेहनत, लगन और सीखने की इच्छा ने उसकी जिंदगी बदल दी।
🔹 Zoho की अनोखी पहल
Zoho Corporation, जो कि भारत की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक है, अपने इनोवेटिव प्रोडक्ट्स के साथ-साथ टैलेंट को पहचानने और तराशने के लिए भी जानी जाती है। कंपनी ने पारंपरिक डिग्री सिस्टम से हटकर हुनर और काबिलियत को महत्व देने की नीति अपनाई है।
इसी नीति के तहत कंपनी ने अपने ही गार्ड को, जिसकी पढ़ाई 10वीं के बाद रुक गई थी, ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया। शुरुआती स्तर से उसे कोडिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कंप्यूटर साइंस के बेसिक्स सिखाए गए।
🔹 गार्ड से इंजीनियर बनने तक का सफर
युवक की शारिरीक ड्यूटी भले सुरक्षा की थी, लेकिन उसकी आंखें हर समय कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहती थीं।
कंपनी के अधिकारियों ने उसकी सीखने की जिज्ञासा को पहचाना और उसे आंतरिक ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया।
1-2 साल की ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल अनुभव के बाद, उसकी मेहनत रंग लाई और उसे Zoho में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नियुक्त कर लिया गया।
🔹 आज लाखों में है कमाई
आज वह युवक Zoho में बतौर फुल टाइम इंजीनियर कार्यरत है और हर महीने लाखों रुपये की सैलरी कमा रहा है। इसके साथ ही वह कंपनी के कई इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स का हिस्सा भी बन चुका है।
उसके जीवन की यह परिवर्तनकारी यात्रा अब युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है — खासकर उन लोगों के लिए जो संसाधनों की कमी के बावजूद सीखने और आगे बढ़ने का सपना देखते हैं।
🔹 Zoho की "डिग्री नहीं, काबिलियत" नीति
Zoho के CEO श्रीधर वेंबू पहले भी इस बात पर जोर दे चुके हैं कि टैलेंट को पहचानने के लिए सिर्फ डिग्री जरूरी नहीं होती। Zoho ने अब तक सैकड़ों छात्रों को खुद ट्रेन करके उन्हें सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में जगह दिलाई है — जिनमें से कई ग्रामीण इलाकों से आते हैं और पारंपरिक कॉलेज सिस्टम का हिस्सा नहीं रहे।
इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि अगर सीखने की ललक हो, तो हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, कामयाबी की मंजिल पाई जा सकती है। Zoho जैसे संस्थानों की पहल यह साबित करती है कि शिक्षा केवल डिग्री से नहीं, बल्कि मौकों, मेहनत और मार्गदर्शन से पूरी होती है।
जो कभी गार्ड की ड्रेस में कंपनी की सुरक्षा करता था, आज वही लैपटॉप के सामने बैठकर कोडिंग करता है और लाखों कमा रहा है — यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि नई सोच और नए भारत की है।
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