
फीफा वर्ल्ड कप 2026: अपने चरम पर है और दुनिया भर में फुटबॉल का जुनून चरम पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन जैसे दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों की टीमें इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं हैं, इसके बावजूद इन देशों में वर्ल्ड कप का क्रेज कम नहीं है। मेसी, रोनाल्डो और अन्य स्टार खिलाड़ियों के गोल पर इन देशों में सड़कों पर जश्न मनाया जाता है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय टीमों की गैरमौजूदगी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में फुटबॉल के करोड़ों प्रशंसक हैं। कोलकाता, केरल, ढाका और कराची जैसे शहरों में अर्जेंटीना और ब्राजील जैसी टीमों के लिए दीवानगी देखने को मिलती है। इसके बावजूद ये देश विश्व कप क्वालिफिकेशन तक नहीं पहुंच पाते। विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ बड़ी आबादी होना सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि मजबूत फुटबॉल ढांचा, प्रशिक्षण व्यवस्था और लंबी अवधि की योजना जरूरी होती है।
फुटबॉल विश्लेषकों का कहना है कि ब्राजील, जर्मनी, फ्रांस और अर्जेंटीना जैसे देशों ने दशकों पहले ही मजबूत घरेलू लीग, कोचिंग सिस्टम और प्रतिभा पहचान नेटवर्क विकसित कर लिया था। यही कारण है कि वे लगातार विश्व स्तर पर सफल रहे हैं। भारत और बांग्लादेश में क्रिकेट का प्रभाव भी एक बड़ा कारण माना जाता है, जहां निवेश, मीडिया और प्रतिभा का बड़ा हिस्सा क्रिकेट की ओर जाता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल क्रिकेट को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देश दोनों खेलों में संतुलन बनाए रखते हैं। असली चुनौती जमीनी स्तर पर फुटबॉल विकास की है।
चीन ने फुटबॉल में भारी निवेश किया और विदेशी खिलाड़ियों व कोचों पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन इसके बावजूद वह 2002 के बाद वर्ल्ड कप में जगह नहीं बना सका। इसका कारण मजबूत फुटबॉल संस्कृति और युवा स्तर पर प्रशिक्षण की कमी माना जाता है। पाकिस्तान और इथियोपिया जैसे देशों में प्रशासनिक समस्याएं, प्रतिबंध और कमजोर ढांचा भी बड़ी बाधा रहे हैं। वहीं इंडोनेशिया जैसे देशों ने हाल के वर्षों में सुधार दिखाया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार स्थायी सफलता के लिए घरेलू प्रतिभा विकास जरूरी है।
कुल मिलाकर, विश्व कप का यह विरोधाभास साफ दिखाता है कि सबसे ज्यादा फुटबॉल प्रेमी देश ही जरूरी नहीं कि टूर्नामेंट में खेलें। करोड़ों प्रशंसक आज भी मेसी और रोनाल्डो की जीत का जश्न मनाते हैं, लेकिन उनका सपना अपनी राष्ट्रीय टीम को वर्ल्ड कप में खेलते देखने का है।





