नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में दुनियाभर के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई नेताओं की मुलाकातें सुर्खियों में रहीं। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक आयोजन के बीच एक और नाम लोगों का ध्यान खींचता रहा—**जाहरा पेजेश्कियन**। जाहरा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की बेटी हैं और अपने पिता के साथ भारत आई थीं। BRICS बाजार और प्रधानमंत्री संग्रहालय की उनकी यात्रा के बाद उनकी तस्वीरें और वीडियो चर्चा में आ गए।
BRICS सम्मेलन में जाहरा किसी राष्ट्राध्यक्ष के रूप में शामिल नहीं हुई थीं। उनकी पहचान ईरानी राष्ट्रपति की बेटी के रूप में रही। हालांकि सम्मेलन से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा। खासकर भारतीय हस्तशिल्प को करीब से देखने और कारीगरों से बातचीत करने के उनके अंदाज की सोशल मीडिया पर चर्चा हुई।
कौन हैं जाहरा पेजेश्कियन?
जाहरा पेजेश्कियन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की बेटी हैं। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के मुताबिक उन्होंने केमिस्ट्री से संबंधित उच्च शिक्षा हासिल की है और ईरान के प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से मास्टर डिग्री प्राप्त की है। वह पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में भी काम कर चुकी हैं।
जाहरा के पिता मसूद पेजेश्कियन पेशे से कार्डियक सर्जन रहे हैं। राजनीति में आने के बाद उन्होंने सांसद, स्वास्थ्य मंत्री और संसद के डिप्टी स्पीकर जैसी जिम्मेदारियां संभालीं। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद वह ईरान के राष्ट्रपति बने।
पेजेश्कियन के पारिवारिक जीवन में एक बड़ी त्रासदी भी रही। 1993 में एक सड़क दुर्घटना में उनकी पत्नी और एक बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने बाकी बच्चों की परवरिश की और दोबारा शादी नहीं की।
पति के साथ पहुंचीं BRICS बाजार
नई दिल्ली में जाहरा पेजेश्कियन अपने पति **हसन मजीदी** के साथ BRICS बाजार पहुंचीं। यह आयोजन राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में किया गया था, जहां BRICS देशों के साथ भारत की अलग-अलग कला और हस्तशिल्प परंपराओं को प्रदर्शित किया गया।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने जाहरा का स्वागत किया। इस दौरान जाहरा ने अलग-अलग स्टॉल पर जाकर भारतीय हस्तशिल्प को देखा और कारीगरों के काम में दिलचस्पी दिखाई।
उनकी यह यात्रा महज औपचारिक भ्रमण तक सीमित नहीं दिखाई दी। उन्होंने कई कलाकृतियों को करीब से देखा और उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली।
बाग प्रिंट देखकर हुईं प्रभावित
BRICS बाजार में जाहरा पेजेश्कियन का ध्यान मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध **बाग प्रिंट कला** ने भी खींचा। उन्होंने इस पारंपरिक कला में इस्तेमाल होने वाले रंगों और डिजाइन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली।
रिपोर्ट के मुताबिक जाहरा ने खास तौर पर यह जानना चाहा कि बाग प्रिंट में इस्तेमाल होने वाला काला रंग कैसे तैयार किया जाता है। इसके बाद उन्होंने खुद लकड़ी का ठप्पा लेकर कपड़े पर प्रिंट लगाने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
उनकी इस दिलचस्पी ने भारतीय कारीगरों को भी उत्साहित किया। BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में स्थानीय भारतीय कला का किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के परिवार का ध्यान खींचना कारीगरों के लिए भी खास अवसर रहा।
बाग प्रिंट मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध पारंपरिक हस्तकला है। कपड़े पर लकड़ी के ब्लॉक के जरिए विशेष डिजाइन तैयार किए जाते हैं। पीढ़ियों से कारीगर इस कला को आगे बढ़ाते आए हैं।
प्रधानमंत्री संग्रहालय भी पहुंचीं जाहरा
BRICS बाजार के अलावा जाहरा पेजेश्कियन ने नई दिल्ली स्थित **प्रधानमंत्री संग्रहालय** का भी दौरा किया। संग्रहालय में भारत के प्रधानमंत्रियों और देश की लोकतांत्रिक यात्रा से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री प्रदर्शित की गई है।
उनका प्रधानमंत्री संग्रहालय जाना भी चर्चा में रहा। इस दौरान उन्हें भारत की राजनीतिक और लोकतांत्रिक यात्रा से जुड़ी जानकारी देखने का मौका मिला।
इस तरह जाहरा की दिल्ली यात्रा में एक तरफ BRICS से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक माहौल था तो दूसरी तरफ भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति को जानने का अवसर भी शामिल रहा।
राष्ट्रपति भवन में भी दिखीं पिता के साथ
जाहरा पेजेश्कियन अपने पिता के साथ राष्ट्रपति भवन भी पहुंचीं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का स्वागत किया। इस दौरान जाहरा की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
मसूद पेजेश्कियन की यह भारत यात्रा महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच हुई। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति का नई दिल्ली पहुंचना और BRICS के दूसरे नेताओं के साथ बातचीत करना कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
हालांकि इन बड़ी राजनीतिक गतिविधियों के समानांतर जाहरा की सांस्कृतिक गतिविधियां अलग वजह से सुर्खियों में रहीं।
सोशल मीडिया पर सादगी की चर्चा
BRICS बाजार में जाहरा पेजेश्कियन की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी सादगी को लेकर भी चर्चा हुई। वह साधारण ईरानी परिधान और हिजाब में अलग-अलग स्टॉल का भ्रमण करती दिखाई दीं। कई लोगों ने भारतीय कला और संस्कृति में उनकी दिलचस्पी पर प्रतिक्रिया दी।
विदेशी नेताओं के परिवार के सदस्य जब किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान स्थानीय संस्कृति से जुड़ते हैं तो ऐसी यात्राओं को सांस्कृतिक कूटनीति के नजरिए से भी देखा जाता है। इससे औपचारिक राजनीतिक वार्ताओं के अलावा देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संपर्क को बढ़ावा मिलता है।
जाहरा का BRICS बाजार जाना भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
पिता मसूद पेजेश्कियन क्यों रहे BRICS में अहम?
जहां जाहरा अपनी सांस्कृतिक यात्राओं को लेकर चर्चा में थीं, वहीं उनके पिता मसूद पेजेश्कियन BRICS की बड़ी कूटनीतिक बैठकों का हिस्सा बने।
ईरान BRICS के विस्तारित स्वरूप का महत्वपूर्ण सदस्य है। 2026 के नई दिल्ली सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। खास बात यह रही कि ईरान और संयुक्त अरब अमीरात ने BRICS के साझा बयान का समर्थन किया, जिसमें तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा, देशों की संप्रभुता का सम्मान और वैश्विक व्यापार तथा समुद्री स्थिरता की रक्षा पर जोर दिया गया।
BRICS सम्मेलन के दौरान मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद की मुलाकात भी महत्वपूर्ण रही। क्षेत्रीय तनाव के बीच इस बातचीत को कूटनीतिक दृष्टि से खास माना गया।
भारत-ईरान रिश्तों का सांस्कृतिक पहलू
भारत और ईरान के संबंध केवल राजनीति और व्यापार तक सीमित नहीं रहे हैं। दोनों देशों के बीच लंबे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं। फारसी भाषा और संस्कृति का भारतीय इतिहास पर गहरा प्रभाव रहा है।
ऐसे में जाहरा पेजेश्कियन का भारतीय हस्तशिल्प में दिलचस्पी दिखाना इस यात्रा का सांस्कृतिक पक्ष बन गया।
BRICS बाजार जैसे आयोजनों का उद्देश्य भी केवल सामान प्रदर्शित करना नहीं होता। इनके जरिए सदस्य देशों को एक-दूसरे की कला, संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का अवसर मिलता है।
क्यों इतनी चर्चा में रहीं जाहरा?
जाहरा पेजेश्कियन के चर्चा में आने की सबसे बड़ी वजह यह रही कि वह किसी राजनीतिक बयान या विवाद के कारण नहीं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति में दिखाई गई दिलचस्पी के कारण सुर्खियों में आईं।
राष्ट्रपति भवन में पिता के साथ मौजूदगी, प्रधानमंत्री संग्रहालय का दौरा, पति के साथ BRICS बाजार पहुंचना और बाग प्रिंट में खुद हाथ आजमाना—इन सभी तस्वीरों ने उनकी भारत यात्रा को अलग पहचान दी।
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक राजनीति, व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और पश्चिम एशिया के संकट जैसे गंभीर मुद्दों पर बातचीत हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
इन बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों के बीच जाहरा पेजेश्कियन ने BRICS सम्मेलन का एक अलग और सांस्कृतिक चेहरा सामने रखा। भारतीय हस्तशिल्प को लेकर उनकी उत्सुकता और कारीगरों से संवाद ने लोगों का ध्यान खींचा।
यही वजह है कि सम्मेलन खत्म होने के बाद दुनिया के बड़े नेताओं के साथ एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है—**आखिर जाहरा पेजेश्कियन कौन हैं?** जवाब है, वह ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की बेटी हैं, जो इस बार अपने पिता की भारत यात्रा के दौरान राजनीति से अलग भारतीय कला, इतिहास और संस्कृति में दिलचस्पी दिखाने के कारण चर्चा में रहीं।