वर्ल्ड | फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि यूरोपीय देशों की प्रस्तावित सेना को यूक्रेन में तैनात किया जा सकता है। उनका कहना है कि यह कदम एक समझौते के तहत होगा और इसका मकसद रूस के हमलों का जवाब देना है।
यूरोप की सैन्य तैनाती पर क्या बोले मैक्रों?
मैक्रों ने पेरिस में एक सुरक्षा सम्मेलन के दौरान कहा, "यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। हम यूक्रेन को समर्थन देना जारी रखेंगे और अगर जरूरत पड़ी, तो यूरोपीय देशों की सेना को वहां तैनात करने में संकोच नहीं करेंगे।"
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह तैनाती किसी बड़े सैन्य संघर्ष का हिस्सा नहीं होगी, बल्कि यूक्रेन की रक्षा और रूस को रोकने के लिए की जाएगी।
रूस की प्रतिक्रिया
मैक्रों के इस बयान के बाद रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यूरोप की सेना यूक्रेन में तैनात की गई, तो इसे युद्ध में सीधी भागीदारी माना जाएगा। रूस के विदेश मंत्रालय ने इसे नाटो और यूरोपीय संघ द्वारा खतरनाक उकसावा करार दिया है।
यूरोप की क्या है रणनीति?
मैक्रों लंबे समय से यूरोप के लिए एक स्वतंत्र सैन्य नीति की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि यूरोपीय संघ को अमेरिका और नाटो पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए।
विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान यूरोप की नई सुरक्षा रणनीति का संकेत हो सकता है, जहां अमेरिका की भूमिका कम करते हुए यूरोप अपने दम पर रूस से निपटने की योजना बना रहा है।
आगे क्या?
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मैक्रों के बयान के बाद यूरोपीय संघ और नाटो के सदस्य देशों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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अमेरिका और ब्रिटेन इस पहल का समर्थन करेंगे या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा।
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रूस की ओर से कड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे यूरोप में सुरक्षा संकट और गहरा सकता है।