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जनता से रिश्ता वेबडेस्क।  दुनिया के कुछ देशों में मंकीपॉक्स वायरस (Monkeypox Virus) के बढ़ते मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अगले सप्ताह एक अहम बैठक करने जा रहा है. जिसमें यह तय किया जाएगा कि इस बीमारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी से जुड़ी चिंता के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए.

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम ने कहा कि, "मंकीपॉक्स का प्रकोप असामान्य और चिंताजनक है. इस वजह से मैंने अगले सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत आपातकालीन समिति को बुलाने का फैसला किया है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि यह प्रकोप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी से जुड़ी चिंताओं के योग्य है.
इस मामले पर चर्चा करने के लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की इमरजेंसी कमेटी 23 जून को बैठक करेगी. डब्ल्यूएचओ हेल्थ विशेषज्ञों के साथ मिलकर मंकीपॉक्स वायरस का नाम बदलने और इससे होने वाली बीमारी पर भी काम कर रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया के 39 देशों में से 32 देश इस वायरस की चपेट में है. दुनियाभर में अब तक मंकीपॉक्स संक्रमण के अब तक 1600 मामले सामने आए है. इसके अलावा 1500 केस संदिग्ध हैं.
टेस्टिंग और सर्विलांस बढ़ाने की जरूरत- WHO
दुनियाभर में फैल रहे इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टेस्टिंग, सर्विलांस बढ़ाने और संक्रमित मरीजों को आइसोलेशन में रखने का सुझाव दिया है.
हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने अब तक मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन की सिफारिश नहीं की है. वहीं स्मालपॉक्स की वैक्सीन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया ने कहा कि, मंकीपॉक्स के खिलाफ इस टीके से कुछ सुरक्षा मिलने की उम्मीद है लेकिन इसे लेकर सीमित डेटा है, साथ ही वैक्सीन की सप्लाई भी लिमिटेड है.
वहीं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन चीफ ने इस बात पर भी जोर दिया कि वैक्सीन की जरूरत जहाँ भी हो, वहां समान रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए.
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