वॉशिंगटन: व्हाइट हाउस के मिडिल ईस्ट मामलों के एक पूर्व सीनियर अधिकारी ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ चल रहा टकराव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बाकी समय तक जारी रह सकता है और उनके उत्तराधिकारी को विरासत में मिल सकता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह तेहरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव बनाने के साथ-साथ आगे की स्थितियों के लिए भी तैयारी कर रहा है।
राष्ट्रपति जो बाइडन के मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका मामलों के कोऑर्डिनेटर रहे ब्रेट मैकगर्क ने कहा कि उन्हें ईरान के साथ किसी व्यापक समझौते की कोई साफ राह नहीं दिख रही है। उन्होंने अनुमान लगाया कि आर्थिक दबाव, बीच-बीच में सैन्य टकराव और संभवतः कुछ समय के लिए युद्धविराम का दौर लंबा चलेगा।
मैकगर्क ने CNN के फरीद जकारिया से कहा, "अगर मुझे अनुमान लगाना हो, तो यह ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंत तक चलेगा और आगे भी जारी रहेगा। अगले राष्ट्रपति को ईरान की इस पुरानी समस्या से निपटना होगा—जिमी कार्टर के समय से ही हर राष्ट्रपति को इस क्रांतिकारी व्यवस्था से निपटना पड़ा है।"
उन्होंने कहा, "यह एक पुरानी समस्या रही है। मैंने कई प्रशासनों के दौरान इससे निपटा है।"
मैकगर्क ने कहा कि 7 अक्टूबर, 2023 को इज़राइल पर हमास के हमले के बाद से मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन में "बुनियादी" बदलाव आया है।
उन्होंने ईरान से जुड़े दो बाद के सैन्य अभियानों का ज़िक्र किया: ईरानी परमाणु बुनियादी ढांचे के खिलाफ 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' और इस साल 28 फरवरी को शुरू हुआ टकराव।
मैकगर्क ने कहा कि एक चिंता यह है कि हालिया टकराव की शुरुआत एक ऐसे मकसद के साथ हुई जिसे उन्होंने 'बिना किसी तय समय-सीमा वाले शासन-परिवर्तन' (ओपन-एंडेड रिजीम-चेंज) का लक्ष्य बताया।
उन्होंने कहा, "और एक बार जब आप उस रास्ते पर चल पड़ते हैं, तो आप खुद को इस उलझन में फंसा हुआ पा सकते हैं कि इसे असल में खत्म कैसे किया जाए।"
मैकगर्क ने कहा कि उन्हें कोई अंतिम समाधान (एंडगेम) तब तक नहीं दिखता जब तक कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था अपने स्वरूप और नीतियों में बुनियादी बदलाव न करे या अंततः बिखर न जाए।
उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे लगता है कि इसमें अभी काफी समय लगेगा।"
फिलहाल, मैकगर्क ने लंबे समय तक टकराव चलने का अनुमान लगाया है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम अभी इसी दौर से गुज़र रहे हैं और यह कुछ समय तक जारी रहेगा। भारी आर्थिक दबाव बना रहेगा। कभी-कभी 'जैसे को तैसा' वाली सैन्य झड़पें हो सकती हैं। बीच-बीच में कुछ समय के लिए युद्धविराम या समझौते भी हो सकते हैं।"
मैकगर्क ने कहा कि परमाणु मसले पर कोई व्यापक समझौता होना और भी मुश्किल लग रहा है।
उन्होंने कहा कि तेहरान में फैसले लेने वाले लोग शायद ईरान के 'थ्रेशोल्ड न्यूक्लियर स्टेट' (परमाणु हथियार बनाने की क्षमता के बहुत करीब वाला देश) के दर्जे को ही अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा गारंटी या 'डिटेरेंट' मानेंगे।
उन्होंने कहा, "इसलिए, परमाणु मसले पर समझौता करना वाकई बहुत मुश्किल होगा।"
मैकगर्क का यह आकलन तब आया जब ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने अलग से कहा कि ट्रंप प्रशासन सैन्य और कूटनीतिक, दोनों रास्ते खुले रख रहा है।
CBS न्यूज़ के कार्यक्रम "फेस द नेशन" में राइट से उन खबरों के बारे में पूछा गया कि अमेरिका खाड़ी देशों में तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त रक्षा उपकरण भेज रहा है और एक तीसरा 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' भी उस इलाके की ओर बढ़ रहा है।
राइट ने कहा, "देखिए, राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अपनाया है कि ईरान - जो दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी शासन है - के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और न ही होंगे।"
"इसलिए, ज़ाहिर है, हम उस लक्ष्य को पाने के लिए हर रास्ते पर विचार कर रहे हैं - चाहे वह आर्थिक हो या सैन्य स्तर पर किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना हो।"
उन्होंने कहा, "लेकिन हम अगली सरकार को ऐसा ईरान नहीं सौंप सकते जिसके पास परमाणु हथियार हों।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रंप ने चुनाव के दिन - जब तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप वहां पहुंचने वाला था - के बाद तनाव बढ़ाने का फैसला किया है, तो राइट ने राष्ट्रपति की योजनाओं का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, "मैं निश्चित रूप से राष्ट्रपति की योजनाओं या नीतियों के बारे में पहले से कुछ नहीं कहूंगा।"
राइट ने कहा कि ट्रंप "हमेशा आपातकालीन स्थितियों के लिए योजना बनाते रहते हैं और बातचीत भी करते रहते हैं।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि कूटनीतिक और सैन्य दबाव दोनों बने हुए हैं, तो राइट ने जवाब दिया: "बिल्कुल, बिल्कुल, हर समय।"
यह टकराव प्रशासन के लिए ऊर्जा से जुड़ी एक मुश्किल चुनौती भी पेश कर रहा है।
राइट ने माना कि खाड़ी में तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे में किसी और रुकावट के खिलाफ कोई गारंटी नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा, "कोई गारंटी नहीं है। टकराव में कोई गारंटी नहीं होती। ज़िंदगी में भी कोई गारंटी नहीं होती।" फिर भी, उन्होंने आने वाले हफ़्तों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें कम होने का अनुमान लगाया। इसके लिए उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बढ़ती सप्लाई, अमेरिका में रिकॉर्ड पेट्रोल उत्पादन और गर्मियों में गाड़ी चलाने का मौसम खत्म होने के बाद घटती मांग का हवाला दिया।
राइट ने कहा, "बिल्कुल। डीज़ल की कीमतें कम हो रही हैं। पेट्रोल की कीमतें कम हो रही हैं। मुझे उम्मीद है कि यह सिलसिला जारी रहेगा।"
राइट ने कहा कि ईरान के बारे में फ़ैसले लेते समय ट्रंप को पता था कि इनसे ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं।
राइट ने कहा, "अगर उनके फ़ैसले राजनीतिक होते, तो वे बस मामले को टाल देते और अगले राष्ट्रपति को परमाणु हथियारों से लैस ईरान सौंप देते।"
"उन्हें पता था कि इससे थोड़े समय के लिए ऊर्जा की कीमतें बढ़ेंगी। उन्होंने कहा, 'मुझे इसमें नुकसान उठाना पड़ सकता है, लेकिन मुझे सही काम करना है।'"
राइट ने कहा कि ट्रंप को फ़ारस की खाड़ी से ऊर्जा की सप्लाई पर मंडरा रहे खतरों की "अच्छी तरह जानकारी" थी।
रविवार के टॉक शो में भी इस टकराव के राजनीतिक नतीजों पर काफ़ी चर्चा हुई।
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