नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को नई आर्थिक दिशा देने का खाका पेश किया है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के सदियों पुराने रिश्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इस साझेदारी को नई गति देने का समय है। इसके तहत अगले 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह आर्थिक रोडमैप दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और नवाचार से जुड़े सहयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई। बैठक में दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। बातचीत के बाद दोनों नेताओं की मौजूदगी में कई समझौतों और समझौता ज्ञापनों यानी MoUs का आदान-प्रदान भी हुआ। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सहयोग को और मजबूत करना तथा नए क्षेत्रों में साझेदारी के अवसर पैदा करना है।
समझौतों के आदान-प्रदान के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के साथ संयुक्त प्रेस बयान दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्तों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "भारत-स्विट्जरलैंड की दोस्ती सदियों पुरानी है। इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी आज हमारी नींव के मजबूत स्तंभ हैं। आज के इस शिखर सम्मेलन से हम अपनी साझेदारी को नई गति और नई ऊंचाइयां देंगे।"
प्रधानमंत्री के बयान में तीन क्षेत्रों पर खास जोर दिखाई दिया—इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी। भारत तेजी से डिजिटल तकनीक, आधुनिक बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और नई तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है, जबकि स्विट्जरलैंड शोध, नवाचार, उच्च तकनीक और उन्नत उद्योगों के लिए जाना जाता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग को इन क्षेत्रों में विस्तार देने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
भारत और स्विट्जरलैंड के आर्थिक संबंधों को यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के साथ भारत के व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते से भी नया आधार मिला है। EFTA में स्विट्जरलैंड के अलावा आइसलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। इस समझौते में भारत में अगले 15 वर्षों में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को प्रोत्साहित करने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस आर्थिक साझेदारी का मकसद केवल निवेश आकर्षित करना नहीं है, बल्कि व्यापार और कारोबारी रिश्तों को भी नई गति देना है। भारत के लिए स्विट्जरलैंड यूरोपीय बाजारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। वहीं स्विस कंपनियों के लिए भारत का विशाल बाजार, बढ़ती अर्थव्यवस्था और तेजी से विकसित होता बुनियादी ढांचा कई नए कारोबारी अवसर उपलब्ध कराता है।
दोनों नेताओं की बैठक में व्यापार और निवेश के अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, कौशल विकास और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा भी सामने आई। फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन की बैठक के दौरान भी दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, विज्ञान-तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। उस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-ईएफटीए समझौते से व्यापार और निवेश प्रवाह बढ़ने की संभावनाओं को रेखांकित किया था।
भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों में आर्थिक सहयोग के साथ तकनीकी साझेदारी की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्नत तकनीक, अनुसंधान, औद्योगिक नवाचार और आधुनिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों की कंपनियों और संस्थानों को नए अवसर मिल सकते हैं। भारत की बड़ी प्रतिभाशाली युवा आबादी और स्विट्जरलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच तालमेल कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा दे सकता है।
100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों का लक्ष्य अपने आप में बड़ा आर्थिक रोडमैप है। हालांकि, इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी, निवेश परियोजनाओं की गति, कारोबारी माहौल और विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सहयोग की अहम भूमिका होगी। निवेश के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों की कंपनियां दीर्घकालिक परियोजनाओं और उत्पादन गतिविधियों में किस तरह भाग लेती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की सोमवार की बैठक को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब भारत यूरोप के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और व्यापक बनाने पर जोर दे रहा है। स्विट्जरलैंड के साथ सहयोग में व्यापार के अलावा तकनीक, नवाचार और निवेश को प्राथमिकता मिलने से द्विपक्षीय संबंधों का दायरा भी बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सोमवार की उच्चस्तरीय बैठक ने दोनों देशों के पुराने रिश्तों को नए आर्थिक और तकनीकी आधार से जोड़ने का संदेश दिया। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से 15 साल में 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों के लक्ष्य पर जोर भारत-स्विट्जरलैंड आर्थिक साझेदारी की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में समझौतों का क्रियान्वयन, निवेश परियोजनाओं की प्रगति और तकनीक तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग इस साझेदारी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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