नई दिल्ली: 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बनी डॉक्यूमेंट्री से पाकिस्तान साफ़ तौर पर परेशान है। डिस्कवरी चैनल ने "डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर" नाम की डॉक्यूमेंट्री रिलीज़ की, जिसे 15 अगस्त को दिखाया गया।
दो हिस्सों वाली इस डॉक्यूमेंट्री में भारतीय सेना के अधिकारी और 'ऑपरेशन सिंदूर' में शामिल सभी जवान दिखाए गए हैं। इसमें उस ऑपरेशन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के तरीके के बारे में विस्तार से बताया गया है, जिसे भारतीय सेना ने पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए चलाया था।
इस पर पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है। ISPR ने इस डॉक्यूमेंट्री को ऑपरेशन के बारे में भारत का अपना नज़रिया बताया है। साथ ही, उन्होंने भारत के 100 प्रतिशत सफलता के दावे पर भी सवाल उठाए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद इस्लामाबाद में बहुत कुछ बदल गया है।
अधिकारी ने कहा कि अपने ही देश में फील्ड मार्शल का आक्रामक रवैया इस बात का सबूत है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान क्या हुआ था। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK), बलूचिस्तान, अफ़गानिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KP) में उनके कदम साफ़ तौर पर दिखाते हैं कि यह आक्रामकता भारतीय ऑपरेशन के दौरान हुई बदनामी को छिपाने के लिए है।
पाकिस्तान पर नज़र रखने वालों का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तानी प्रशासन और खासकर सेना को बहुत कुछ समझाना पड़ा था। उन्हें देश की जनता और उससे भी ज़्यादा लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिज़्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों को जवाब देना पड़ा, जिन्हें इस ऑपरेशन में सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ था।
इन तीनों आतंकी संगठनों का काफ़ी इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद हो गया, जिसमें ट्रेनिंग सेंटर, हेडक्वार्टर और यहाँ तक कि उनके लोग भी शामिल थे। जानकारों का कहना है कि इस डॉक्यूमेंट्री ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। इसने एक संवेदनशील मुद्दे को फिर से हवा दी है, जिसे प्रशासन और आसिम मुनीर भूलना चाहेंगे।
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि ISPR को निर्देश दिया गया है कि वे लगातार इस डॉक्यूमेंट्री पर हमला करें और इसकी सच्चाई पर सवाल उठाएँ। अधिकारी ने कहा कि भले ही इससे भारत के लोगों पर कोई फ़र्क न पड़े, लेकिन पाकिस्तान में लोग एक बार फिर प्रशासन से सवाल पूछने लगेंगे।
अधिकारी ने यह भी कहा कि इसी वजह से ISPR ने इस डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ़ आक्रामक रुख अपनाया है। एक और अधिकारी ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से पाकिस्तान भारत के खिलाफ़ सूचना युद्ध (information war) में लगा हुआ है। पाकिस्तानी सेना और ISI ने भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाफ झूठी बातें फैलाने के लिए कई सोशल मीडिया हैंडल बनाए थे।
अधिकारी ने बताया कि इनका मकसद झूठ फैलाना और साथ ही सेना का मनोबल गिराना था। डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ यह नया हमला उसी गलत जानकारी फैलाने वाले अभियान (डिसइन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) का हिस्सा है। खुफिया एजेंसियां सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी हैंडल की गतिविधियों पर लगातार नज़र रख रही हैं।
ये हैंडल अब भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्र सरकार की छवि खराब करने के लिए हेर-फेर किए गए वीडियो और तस्वीरें पोस्ट करके अपने कंटेंट को बढ़ावा देने की कोशिश करेंगे। डॉक्यूमेंट्री को निशाना बनाने का मकसद अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के मन में शक पैदा करना है, ताकि उन्हें 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में सही जानकारी न मिल सके।
जो ऑपरेशन चलाया गया था, वह बहुत सटीक और ज़बरदस्त था, जिसने पाकिस्तान में मौजूद पूरे आतंकी तंत्र को हिलाकर रख दिया था।