वॉशिंगटन: अमेरिका ने अपने EB-5 इमिग्रेंट-इन्वेस्टर प्रोग्राम के लिए फीस में भारी बढ़ोतरी को मंज़ूरी दे दी है। इससे कुछ याचिकाओं (petitions) को फाइल करने की लागत दोगुनी से ज़्यादा हो जाएगी। इस बदलाव का असर भारत से उन आवेदकों पर पड़ने की संभावना है जो निवेश के ज़रिए स्थायी निवास (permanent residence) पाना चाहते हैं।
US सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ ने मंगलवार को फीस का नया स्ट्रक्चर घोषित किया। नई फीस 30 नवंबर से लागू होगी।
इंडिपेंडेंट इन्वेस्टर्स (जो अकेले निवेश करते हैं) द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म I-526 की फाइलिंग फीस $3,675 से बढ़कर $7,615 हो जाएगी।
मंज़ूरशुदा रीजनल सेंटर के ज़रिए निवेश करने वाले इन्वेस्टर्स के शुरुआती फॉर्म I-526E की फीस $3,675 से बढ़कर $7,850 हो जाएगी।
शुरुआती I-526 और I-526E याचिकाओं में $75 की टेक्नोलॉजी फीस भी शामिल होगी। रीजनल सेंटर के इन्वेस्टर्स को प्रोग्राम की 'इन्वेस्टर इंटीग्रिटी फीस' भी अलग से देनी होगी।
फॉर्म I-829 (जिसे वे इन्वेस्टर्स फाइल करते हैं जो अपने स्थायी निवासी स्टेटस पर लगी शर्तों को हटाना चाहते हैं) की फीस $3,750 से बढ़कर $5,000 हो जाएगी।
रीजनल सेंटर्स पर लगने वाली फीस में और भी ज़्यादा बढ़ोतरी होगी।
रीजनल सेंटर का दर्जा पाने के लिए शुरुआती फॉर्म I-956 एप्लीकेशन की फीस $17,795 से बढ़कर $44,115 हो जाएगी। कमर्शियल एंटरप्राइज़ में निवेश की मंज़ूरी पाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म I-956F की फीस बढ़कर $42,675 हो जाएगी।
हालांकि, फॉर्म I-956G की सालाना फीस $3,035 से घटकर $2,165 हो जाएगी।
फाइनल नियम में उन खास इन्वेस्टर्स के लिए फॉर्म I-527 भी बनाया गया है जो पुराने फॉर्म I-526 में बदलाव करना चाहते हैं। नई फाइलिंग की लागत $10,330 होगी।
फीस का शेड्यूल मंगलवार को लोगों की जानकारी के लिए जारी किया गया और इसे बुधवार को फेडरल रजिस्टर में आधिकारिक तौर पर पब्लिश किया जाएगा। USCIS ने कहा कि इन बदलावों का मकसद यह पक्का करना है कि फीस से EB-5 प्रोग्राम को चलाने का पूरा खर्च निकल सके, एजेंसी कानूनी तौर पर तय प्रोसेसिंग टारगेट पूरे कर सके और प्रोग्राम की ईमानदारी और पारदर्शिता को मज़बूत करने वाले उपायों को सपोर्ट मिल सके।
इन उपायों में ऑडिट, नियमों के पालन की समीक्षा, साइट का दौरा और धोखाधड़ी व गलत इस्तेमाल का पता लगाने की कोशिशें शामिल हैं।
USCIS को ज़्यादातर पैसा एप्लीकेशन और पिटीशन फीस से मिलता है, न कि सीधे टैक्सपेयर के पैसे से। एजेंसी ने कहा कि एप्लीकेशन की जांच, योग्यता की पुष्टि, बैकग्राउंड चेक और प्रोग्राम को चलाने का खर्च उन लोगों को ही उठाना चाहिए जो इमिग्रेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
EB-5 रिफॉर्म एंड इंटीग्रिटी एक्ट 2022 ने USCIS को प्रोग्राम की लागत पर एक अलग स्टडी करने का निर्देश दिया था। इसमें एजेंसी के लिए यह भी ज़रूरी था कि वह फीस को ऐसे लेवल पर तय करे जिससे इसे चलाने का पूरा खर्च निकल सके।
इस कानून ने प्रोसेसिंग के लक्ष्य तय किए और रीजनल सेंटरों, प्रमोटरों और इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स की निगरानी का दायरा बढ़ाया।
नए नियम के तहत, 20 या उससे कम इन्वेस्टर वाले रीजनल सेंटरों के लिए सालाना EB-5 इंटीग्रिटी फंड पेमेंट $10,000 से बढ़ाकर $11,000 कर दिया गया है। बड़े रीजनल सेंटरों के लिए यह चार्ज $20,000 से बढ़कर $22,000 हो जाएगा।
इसमें देर से पेमेंट करने पर पेनल्टी का प्रावधान है। अगर कोई रीजनल सेंटर डेडलाइन के बाद नवंबर में पेमेंट करता है, तो उसे 10% पेनल्टी देनी पड़ सकती है। दिसंबर में पेमेंट करने पर यह पेनल्टी बढ़कर 20% हो जाएगी, और लगातार पेमेंट न करने पर प्रोग्राम से हटाया भी जा सकता है।
USCIS ने कहा कि ये बदलाव प्रोग्राम की ईमानदारी को मज़बूत करने और साथ ही इन्वेस्टर की पिटीशन को प्रोसेस करने के लिए ज़रूरी संसाधन सुनिश्चित करने के मकसद से किए गए हैं।
कांग्रेस ने 1990 में अमेरिका में विदेशी पूंजी निवेश और रोज़गार पैदा करने को बढ़ावा देने के लिए EB-5 प्रोग्राम बनाया था। योग्य इन्वेस्टर किसी अमेरिकी कमर्शियल एंटरप्राइज़ में निवेश करके और ज़रूरी संख्या में रोज़गार पैदा करके अपने लिए, अपने जीवनसाथी और योग्य बच्चों के लिए कंडीशनल परमानेंट रेजिडेंस (शर्तों के साथ स्थायी निवास) हासिल कर सकते हैं।
इस प्रोग्राम के तहत आम तौर पर टारगेटेड एम्प्लॉयमेंट एरिया या योग्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में $800,000 या दूसरी जगहों पर $1.05 मिलियन के निवेश की ज़रूरत होती है। भारतीय आवेदकों के लिए, सरकारी फाइलिंग चार्ज अलग होते हैं; इनमें ज़रूरी पूंजी निवेश, कानूनी खर्च और अलग-अलग रीजनल-सेंटर प्रोजेक्ट्स द्वारा लिए जाने वाले एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज शामिल नहीं होते।
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