वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था और उसके सैन्य तंत्र को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कहा कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान का समुद्री व्यापार लगभग ठप हो गया है और उसकी तेल निर्यात से होने वाली कमाई पर बड़ा असर पड़ा है। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन कार्रवाइयों के कारण ईरान का कम से कम 25 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। इसके अलावा करीब 35 करोड़ डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी फ्रीज करने में भी अमेरिकी एजेंसियों को सफलता मिली है।
ईरान के समुद्री व्यापार पर अमेरिका की सख्त नाकेबंदी
एडमिरल ब्रैड कूपर ने अमेरिकी केंद्रीय कमान के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो बयान में कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को प्रभावी तरीके से लागू किया है।उन्होंने दावा किया कि मानवीय सहायता से जुड़े अपवादों को छोड़कर ईरान समुद्री रास्ते से आयात और निर्यात नहीं कर पा रहा है।कूपर के अनुसार, अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों और राजस्व के प्रमुख स्रोतों को प्रभावित किया है। इसका असर विशेष रूप से ईरान के सुरक्षा तंत्र और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर पड़ रहा है।हालांकि, स्वतंत्र समुद्री निगरानी आंकड़ों के अनुसार, कुछ जहाज अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद सीमित मात्रा में ईंधन का निर्यात करने में सफल रहे हैं। इसलिए समुद्री व्यापार पूरी तरह बंद होने का दावा अमेरिकी सैन्य आकलन पर आधारित है।
तेल निर्यात में 25 अरब डॉलर का नुकसान होने का दावा
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने दावा किया कि समुद्री नाकेबंदी के कारण ईरान कम से कम 25 अरब डॉलर मूल्य के कच्चे तेल का निर्यात नहीं कर पाया है।ईरान की अर्थव्यवस्था में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से होने वाली आय महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तेल निर्यात प्रभावित होने से सरकारी राजस्व, विदेशी मुद्रा की उपलब्धता और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है।एडमिरल कूपर ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की आर्थिक क्षमता को कमजोर करने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय करके कार्रवाई की है।हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने 25 अरब डॉलर के अनुमान की पूरी गणना पद्धति सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में इस रकम को अमेरिका का दावा माना जा रहा है।
35 करोड़ डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी फ्रीज करने में मिली सफलता
CENTCOM ने बताया कि अमेरिकी एजेंसियों के सहयोग से ईरान से संबंधित लगभग 35 करोड़ डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी को फ्रीज करने में मदद मिली है।अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि डिजिटल परिसंपत्तियों का इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने, हथियार खरीदने और सैन्य ढांचे के पुनर्निर्माण जैसी गतिविधियों में किया जा रहा था।कूपर ने कहा कि आर्थिक प्रतिबंधों और वित्तीय कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य गतिविधियों के लिए धन जुटाने की क्षमता को सीमित करना है।अमेरिकी सेना के अनुसार, समुद्री नाकेबंदी और वित्तीय प्रतिबंधों से ईरान के सैन्य संगठन पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
समर्थक लड़ाकू संगठनों को फंड देने में परेशानी
एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया कि ईरान की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि वह पहले की तरह अपने सहयोगी सशस्त्र संगठनों को आर्थिक सहायता देने में कठिनाइयों का सामना कर रहा है।उनके अनुसार, मध्य पूर्व में सक्रिय ईरान समर्थित कुछ संगठन अब उलटे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आर्थिक संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं।अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि पिछले कई महीनों से जारी संघर्ष और आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की सैन्य तथा वित्तीय क्षमताओं को प्रभावित किया है।हालांकि, इन संगठनों के वित्तीय लेनदेन और ईरान की वास्तविक आर्थिक स्थिति का स्वतंत्र आकलन सीमित है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर असर
अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई का प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य में भी देखने को मिल रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।एडमिरल कूपर ने बताया कि अमेरिकी सेना व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सहयोगी देशों के साथ काम कर रही है।उन्होंने दावा किया कि पिछले एक सप्ताह में लगभग 400 व्यापारिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे हैं। अमेरिकी सेना ने इस अवधि में खाड़ी देशों से 10 करोड़ बैरल से अधिक तेल की आवाजाही में सहायता की है।अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान से जुड़े हमलों के कारण समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच बढ़ा आर्थिक दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तथा आर्थिक टकराव का असर पूरे पश्चिम एशिया में महसूस किया जा रहा है। समुद्री सुरक्षा, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार इस संघर्ष के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य गतिविधियों को सीमित करना और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।दूसरी ओर, ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का विरोध करता रहा है। दोनों देशों के बीच जारी टकराव के कारण क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।फिलहाल CENTCOM के दावों ने ईरान की आर्थिक स्थिति और उसके सैन्य संगठनों की वित्तीय क्षमता को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रतिबंधों, समुद्री नाकेबंदी और ईरान की प्रतिक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी रहेगी।