तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य और राजनीतिक तनाव के बीच ईरान के सशस्त्र बलों ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकारची ने रविवार, 8 नवंबर 2026 को वॉशिंगटन की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपनी आधिपत्यवादी और शत्रुतापूर्ण नीतियां बंद करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के सामने खड़ी होने वाली किसी भी ताकत का अंत अंततः 'पतन और विघटन' होगा। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव के और बढ़ने के संकेत मिले हैं।ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने अमेरिका की सैन्य रणनीति, आर्थिक दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप की नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि ईरान के खिलाफ वॉशिंगटन की रणनीतियां अपने उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रही हैं। शेकारची के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन की अधिकतम दबाव (मैक्सिमम प्रेशर) की नीति और सैन्य कार्रवाई की रणनीति ईरान की इच्छाशक्ति को कमजोर नहीं कर पाई है।ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA और समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, शेकारची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ टकराव की रणनीति अपनाने वाले अमेरिकी नेतृत्व को अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिका की आधिपत्यवादी नीतियों पर उठाए सवाल
ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकारची ने कहा कि अमेरिकी नेतृत्व लंबे समय से ईरान के खिलाफ दबाव, धमकी और सैन्य कार्रवाई की नीति अपनाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की इन कोशिशों का उद्देश्य ईरान की राजनीतिक व्यवस्था और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति को कमजोर करना है।ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि वॉशिंगटन की आक्रामकता, हत्या और अधिकतम दबाव की नीतियां अपेक्षित परिणाम देने में असफल रही हैं। उनके मुताबिक, ईरान का नेतृत्व, जनता और सशस्त्र बल इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एकजुट हैं।उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य रणनीतियों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। शेकारची ने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बेड़े और उपकरणों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है तथा वॉशिंगटन की धमकियां अपने उद्देश्य हासिल नहीं कर पाई हैं।हालांकि, ये ईरानी सैन्य प्रवक्ता के दावे हैं। अमेरिकी पक्ष की ओर से इस विशेष बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
ट्रंप प्रशासन की नीतियों को बताया विफल
ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान को कमजोर करने और उसकी मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने के उद्देश्य से टकराव का रास्ता अपनाया था।शेकारची के अनुसार, इस रणनीति का उलटा असर हुआ और अमेरिका को रणनीतिक नुकसान तथा आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि ईरान के सशस्त्र बलों और क्षेत्र में उसके सहयोगी समूहों ने अमेरिकी दबाव का सामना किया है।ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिकी सैन्य नीति को अप्रभावी बताते हुए दावा किया कि ईरान की रक्षात्मक क्षमता और प्रतिरोध की रणनीति ने वॉशिंगटन की योजनाओं को चुनौती दी है।उन्होंने कहा कि अमेरिका की शक्ति और प्रभाव को लेकर बनाई गई धारणाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों का भी किया उल्लेख
अपने बयान में शेकारची ने अमेरिका के हालिया मध्यावधि चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी को हुए नुकसान को ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ जनता की नाराजगी से जोड़ने का प्रयास किया।अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बढ़त हासिल कर रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने दोनों सदनों में बहुमत हासिल किया। महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, ईरान युद्ध और भ्रष्टाचार को लेकर मतदाताओं की नाराजगी चुनाव परिणामों को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों में शामिल रही।शेकारची ने इन चुनावी नतीजों को केवल अमेरिका की आंतरिक राजनीति का परिणाम मानने के बजाय ईरान के खिलाफ अमेरिकी रणनीति की विफलता से जोड़कर पेश किया। हालांकि, अमेरिकी मतदाताओं ने किस मुद्दे के आधार पर मतदान किया, इसके कई कारण हैं और ईरानी प्रवक्ता की यह व्याख्या उनका राजनीतिक दृष्टिकोण है।
ईरान की सैन्य ताकत और प्रतिरोध क्षमता का किया उल्लेख
ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने कहा कि देश की सैन्य ताकत, राजनीतिक नेतृत्व और जनता की एकजुटता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने लगातार बाहरी दबाव का सामना किया है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयार है।उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से अपनाई गई सैन्य और आर्थिक रणनीतियां ईरान को झुकाने में सफल नहीं हुई हैं। उनके अनुसार, किसी देश की ताकत केवल उसके सैन्य उपकरणों या आर्थिक संसाधनों से निर्धारित नहीं होती, बल्कि राष्ट्रीय इच्छाशक्ति और एकजुटता भी महत्वपूर्ण होती है।शेकारची ने पश्चिम एशिया में ईरान के सहयोगी संगठनों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देने में इनका योगदान रहा है।
किसी भी विरोधी ताकत को दी पतन की चेतावनी
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने अमेरिका सहित ईरान के विरोध में खड़ी होने वाली ताकतों को कड़ी चेतावनी दी।उन्होंने कहा कि जो भी शक्ति ईरान की दृढ़ इच्छाशक्ति और संप्रभुता के सामने खड़ी होगी, उसे अंततः दुनिया की नजरों में पतन और विघटन का सामना करना पड़ेगा।उनका कहना था कि वैश्विक शक्ति संतुलन हमेशा आधिपत्यवादी ताकतों के पक्ष में नहीं रहता। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलते शक्ति समीकरणों का प्रमाण बताया।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच बढ़ी बयानबाजी
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। हाल के संघर्ष और सैन्य गतिविधियों ने इस टकराव को और गंभीर बना दिया है।ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई भी पहले चेतावनी दे चुके हैं कि अमेरिका की ओर से दोबारा आक्रामक कार्रवाई होने पर ईरान व्यापक जवाब देगा। उन्होंने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है।ऐसे माहौल में ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता का ताजा बयान दोनों देशों के बीच जारी तल्खी को दर्शाता है। फिलहाल अमेरिका की ओर से इस विशेष चेतावनी का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर होने वाली गतिविधियां पश्चिम एशिया की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगी।
Tags: