लेबनान में हथियारों के जखीरे और ईरान के पेट्रोकेमिकल ठिकानों को आईडीएफ ने बनाया निशाना
Delhi दिल्ली। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने दक्षिणी लेबनान और ईरान में बड़े सैन्य और रणनीतिक कदम उठाने का दावा किया है। दक्षिणी लेबनान में आईडीएफ ने जमीन के नीचे बने ठिकानों का पता लगाकर हथियारों और विस्फोटक उपकरणों का जखीरा बरामद किया। ईरान में उनके हमलों ने देश के दो सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्सों को निशाना बनाया, जिससे पेट्रोकेमिकल निर्यात क्षमता में भारी बाधा आई और मिसाइल निर्माण उद्योग पर असर पड़ा।
इजरायल डिफेंस फोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में कहा, "दक्षिणी लेबनान में आईडीएफ सैनिकों ने जमीन के नीचे बने रहने के ठिकाने खोज निकाले, और वहां से मिलिट्री वेस्ट, आरपीजी रॉकेट, विस्फोटक उपकरण, और यूएनएचसीआर संगठन का झंडा बरामद किया। इसके अलावा सैनिकों ने हथियारों के कई जखीरे भी खोज निकाले, जिनमें एके-47 राइफलें, आरपीजी लॉन्चर और स्नाइपर राइफलें शामिल थीं।'
इजरायल डिफेंस फोर्स ने दावा किया कि ईरान का सबसे बड़ा पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, जो विस्फोटक बनाने के लिए जरूरी केमिकल सामग्री के उत्पादन और निर्यात के लिए जिम्मेदार था, उसे तबाह कर दिया गया है। इस हमले के साथ आईडीएफ ने अब ईरान के दो सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया है, जिससे ईरान की 85 प्रतिशत से ज़्यादा पेट्रोकेमिकल निर्यात क्षमता ठप हो गई है। इस इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान से उस मिसाइल उद्योग के लिए जरूरी पुर्जे बनाने की शासन की क्षमता में रुकावट आएगी, जिसका मकसद इजरायल और मध्य-पूर्व के दूसरे देशों को निशाना बनाना है।
इससे पहले इजरायली प्रधानमंत्री ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में कहा, ''हमने ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट को नष्ट कर दिया। इसका मतलब है कि हम आईआरजीसी की 'पैसे की मशीन' को सुनियोजित तरीके से खत्म कर रहे हैं। हम फैक्ट्रियों को तबाह कर रहे हैं, गुर्गों को खत्म कर रहे हैं और हम उनके वरिष्ठ अधिकारियों को भी लगातार खत्म कर रहे हैं।' आईडीएफ ने बताया कि तेहरान के तीन हवाई अड्डों बहराम, मेहराबाद और आजमायेश पर विमानों और हेलीकॉप्टरों सहित कई हवाई संसाधन, साथ ही अतिरिक्त सैन्य बुनियादी ढांचा मौजूद था। मेहराबाद हवाई अड्डे का इस्तेमाल आईआरजीसी की फोर्स की ओर से किया जाता था। यह मध्य पूर्व में शासन के लड़ाकों को हथियार और वित्तीय सहायता मुहैया कराने के लिए एक केंद्रीय केंद्र के रूप में कार्य करता था।