ताइपे। ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई ने अमेरिका और चीन के बीच बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशों का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही ऐतिहासिक तथ्यों और ताइवान के लोगों के अस्तित्व के अधिकार का सम्मान भी होना चाहिए। राष्ट्रपति लाई ने स्पष्ट किया कि ताइवान किसी दूसरे देश की अधीनता स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने चीन की ओर से लगातार बढ़ रहे दबाव के बीच ताइवान की रक्षा तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के फैसले का भी समर्थन किया।10 अक्टूबर को ताइवान के 'डबल टेन नेशनल डे' समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति विलियम लाई ने अमेरिका और चीन के संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और ताइवान की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ताइपे उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है, जिनका उद्देश्य वाशिंगटन और बीजिंग के बीच सैन्य टकराव की आशंका को कम करना है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि शांति की कोशिशों के दौरान ऐतिहासिक घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
अमेरिका और चीन के बीच बातचीत का स्वागत
राष्ट्रपति विलियम लाई ने अपने संबोधन में अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम करने के लिए किए जा रहे संवाद के प्रयासों को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत से क्षेत्र में सैन्य टकराव के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।लाई ने स्पष्ट किया कि ताइवान क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि ताइपे ऐसी पहलों का समर्थन करता है, जिनसे वाशिंगटन और बीजिंग के बीच मतभेदों को बातचीत के माध्यम से कम किया जा सके।उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि ताइवान अमेरिका और चीन के बीच संवाद का विरोध नहीं करता, बल्कि ऐसी बातचीत को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानता है। हालांकि, राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी शांति प्रक्रिया में ताइवान के लोगों के अधिकारों और ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
ताइवान किसी की अधीनता स्वीकार नहीं करेगा
राष्ट्रपति विलियम लाई ने अपने भाषण में ताइवान की स्थिति को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ताइवान किसी अन्य शक्ति के अधीन रहना स्वीकार नहीं करेगा।उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय शांति का आधार ऐतिहासिक तथ्यों की सही समझ और ताइवान के लोगों के अस्तित्व के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।लाई ने दूसरे विश्व युद्ध से संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिशों के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इतिहास की सही व्याख्या शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है।ताइवान के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब चीन और ताइवान के बीच राजनीतिक तथा सुरक्षा संबंधी मतभेद बने हुए हैं। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान में अपनी निर्वाचित सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था है।
दूसरे विश्व युद्ध के इतिहास पर दिया जोर
राष्ट्रपति लाई ने अपने संबोधन में दूसरे विश्व युद्ध के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के प्रयासों को लेकर चिंता जताई।उनका कहना था कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए इतिहास को सही तरीके से समझना जरूरी है। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों के सम्मान को ताइवान के लोगों के अधिकारों से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।लाई ने कहा कि ताइवान के अस्तित्व के अधिकार का सम्मान किए बिना क्षेत्र में स्थायी शांति की कल्पना नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, किसी भी प्रकार के संवाद और तनाव कम करने के प्रयासों में इस सिद्धांत को महत्व दिया जाना चाहिए।
रक्षा खर्च बढ़ाने के फैसले का किया बचाव
राष्ट्रपति विलियम लाई ने ताइवान के बढ़ते रक्षा खर्च को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि द्वीप की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना आवश्यक है और इसी उद्देश्य से रक्षा क्षमताओं में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।लाई ने स्पष्ट किया कि ताइवान की रक्षा तैयारियों का उद्देश्य चीन को उकसाना नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा करने की क्षमता को बेहतर बनाना है।उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों और नागरिकों के बीच सहयोग बढ़ाकर ताइवान की समग्र सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया जा रहा है। इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों का मुख्य उद्देश्य किसी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना है।राष्ट्रपति ने रक्षा खर्च में बढ़ोतरी को ताइवान की सुरक्षा आवश्यकताओं से जुड़ा कदम बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना ताइवान की प्राथमिकता है।
चीन के 'ग्रे जोन' दबाव का किया जिक्र
विलियम लाई ने चीन की ओर से लगातार बनाए जा रहे 'ग्रे जोन' दबाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ताइवान इस प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी समग्र क्षमता को मजबूत कर रहा है।'ग्रे जोन' दबाव से आशय ऐसी गतिविधियों से है, जो सीधे युद्ध की स्थिति पैदा किए बिना किसी क्षेत्र या देश पर दबाव बनाने के लिए की जाती हैं। इनमें सैन्य गतिविधियां, साइबर हमले और अन्य प्रकार की दबावपूर्ण कार्रवाइयां शामिल हो सकती हैं।राष्ट्रपति लाई ने कहा कि इन चुनौतियों को देखते हुए सरकारी संस्थानों और नागरिकों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि ताइवान अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करके अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा संबंधी प्रयासों को किसी दूसरे देश के खिलाफ उकसावे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर ताइवान का जोर
राष्ट्रपति विलियम लाई ने अपने संबोधन में दो प्रमुख बातों पर जोर दिया। पहली, अमेरिका और चीन के बीच बातचीत के माध्यम से तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन करना और दूसरी, ताइवान की सुरक्षा तथा उसके लोगों के अधिकारों की रक्षा करना।उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ऐतिहासिक तथ्यों और ताइवान के अस्तित्व के अधिकार का सम्मान भी जरूरी है।10 अक्टूबर के राष्ट्रीय दिवस समारोह में दिए गए उनके संबोधन ने ताइवान की सुरक्षा नीति और क्षेत्रीय शांति को लेकर सरकार का रुख सामने रखा है। राष्ट्रपति ने यह संदेश दिया कि ताइवान बातचीत और शांति के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा, लेकिन अपनी सुरक्षा और सांस्कृतिक तथा राजनीतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष बनाए रखेगा।
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