वॉशिंगटन: भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर को नौ महीने तक अंतरिक्ष में रहने के बावजूद कोई अतिरिक्त वेतन नहीं मिलेगा। नासा के नियमों के तहत, अंतरिक्ष में बिताया गया समय ‘ओवरटाइम’ की श्रेणी में नहीं आता, जिससे दोनों को केवल तयशुदा वेतन ही मिलेगा।
क्या है पूरा मामला?
सुनीता और बुच को मई 2024 में नासा और बोइंग के संयुक्त मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) भेजा गया था। यह मिशन केवल कुछ हफ्तों के लिए था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उनकी वापसी में लगातार देरी होती रही और वे नौ महीने तक अंतरिक्ष में फंसे रहे।
नासा का सख्त नियम
नासा के नियमों के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्री एक फिक्स्ड सैलरी पर काम करते हैं, जिसमें अतिरिक्त भत्ते नहीं जोड़े जाते। भले ही वे तय समय से ज्यादा स्पेस में रहें, लेकिन उन्हें कोई ओवरटाइम पेमेंट नहीं दिया जाता।
नासा के एक अधिकारी ने कहा, "अंतरिक्ष में मिशन के दौरान वेतन तय नियमों के अनुसार दिया जाता है। यहां कोई ओवरटाइम की सुविधा नहीं है, चाहे मिशन जितना भी लंबा हो जाए।"
कड़ी मेहनत, लेकिन कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं
सुनीता और बुच ने लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक शोध और तकनीकी कार्य किए। इतने लंबे समय तक स्पेस में रहने के बावजूद उन्हें केवल उनके कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से ही भुगतान मिलेगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अंतरिक्ष जगत से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम थोड़ा सख्त है क्योंकि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, नासा का यह नियम लंबे समय से चला आ रहा है और इसमें बदलाव की संभावना कम है।
क्या आगे बदलाव संभव?
हालांकि अभी तक नासा ने इस नियम को बदलने का कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन भविष्य में प्राइवेट स्पेस कंपनियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह बहस छिड़ सकती है कि लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए अलग तरह की वेतन प्रणाली लागू की जाए।