ईरान ने मोसाद के लिए जासूसी के दोषी दो लोगों को दी फांसी

Update: 2026-08-03 14:49 GMT

तेहरान: ईरान ने सोमवार को दो लोगों को फांसी दे दी। इन पर आरोप था कि हाल की सैन्य झड़पों के दौरान उन्होंने विदेशी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील जानकारी दी थी, जिससे इज़राइल को हमले के लिए सटीक टारगेट चुनने में मदद मिली।

फार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, फांसी दिए गए लोगों की पहचान ओमिद बेहज़ाद और पूरिया सफ़वत के तौर पर हुई है। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों इज़राइल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' के लिए काम करते थे। इन्होंने तेहरान और तेल अवीव के बीच जून में हुई "12-दिन की लड़ाई" और ईरान, इज़राइल व अमेरिका के बीच हुए सैन्य संघर्ष "रमज़ान युद्ध" के दौरान मोसाद के लिए काम किया था।

फार्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन लोगों ने सैन्य और सुरक्षा केंद्रों की तस्वीरें, सटीक भौगोलिक लोकेशन (कोऑर्डिनेट्स) और ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी मोसाद के हैंडलर्स और उनसे जुड़े नेटवर्क को भेजी थी, जिससे उन ठिकानों पर टारगेटेड हमले करना आसान हो गया।

मुकदमे के दौरान पेश किए गए सबूतों में आरोपियों और इज़राइली खुफिया एजेंसी के बीच हुए बातचीत के रिकॉर्ड शामिल थे।

फार्स ने बताया कि एक मैसेज में आरोपियों में से एक ने हैंडलर को सीधे लिखा, "मेरे पास इस केंद्र से ड्रोन या फाइटर जेट पर फायरिंग का वीडियो भी है, लेकिन इंटरनेट कमजोर है और यह सेंड नहीं हो रहा है; धन्यवाद, हज़रत मूसा के सैनिकों!"

सैन्य संघर्ष के दौरान देश के भीतर खुफिया जानकारी जुटाने वाले नेटवर्क पर नकेल कसने की ईरानी सुरक्षा एजेंसियों की कोशिशों के तहत ये फांसी दी गई हैं।

इससे पहले जनवरी में, ईरान ने इज़राइल की मोसाद के लिए जासूसी करने के दोषी पाए गए एक व्यक्ति को फांसी दी थी। एबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को जारी सरकारी मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी दी गई।

सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने उस व्यक्ति का नाम अली अर्देस्तानी बताया। एजेंसी के अनुसार, उसने पैसे (जो कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में दिए गए थे) के बदले मोसाद के लोगों को गोपनीय जानकारी दी थी।

IRNA ने कहा कि अर्देस्तानी ने जासूसी के आरोप स्वीकार कर लिए थे और उसे उम्मीद थी कि उसे इनाम के तौर पर दस लाख डॉलर और ब्रिटिश वीज़ा मिलेगा।

एजेंसी ने उसे "इज़राइल का खास एजेंट" बताया और कहा कि उसने मोसाद को संवेदनशील जगहों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, अर्देस्तानी को इज़राइल ने ऑनलाइन माध्यमों से भर्ती किया था और उसका मामला ईरान की न्यायिक प्रणाली (निचली अदालतों और सुप्रीम कोर्ट दोनों) से होकर गुज़रा।

'द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल' की रिपोर्ट के मुताबिक, मानवाधिकार समूहों और पश्चिमी सरकारों ने ईरान द्वारा मौत की सज़ा के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की आलोचना की है, खासकर राजनीतिक गतिविधियों और जासूसी से जुड़े मामलों में। कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई लोगों को ज़बरदस्ती कबूलनामे के आधार पर दोषी ठहराया गया है और अक्सर मुक़दमे बंद दरवाज़ों के पीछे चलाए जाते हैं, जहाँ स्वतंत्र कानूनी सलाह नहीं मिल पाती। हालाँकि, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों को फाँसी दी गई, वे "दुश्मन खुफिया एजेंसियों के एजेंट" थे और आतंकवाद या तोड़-फोड़ की गतिविधियों में शामिल थे।

नॉर्वे स्थित संगठन 'ईरान ह्यूमन राइट्स' ने बताया कि ईरान ने 2025 में कम से कम 1,500 लोगों को फाँसी दी। संगठन ने फाँसी की सज़ा के इस्तेमाल में हुई इस बढ़ोतरी को "अभूतपूर्व" बताया है।

'द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल' की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के डायरेक्टर महमूद अमीरी-मोगद्दम ने कहा, "हमने पिछले 35 सालों में ऐसी संख्या कभी नहीं देखी।"

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