दवा आयात पर सख्ती, अमेरिका का बड़ा टैरिफ फैसला

Update: 2026-07-23 10:16 GMT

Washington वॉशिंगटन, 23 जुलाई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अगस्त 2028 से आयातित जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद ऐसी फार्मास्युटिकल दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग को देश के भीतर (ऑनशोरिंग) लाना है।

इस कदम से भारत पर असर पड़ सकता है, जो अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि 1 अगस्त से, अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर दो साल तक ज़ीरो परसेंट टैरिफ लागू रहेगा। इसके बाद, एक साल के लिए इसे बढ़ाकर 100 परसेंट और उसके बाद 200 परसेंट कर दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा, "1 अगस्त, 2026 से, अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर दो साल तक ज़ीरो परसेंट टैरिफ लागू रहेगा। इसके बाद, एक साल के लिए टैरिफ बढ़ाकर 100 परसेंट और उसके बाद 200 परसेंट कर दिया जाएगा।"

ट्रंप ने कहा, "यह कदम जेनेरिक फार्मास्युटिकल प्रोडक्शन को अमेरिका में वापस लाने (रीशोर) के लिए उठाया गया है। जो कंपनियाँ तय समय-सीमा के भीतर प्लांट और इक्विपमेंट नहीं बनाएंगी, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।" राष्ट्रपति ने कहा कि इस पॉलिसी का मकसद अमेरिकी लोगों की सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा, "पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर बनी पॉलिसी, जो बहुत सफल रही है, वैसी ही बनी रहेगी।" भारत को अक्सर दुनिया की 'फार्मेसी' कहा जाता है, क्योंकि यह दुनिया भर के देशों को जेनेरिक दवाएँ सप्लाई करता है।

'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' के अनुसार, 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 बिलियन डॉलर की फार्मास्युटिकल दवाएँ निर्यात कीं। यह भारत के कुल 25.8 बिलियन डॉलर के ग्लोबल फार्मा निर्यात का 38 परसेंट था। भारतीय जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हाइपरटेंशन, डायबिटीज, कैंसर, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के इलाज में किया जाता है।

ट्रंप की यह घोषणा अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर के 'न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए गए उस इंटरव्यू के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका और टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है ताकि उन लेवी (शुल्क) को फिर से लागू किया जा सके जिन्हें इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। ट्रंप प्रशासन भारत समेत करीब 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक नए टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। इसके पीछे जबरन मज़दूरी कराने और अनुचित व्यापार नीतियों की जांच का हवाला दिया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रमुख ने कहा कि यह टैरिफ नीति पूरी तरह से आर्थिक नज़रिए से तय की गई है, न कि विदेश नीति के नज़रिए से। उन्होंने कहा, "यह विदेश नीति का विभाग नहीं है, बल्कि अर्थशास्त्र का विभाग है। इसलिए, जब मैं यूरोपीय संघ जैसे किसी संगठन को देखता हूं जो बेतुके और अवैज्ञानिक कारणों से अमेरिकी कृषि उत्पादों पर रोक लगाता है, तो यह एक समस्या है। चाहे दोस्त हो या दुश्मन, यह एक मुद्दा है।" उन्होंने यह बात एक सवाल के जवाब में कही कि यह टैरिफ नीति पारंपरिक सहयोगियों के लिए कठोर है।

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