MANILA: मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से 5,400 से अधिक फिलिपिनो नाविक खाड़ी क्षेत्र में फंस गए हैं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग माना जाता है और इसके बंद होने से समुद्री परिवहन पर व्यापक असर पड़ा है।
अधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस मार्ग के बंद होने के कारण कई जहाज अपनी निर्धारित दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे हजारों फिलिपिनो नाविकों की स्थिति प्रभावित हुई है। ये नाविक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के जहाजों पर तैनात हैं और अब उनकी आवाजाही और कामकाज पर रोक लग गई है।
फिलिपींस सरकार ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। अधिकारियों ने बताया कि नाविकों के लिए जरूरी सहायता और संपर्क बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित एजेंसियां खाड़ी देशों और शिपिंग कंपनियों के साथ समन्वय कर रही हैं ताकि फंसे हुए नाविकों की स्थिति को जल्द सामान्य किया जा सके।
समुद्री विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। यह मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से रोजाना बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। ऐसे में इसका बंद होना न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय है।
फंसे हुए नाविकों के परिवारों ने भी चिंता व्यक्त की है। कई परिवारों ने सरकार से अपील की है कि उनके प्रियजनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन्हें जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
अधिकारियों के अनुसार, इस स्थिति को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फिलिपींस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह संबंधित देशों के साथ मिलकर समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले नाविकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। लंबे समय तक समुद्र में फंसे रहने से उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे हालात में नाविकों के लिए उचित सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
वैश्विक स्तर पर इस घटनाक्रम का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या में कमी आने से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।