नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टीन के कार्यवाहक राष्ट्राध्यक्ष और वंशानुगत राजकुमार प्रिंस एलॉइस के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत और लिकटेंस्टीन के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इस दौरान भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) के महत्व को रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
हैदराबाद हाउस में हुई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रिंस एलॉइस के बीच हुई बैठक में आर्थिक सहयोग के साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश के अतिरिक्त अनुसंधान, अत्याधुनिक तकनीक और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रिंस एलॉइस की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को नई गति देने का अवसर है। विशेष रूप से भारत-EFTA व्यापार समझौते के लागू होने के बाद आर्थिक संबंधों में विस्तार की नई संभावनाएं पैदा हुई हैं।
भारत-EFTA समझौते को बताया महत्वपूर्ण उपलब्धि
प्रिंस एलॉइस ने भारत के साथ व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते को द्विपक्षीय संबंधों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।भारत और EFTA के बीच यह समझौता अक्टूबर 2025 में लागू हुआ था। EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।समझौते का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना, बाजार तक पहुंच बढ़ाना और निवेश एवं आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करना है।फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और प्रिंस एलॉइस के बीच हुई पिछली बैठक में भी इस समझौते की सराहना की गई थी। दोनों नेताओं ने विश्वास जताया था कि इससे भारत और लिकटेंस्टीन के आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी।
भारत में 100 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
भारत-EFTA व्यापार समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है।इस समझौते से भारत में विनिर्माण, आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार आधारित उद्योगों में नए अवसर मिलने की उम्मीद है।हालांकि, 100 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता पूरे EFTA समूह से संबंधित है, केवल लिकटेंस्टीन से नहीं।दोनों देशों के बीच उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
राष्ट्रपति भवन में प्रिंस एलॉइस का भव्य स्वागत
भारत की राजकीय यात्रा पर पहुंचे प्रिंस एलॉइस का मंगलवार सुबह राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया।इस अवसर पर प्रिंस एलॉइस ने कहा कि उनकी यात्रा भारत और लिकटेंस्टीन के बीच संबंधों को दिए जाने वाले महत्व का प्रतीक है।उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के आमंत्रण और भारत में मिले स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। प्रिंस एलॉइस ने भारत के साथ संबंधों को और विस्तार देने की इच्छा भी जताई।उनके साथ उनकी पत्नी प्रिंसेस सोफी, वरिष्ठ अधिकारी और प्रमुख उद्योगपतियों का प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।
विदेश मंत्री जयशंकर से भी हुई मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता से पहले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी प्रिंस एलॉइस से मुलाकात की।जयशंकर ने कहा कि भारत और लिकटेंस्टीन की साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही है।उन्होंने भारत-EFTA व्यापार समझौते से पैदा हुए अवसरों का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर जोर दिया।बैठक में निवेश, नवाचार, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
2026 में प्रिंस एलॉइस की दूसरी भारत यात्रा
यह वर्ष 2026 में प्रिंस एलॉइस की दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले वे फरवरी में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में शामिल होने नई दिल्ली आए थे।उस दौरान भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी और आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर सहमति जताई थी।प्रिंस एलॉइस इससे पहले 2010 और 2018 में भी भारत का दौरा कर चुके हैं।मंगलवार को उन्होंने अपनी पत्नी के साथ राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मिलेगी नई दिशा
भारत और लिकटेंस्टीन के बीच बढ़ता सहयोग दोनों देशों के आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।भारत अपने बड़े बाजार, कुशल मानव संसाधन और विकसित होते तकनीकी उद्योगों के कारण निवेश के अवसर प्रदान करता है। वहीं, लिकटेंस्टीन उन्नत विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं और नवाचार आधारित उद्योगों में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।प्रधानमंत्री मोदी और प्रिंस एलॉइस की बैठक से व्यापार, अनुसंधान, तकनीकी विकास और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।दोनों देशों ने आपसी हितों पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने तथा वैश्विक चुनौतियों पर संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
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