जलप्रलय से जूझ रहे नेपाल को बड़ी मदद राहत के लिए आगे आए कई देश
चीन अमेरिका और वर्ल्ड बैंक ने बढ़ाया हाथ
काठमांडू : नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद का सिलसिला तेज हो गया है। भीषण जलप्रलय से प्रभावित नेपाल के लिए भारत के बाद चीन, अमेरिका और विश्व बैंक भी सहायता के लिए आगे आए हैं। राहत, बचाव और पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग के लिए कई देशों और संस्थानों ने मदद की पेशकश की है।
नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और मलबे के सैलाब में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा में सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और कई बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है।
भारत ने भेजी राहत सहायता
नेपाल की मदद के लिए सबसे पहले भारत सक्रिय हुआ। भारत ने राहत सामग्री और जरूरी सहायता भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके साथ ही नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद और उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। भारत सरकार ने नेपाल प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर राहत और बचाव अभियान में सहयोग का भरोसा दिया है। प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।
चीन और अमेरिका भी आए आगे
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा के बाद चीन ने भी सहायता की पेशकश की है। सीमा क्षेत्र प्रभावित होने के कारण चीन की ओर से भी राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग की तैयारी की जा रही है। वहीं अमेरिका समेत अन्य देशों ने भी नेपाल में हुए नुकसान पर चिंता जताई है और मानवीय सहायता के लिए समर्थन देने की बात कही है। प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ रहा है।
वर्ल्ड बैंक देगा 25 अरब नेपाली रुपये तक की सहायता
विश्व बैंक ने बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए बड़ी आर्थिक मदद का ऐलान किया है। बैंक की ओर से आपातकालीन राहत, बचाव और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए करीब 25 अरब नेपाली रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इस सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की मरम्मत, राहत कार्यों और पुनर्वास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल में सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं। खराब मौसम, टूटी सड़कों और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण बचाव कार्यों में कठिनाइयां आ रही हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते जलवायु जोखिम और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब नेपाल को राहत के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की जरूरत होगी।