नेपाल में जल प्रलय से हाहाकार: 160 मौतें 750 से अधिक लापता...हमारे लिए एक राहत वाली खबर भी आई
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नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने रसुवा और नुवाकोट में भारी तबाही मचाई. भोटेकोशी और दूसरी नदियों में अचानक बढ़े पानी और मलबे ने घरों, सड़कों, पुलों और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनी चपेट में ले लिया. इस तबाही के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उत्तर प्रदेश और बिहार को लेकर है, क्योंकि नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का सीधा असर इन दोनों राज्यों पर पड़ सकता है. इस बीच नेपाल से एक राहत वाली खबर आई है.
नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन ने कहा है कि रसुवा या नुवाकोट में एक और बड़ी और विनाशकारी बाढ़ आने की कोई विश्वसनीय जानकारी फिलहाल नहीं है. विभाग के मुताबिक बारिश के कारण नदियों का जलस्तर थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन अभी किसी दूसरी बड़ी बाढ़ का संकेत नहीं मिला है. लोगों से बिना पुष्टि के खबरों और अफवाहों पर भरोसा नहीं करने को कहा गया है. अगर किसी बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा होता है तो इसकी जानकारी आधिकारिक चैनलों और जरूरत पड़ने पर SMS अलर्ट के जरिए दी जाएगी.
नेपाल की इस ताजा जानकारी से निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार को कुछ राहत मिली है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों राज्यों से बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है. नेपाल में बारिश जारी रहने पर नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और उसका असर सीमा से लगे भारतीय इलाकों में दिखाई दे सकता है.
खास तौर पर बिहार में गंडक नदी को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में है. नेपाल के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश होने पर गंडक का पानी तेजी से नीचे की ओर आता है. इसलिए पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और वैशाली जैसे गंडक बेसिन के जिलों में हालात पर नजर रखी जा रही है.
इसी तरह कोसी बेसिन के सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जैसे जिलों में भी नदी के जलस्तर और बारिश की स्थिति पर निगरानी जरूरी है. नेपाल से आने वाले पानी का असर इन इलाकों में जलस्तर बढ़ने के रूप में दिखाई दे सकता है.
उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से लगे इलाकों में भी प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है. खासकर महराजगंज और कुशीनगर जैसे जिलों में गंडक और दूसरी नदियों के जलस्तर को लेकर निगरानी की जा रही है. हालांकि फिलहाल नेपाल की ओर से किसी नई विनाशकारी बाढ़ का संकेत नहीं मिलने से तत्काल बड़े खतरे की आशंका कम हुई है. लेकिन पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है. इसलिए नेपाल में बारिश और वहां की नदियों के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रखना बेहद जरूरी है.
सबसे अहम बात यह है कि नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने दूसरी बड़ी बाढ़ को लेकर कोई विश्वसनीय अलर्ट जारी नहीं किया है. यानी फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है कि नेपाल से एक और बड़ा सैलाब UP-बिहार की तरफ बढ़ रहा हो. हालांकि बारिश के कारण नदी का जलस्तर थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है. ऐसे में लोगों को सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने और सिर्फ सरकारी एजेंसियों की जानकारी पर भरोसा करने की सलाह दी गई है.