मॉस्को। रूस और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के बीच बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। रूस ने चार साल से अधिक समय से हिरासत में रखे गए अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड को रिहा कर दिया है। यह रिहाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की रूस के सेंट पीटर्सबर्ग यात्रा के दौरान हुई। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, 74 वर्षीय हबर्ड अमेरिका के मिशिगन राज्य के रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने उन्हें गलत तरीके से हिरासत में लिया गया नागरिक घोषित किया था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वयं उनकी रिहाई की जानकारी दी।
पुतिन ने अमेरिकी विशेष दूत को दी रिहाई की जानकारी
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात के दौरान स्टीफन हबर्ड की रिहाई की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि हबर्ड को रूसी हिरासत से मुक्त कर दिया गया है और वह सेंट पीटर्सबर्ग के पुल्कोवो हवाई अड्डे पर मौजूद हैं।अमेरिकी विशेष दूत विटकॉफ ने इस फैसले के लिए राष्ट्रपति पुतिन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हबर्ड की रिहाई से उनके परिवार के पास लौटने का रास्ता खुल गया है।हबर्ड की रिहाई को रूस और अमेरिका के बीच चल रही उच्चस्तरीय बातचीत के एक महत्वपूर्ण परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन के सामने उठाया था मामला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को बताया था कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत में स्टीफन हबर्ड की हिरासत का मुद्दा उठाया था।ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने पुतिन से हबर्ड को रिहा करने का अनुरोध किया है। इसके एक दिन बाद रूस की ओर से उनकी रिहाई की घोषणा सामने आई।विटकॉफ की रूस यात्रा से पहले एक अमेरिकी अधिकारी ने भी संकेत दिया था कि इस दौरे के दौरान हबर्ड की रिहाई सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे।अमेरिकी प्रशासन ने इस मामले को विदेशों में हिरासत में रखे गए अपने नागरिकों को स्वदेश वापस लाने की नीति से जोड़ा था।
कौन हैं अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड?
स्टीफन हबर्ड अमेरिका के मिशिगन राज्य के निवासी हैं। उन्होंने अपने जीवन के कई दशक विदेशों में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में काम करते हुए बिताएवर्ष 2014 में वह पूर्वी यूक्रेन के इज़्युम शहर में रहने लगे थे। फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर सैन्य आक्रमण शुरू किए जाने के बाद इज़्युम शहर रूसी सेना के नियंत्रण में आ गया था।इसी दौरान अप्रैल 2022 में रूसी अधिकारियों ने हबर्ड को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन पर यूक्रेन की ओर से भाड़े के सैनिक के तौर पर लड़ने का आरोप लगाया गया।
रूस ने सुनाई थी करीब सात साल की सजा
रूसी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि हबर्ड ने यूक्रेनी सेना के साथ अनुबंध किया था और सैन्य गतिविधियों में हिस्सा लिया था।वर्ष 2024 में रूस की एक अदालत ने बंद कमरे में चली सुनवाई के बाद उन्हें करीब सात साल जेल की सजा सुनाई थी।हालांकि, हबर्ड के परिवार और उनके अमेरिकी वकील मार्टिन डी लूका ने इन आरोपों को खारिज किया था। वकील के अनुसार, हबर्ड ने किसी सैन्य इकाई या युद्ध अभियान में हिस्सा नहीं लिया था।अमेरिकी विदेश विभाग ने भी उनकी हिरासत को अनुचित माना था और उन्हें गलत तरीके से हिरासत में लिए गए नागरिक का दर्जा दिया था।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी जारी है बातचीत
स्टीव विटकॉफ की रूस यात्रा का उद्देश्य केवल हबर्ड की रिहाई तक सीमित नहीं था। वह रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने की संभावनाओं पर भी बातचीत करने पहुंचे थे।सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन के साथ मुलाकात से पहले विटकॉफ ने नॉर्वे में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से भी बातचीत की थी।अमेरिकी प्रशासन रूस और यूक्रेन के बीच संभावित शांति समझौते की दिशा में कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। हालांकि, युद्ध समाप्त करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
अमेरिका लौटने का रास्ता हुआ साफ
चार साल से अधिक समय तक रूसी हिरासत में रहने के बाद स्टीफन हबर्ड की रिहाई उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण राहत है।रिहाई की घोषणा के समय उनके अमेरिका पहुंचने की सटीक तारीख और यात्रा संबंधी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।इस बीच हबर्ड की रिहाई रूस और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संपर्क का एक ठोस परिणाम बनकर सामने आई है। हालांकि, दोनों देशों के व्यापक संबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े विवादों का समाधान अभी बाकी है।
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