Report: ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ अहम परमाणु समझौते को मंज़ूरी दी

Update: 2026-07-22 07:09 GMT
Washington वॉशिंगटन: 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने मंगलवार को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक अहम परमाणु समझौते को औपचारिक रूप से मंज़ूरी दे दी है। इस समझौते से सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन (enrichment) की इजाजत मिल सकती है और अमेरिकी कंपनियों के लिए अरबों डॉलर की कमाई हो सकती है।
30 साल के इस समझौते से सऊदी अरब को नागरिक परमाणु कार्यक्रम तक पहुँच मिल जाएगी। जर्नल के अनुसार, इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि विदेशी प्रतिस्पर्धियों को बाहर रखते हुए अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के उभरते परमाणु बुनियादी ढाँचे के केंद्र में रखा जा सके।
यह समझौता वॉशिंगटन और रियाद के बीच परमाणु सहयोग के बड़े विस्तार का संकेत हो सकता है। इससे मध्य पूर्व में संवेदनशील परमाणु तकनीक के प्रसार को लेकर कांग्रेस में चिंताएँ फिर से बढ़ने की भी उम्मीद है।
एक अहम प्रावधान के तहत, अमेरिकी कंपनियाँ सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन सुविधा बना सकती हैं। जर्नल के अनुसार, यह प्रोजेक्ट तभी आगे बढ़ेगा जब अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त स्टडी में यह निष्कर्ष निकले कि ऐसी सुविधा की ज़रूरत है।
यूरेनियम संवर्धन से नागरिक परमाणु रिएक्टरों के लिए ईंधन बनाया जा सकता है। इसी तकनीक का इस्तेमाल, अगर बहुत उच्च स्तर पर किया जाए, तो परमाणु हथियारों के लिए सामग्री बनाने में भी किया जा सकता है। इसी दोहरे इस्तेमाल की क्षमता के कारण संवर्धन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय परमाणु वार्ताओं के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक रहा है।
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि सीधे अमेरिकी भागीदारी से सऊदी परमाणु कार्यक्रम पर वॉशिंगटन का प्रभाव बढ़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका तर्क है कि अमेरिकी भागीदारी से परमाणु तकनीक को सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होने से रोकने में भी मदद मिलेगी।
उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस समझौते को समीक्षा के लिए कांग्रेस के सामने पेश किया जाएगा।
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने पिछले हफ़्ते के अंत में इस समझौते को मंज़ूरी दी थी। उम्मीद है कि अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान बुधवार को इस पर हस्ताक्षर करेंगे।
राइट ने अप्रैल 2025 में क्षेत्र की अपनी पहली विदेश यात्रा के दौरान अपने सऊदी समकक्ष के साथ प्रस्तावित सहयोग पर चर्चा की थी। इस समझौते से रिएक्टर निर्माण, परमाणु ईंधन सेवाओं और संबंधित बुनियादी ढाँचे से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिल सकते हैं।
सऊदी अरब तेल के अलावा अपने ऊर्जा मिश्रण और अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश के तहत नागरिक परमाणु ऊर्जा विकसित करना चाहता है। सऊदी अरब का यह भी तर्क है कि परमाणु ऊर्जा से घरेलू बिजली की बढ़ती माँग को पूरा करने और निर्यात के लिए ज़्यादा तेल बचाने में मदद मिल सकती है।
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