नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 25वीं शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क परियोजनाओं को लेकर भारत का स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संपर्क बढ़ाने वाली सभी परियोजनाएं आपसी परामर्श, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। इन सिद्धांतों की अनदेखी करके शुरू की गई परियोजनाएं लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं।रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, राजनाथ सिंह ने सदस्य देशों से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और साझा आर्थिक समृद्धि के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने आतंकवाद को शांति और विकास के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके पूरे तंत्र को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता जताई।
आतंकवाद पर दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आतंकवाद के कारण निर्दोष लोगों की जान जाती है और निवेश तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।उन्होंने कहा कि आतंकवाद समाज में कट्टरता को बढ़ावा देता है और युवाओं को उन अवसरों से वंचित करता है, जिनके वे हकदार हैं। आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने के मामले में किसी प्रकार का दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए। आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने वालों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।उन्होंने SCO सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की।
संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी
रक्षा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय संपर्क परियोजनाओं को लेकर कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।उन्होंने जोर देकर कहा कि संपर्क परियोजनाओं का उद्देश्य देशों को आर्थिक रूप से जोड़ना, व्यापार को आसान बनाना और विकास के नए अवसर पैदा करना होना चाहिए।भारत ऐसी परियोजनाओं का समर्थन करता है, जो संबंधित देशों की सहमति और आपसी सम्मान के आधार पर विकसित की जाती हैं। उन्होंने कहा कि इन मूलभूत सिद्धांतों का पालन नहीं करने वाली परियोजनाएं दीर्घकालिक सफलता हासिल नहीं कर सकतीं।
चाबहार बंदरगाह और परिवहन गलियारे का किया उल्लेख
राजनाथ सिंह ने क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और ईरान के चाबहार बंदरगाह का विशेष उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं मध्य एशियाई देशों को बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।इन संपर्क मार्गों के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने, परिवहन सुविधाओं में सुधार होने और आर्थिक सहयोग के नए अवसर पैदा होने की संभावनाएं हैं।भारत लंबे समय से मध्य एशिया के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर देता रहा है।
SCO को व्यावहारिक परिणामों पर देना होगा ध्यान
रक्षा मंत्री ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन को संप्रभु समानता, आम सहमति और पारस्परिक सम्मान के सिद्धांतों पर काम करना चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नए संस्थान या व्यवस्थाएं बनाने से बेहतर परिणाम मिलने की गारंटी नहीं होती। किसी भी नई व्यवस्था का उद्देश्य सदस्य देशों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करना होना चाहिए।राजनाथ सिंह ने कहा कि अनावश्यक दोहराव से बचते हुए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिनसे सदस्य देशों को प्रत्यक्ष और व्यावहारिक लाभ मिल सके।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश का किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने SCO के पिछले शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुरक्षा, संपर्क और अवसरों को लेकर रखे गए विचारों का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि संगठन को इन प्रमुख क्षेत्रों में ठोस और प्रभावी कदम उठाने की दिशा में काम करना चाहिए।भारत का मानना है कि आर्थिक सहयोग समावेशी होना चाहिए और इसका लाभ सभी सदस्य देशों को मिलना चाहिए।दुशांबे में आयोजित इस बैठक में व्यापार, निवेश, नवाचार, संपर्क सुविधाओं और आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और साझा समृद्धि के लिए आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई तथा सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान आवश्यक है।