कपड़ा श्रमिकों के प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक साजिश? गृह मंत्री ने खोली पोल
ढाका। बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन लगातार गंभीर होता जा रहा है। न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाने समेत कई मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे श्रमिकों के प्रदर्शन के बीच अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया है कि देश में कपड़ा उद्योग से जुड़े कुछ पूर्व फैक्ट्री मालिक, जिनके संबंध प्रतिबंधित अवामी लीग से रहे हैं, श्रमिकों के आंदोलन का इस्तेमाल करके औद्योगिक क्षेत्रों में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।गृह मंत्री के मुताबिक, इन लोगों में कुछ पूर्व सांसद, मंत्री और राज्य मंत्री भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उद्योगपति जानबूझकर फैक्ट्रियां बंद कर रहे हैं, ताकि श्रमिकों के बीच असंतोष बढ़े और देश में अस्थिरता पैदा हो। उन्होंने चेतावनी दी कि श्रमिक आंदोलन की आड़ में हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सलाहुद्दीन अहमद ने यह बयान 2 नवंबर 2026 को ढाका स्थित सचिवालय में कपड़ा उद्योग के संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद दिया।
अवामी लीग से जुड़े उद्योगपतियों पर लगाए आरोप
गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) और बांग्लादेश निटवियर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BKMEA) के नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में कपड़ा श्रमिकों के प्रदर्शन, फैक्ट्रियों के बंद होने और औद्योगिक क्षेत्रों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चर्चा हुई।बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में गृह मंत्री ने कहा कि सरकार के पास ऐसी जानकारी है कि कुछ उद्योगपति मौजूदा अशांति को बढ़ावा देने में शामिल हैं। इनमें ऐसे लोग भी हैं, जिनकी राजनीतिक पहचान प्रतिबंधित अवामी लीग से जुड़ी रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग अलग-अलग समय पर सांसद, मंत्री और राज्य मंत्री रह चुके हैं।मंत्री ने कहा कि सरकार ने हिंसक घटनाओं से जुड़े वीडियो फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और दूसरे सबूत जुटाए हैं। कुछ लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और श्रमिकों के हितों के खिलाफ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, ये आरोप सरकार की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित उद्योगपतियों की ओर से इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
30 हजार टका न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन
बांग्लादेश में कपड़ा श्रमिक पिछले कई दिनों से न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। श्रमिकों की प्रमुख मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन मौजूदा 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका किया जाए। उनका कहना है कि महंगाई के कारण घर का किराया, भोजन, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च लगातार बढ़ रहा है। मौजूदा वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।श्रमिकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के अनुपात में उनकी आय में वृद्धि नहीं हुई है। इसलिए वेतन में पर्याप्त बढ़ोतरी जरूरी है। इसके अलावा प्रदर्शनकारी श्रमिकों की अन्य मांगों में ब्लैकलिस्ट किए गए कर्मचारियों का नाम हटाना और नौकरी से निकाले गए श्रमिकों को दोबारा काम पर रखना शामिल है।1 नवंबर को ढाका के मीरपुर, सावर-अशुलिया, गाजीपुर और टंगाइल समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई जगहों पर सड़क और राजमार्ग जाम किए गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। कुछ स्थानों पर वाहनों और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएं सामने आईं। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
529 फैक्ट्रियों में घोषित करनी पड़ी छुट्टी
श्रमिकों के आंदोलन का असर बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा है। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) की स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, 1 नवंबर को मीरपुर, सावर-अशुलिया, गाजीपुर और मयमनसिंह क्षेत्रों में कम से कम 529 कपड़ा फैक्ट्रियों ने छुट्टी घोषित कर दी थी।इससे लाखों श्रमिकों का काम प्रभावित हुआ। उद्योग संगठन ने आशंका जताई कि यदि प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रहता है तो उत्पादन और निर्यात की समयसीमा पर असर पड़ सकता है। बांग्लादेश का रेडीमेड गारमेंट उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह उद्योग देश के कुल निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रदान करता है और लगभग 40 लाख लोगों को रोजगार देता है।हालांकि, 2 नवंबर को कुछ फैक्ट्रियां दोबारा खुल गईं। गृह मंत्री ने बताया कि गाजीपुर और कालियाकैर की कुछ इकाइयों ने काम शुरू कर दिया है, जबकि कुछ फैक्ट्रियां आर्थिक कठिनाइयों और निर्यात ऑर्डर में कमी के कारण अभी बंद हैं।
सरकार ने बनाया छह सदस्यीय वेतन बोर्ड
श्रमिकों की वेतन बढ़ाने की मांग को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने 1 नवंबर को छह सदस्यीय न्यूनतम वेतन बोर्ड का गठन किया। इस बोर्ड में श्रमिकों, फैक्ट्री मालिकों, सरकार और एक स्वतंत्र सदस्य का प्रतिनिधित्व शामिल किया गया है। बोर्ड का उद्देश्य कपड़ा श्रमिकों के लिए नई न्यूनतम वेतन संरचना की समीक्षा करना और सिफारिशें तैयार करना है।गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बताया कि सरकार श्रमिकों की मांगों को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वेतन निर्धारण के दौरान श्रमिकों के हितों और उनके जीवन स्तर को ध्यान में रखा जाए।मंत्री के अनुसार, मौजूदा वेतन समीक्षा की तीन साल की अवधि दिसंबर में समाप्त हो रही है। ऐसे में नई वेतन संरचना पर चर्चा की जा रही है। सरकार चाहती है कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाए और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
19 लोगों की गिरफ्तारी से बढ़ा राजनीतिक विवाद
प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में पुलिस ने 1 नवंबर को ढाका के मीरपुर इलाके से 19 लोगों को हिरासत में लिया। बांग्लादेश संगबाद संस्था (BSS) की रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में प्रतिबंधित अवामी लीग और उससे जुड़े छात्र संगठन छत्र लीग तथा युवा लीग के सदस्य शामिल हैं।पुलिस का आरोप है कि कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता श्रमिक आंदोलन में शामिल होकर उसे हिंसक दिशा देने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने दावा किया कि कुछ लोग वास्तविक श्रमिक नहीं थे, बल्कि मजदूरों के आंदोलन की आड़ में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अस्थिरता फैलाने में शामिल थे। हालांकि, इन आरोपों पर सभी संबंधित लोगों का पक्ष सामने नहीं आया है।
फैक्ट्रियां खोलने और बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश
गृह मंत्री ने BGMEA और BKMEA के प्रतिनिधियों से बंद फैक्ट्रियों और कथित रूप से आंदोलन भड़काने वाले लोगों की जानकारी देने को कहा है। दोनों संगठनों ने सरकार को ऐसे प्रतिष्ठानों की सूची उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है, जिनके बारे में जानबूझकर बंद किए जाने का संदेह है।सरकार ने गृह मंत्रालय, पुलिस और कपड़ा उद्योग संगठनों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए विशेष अधिकारी भी नियुक्त किए हैं। इसके साथ ही सुरक्षा ऐप के माध्यम से निगरानी और पुलिस मुख्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित करने की योजना बनाई गई है।गृह मंत्री ने फैक्ट्री मालिकों से श्रमिकों के साथ बातचीत करने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। सरकार की कोशिश है कि वेतन विवाद का समाधान भी हो और देश का निर्यात उद्योग भी प्रभावित न हो।फिलहाल बांग्लादेश में कपड़ा श्रमिकों का आंदोलन आर्थिक मांगों के साथ राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ श्रमिक 30 हजार टका न्यूनतम वेतन की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ सरकार आंदोलन के पीछे राजनीतिक साजिश और हिंसा भड़काने के आरोप लगा रही है। आने वाले दिनों में न्यूनतम वेतन बोर्ड की बैठक और सरकार तथा श्रमिक संगठनों के बीच बातचीत से इस विवाद की दिशा तय होगी।