पीआईए के कर्मचारियों ने सीट शुल्क में की हेराफेरी, ऑडिट में खुलासा
प्रीमियम सीट को सामान्य दिखाकर घोटाला
लाहौर: पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) में प्रीमियम सीटों के अतिरिक्त शुल्क से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। लाहौर के अल्लामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात 20 से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों पर यात्रियों से वसूली गई रकम एयरलाइन के खाते में जमा नहीं करने का आरोप है। मामले में तीन महिला कर्मचारियों की संलिप्तता की बात भी सामने आई है। ऑडिट के बाद चिह्नित कर्मचारियों के वेतन से कटौती करके कुल 50,60,269 पाकिस्तानी रुपये वसूले गए हैं। यह रकम पीआईए के खाते में जमा कराई गई है। हालांकि, धनराशि की वसूली के बावजूद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आगे की विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपों के घेरे में आए कर्मचारी अपने पदों पर काम करते रहे हैं।
प्रीमियम सीट का पैसा लिया, रिकॉर्ड में सामान्य सीट दिखाई
कथित अनियमितताओं का तरीका सीट आवंटन और उससे मिलने वाले अतिरिक्त राजस्व से जुड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्राउंड स्टाफ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों से प्रीमियम, एक्स्ट्रा लेगरूम और बल्कहेड सीटों के लिए अलग शुल्क वसूलता था। इसके बाद बुकिंग सिस्टम में संबंधित सीटों को सामान्य श्रेणी की सीट के रूप में दर्ज कर दिया जाता था। आरोप है कि इस बदलाव के जरिए अतिरिक्त शुल्क का रिकॉर्ड छिपाया गया और यात्रियों से ली गई रकम कर्मचारियों ने अपने पास रख ली। इस तरह यात्री विशेष सीट के लिए भुगतान कर रहा था, लेकिन एयरलाइन के रिकॉर्ड में उस भुगतान के अनुरूप आमदनी नहीं दिखाई जा रही थी। मामले ने सीट आवंटन, अतिरिक्त शुल्क की प्राप्ति और खाते में रकम जमा होने के बीच निगरानी की अहमियत सामने रखी है। केवल सीट की बुकिंग दर्ज होना पर्याप्त नहीं है; उससे प्राप्त अतिरिक्त भुगतान का वित्तीय रिकॉर्ड से मेल होना भी जरूरी है। इस प्रकरण में कथित तौर पर इसी कड़ी का इस्तेमाल रकम छिपाने के लिए किया गया।
पुराने रिकॉर्ड की जाँच से खुली गड़बड़ी की परतें
लाहौर वित्त एवं ऑडिट समिति ने मई 2024 और मई 2025 के रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान इन अनियमितताओं की पहचान की। बुकिंग और वित्तीय विवरणों की पड़ताल के बाद संबंधित कर्मचारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। इसके बाद लाहौर स्टेशन मैनेजर अशफाक हुसैन अवान को औपचारिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
ऑडिट दस्तावेजों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, चिह्नित कर्मचारियों से रकम वेतन कटौती के माध्यम से वापस ली गई। वसूली की कुल राशि लगभग 50.60 लाख पाकिस्तानी रुपये रही। रुपये का यह आँकड़ा पाकिस्तान की मुद्रा में है। इस घटनाक्रम में ऑडिट की भूमिका इसलिए अहम है क्योंकि अनियमितता यात्रियों से सीधे शुल्क लेने और सिस्टम में अलग विवरण दर्ज करने से संबंधित थी। ऐसे मामलों में बुकिंग रिकॉर्ड और प्राप्त रकम की तुलना से ही अंतर स्पष्ट हो सकता है। यहाँ भी वित्तीय समीक्षा के बाद मामला सामने आया। हालांकि, उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रत्येक कर्मचारी से कितनी राशि वसूली गई या सभी की भूमिका एक जैसी थी।
रकम वापस मिली, विभागीय कार्रवाई पर स्थिति अस्पष्ट
कर्मचारियों से धनराशि वापस लिए जाने के बाद भी मामला केवल वसूली तक सीमित रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पीआईए के नियमों के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अपेक्षित थी, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आगे की प्रशासनिक कार्रवाई रुक गई। इस दावे को उपलब्ध रिपोर्ट के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
स्टेशन मैनेजर अशफाक हुसैन अवान ने रकम संबंधित व्यक्तियों से वसूलकर एयरलाइन के खाते में जमा किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित कर्मचारियों में से एक सेवानिवृत्त हो चुका है। उनके मुताबिक, किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में सक्षम अधिकारियों की ओर से उन्हें औपचारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई थी। वसूली और अनुशासनात्मक कार्रवाई दो अलग प्रक्रियाएँ हैं। पहली प्रक्रिया एयरलाइन की रकम वापस लाने से संबंधित है, जबकि दूसरी कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करती है। उपलब्ध जानकारी से धनराशि की वापसी स्पष्ट है, लेकिन अंतिम विभागीय फैसले की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती।
एयरलाइन की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल
यह प्रकरण पीआईए के भीतर अतिरिक्त सेवाओं से मिलने वाले राजस्व की निगरानी को लेकर चिंता पैदा करता है। यात्रियों से लिया गया शुल्क खाते तक पहुँचा या नहीं, इसकी नियमित जाँच वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सिस्टम में सीट की श्रेणी बदलने और उसके भुगतान का मिलान करने की प्रक्रिया भी जवाबदेही तय करने में उपयोगी हो सकती है। इसी बीच लाहौर हवाई अड्डे से संबंधित एक अलग घटना का भी उल्लेख सामने आया है। उसमें नौ मई 2026 को एक यात्री को कथित रूप से अनधिकृत प्राथमिकता देने पर एयरपोर्ट्स सिक्योरिटी फोर्स ने पीआईए के एक कर्मचारी का प्रवेश पास रद्द किया था। यह मामला सीट शुल्क संबंधी आरोपों से अलग है। सीट बुकिंग प्रकरण में फिलहाल प्रमुख पुष्ट घटनाक्रम रकम की वसूली है। अब आगे की विभागीय कार्रवाई और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर स्पष्ट निर्णय से ही जवाबदेही की पूरी तस्वीर सामने आएगी।